
जानिए कौन है अखिलेश यादव की खूबसूरत फायरब्रांड नेता, जिसने रेप की धमकी देने वालों को लगा दिया ठिकाने
कानपुर. कोई राजनीतिक आका नहीं था, सिर्फ और सिर्फ अपनी काबिलियत के दम पर उसने यूपी की सियासत में अपना स्थान बनाया है। सपा के सुल्तान की टीम का सबसे खूबसूरत चेहरा है, लेकिन तेवर फायरब्रांड। मम्मी-पापा दिल्ली में डॉक्टर है, लेकिन बिटिया को नेता बनने की धुन सवार थी। ऐसे में एक दिन फोन उठाया और सीधे अखिलेश यादव का नंबर लगा दिया। पहली ही बातचीत में अखिलेश को लडक़ी के तेवर-कलेवर जुदा किस्म के लगे तो राष्ट्रीय टीम में शामिल कर लिया है। अब लोकसभा चुनाव का वक्त करीब है। ऐसे में अखिलेश की इस खूबसूरत फायरब्रांड नेता को तमाम जिलों में भेजने की मांग उठने लगी है। कानपुर की सपा टोली भी चाहती है कि नई ऊर्जा वाली यह नेता एक बारगी कानपुर की धरती पर शब्दों की फायरिंग कर देगी तो विरोधी दलों की हवा बिगडऩे में देर नहीं लगेगी। यह डिमांड इसलिए, क्योंकि नई उम्र की यह खूबसूरत फायरब्रांड नेता किसी से डरती नहीं है। कुछ दिन पहले उसे सोशल मीडिया पर रेप की धमकी मिली तो उसने मुंहतोड़ जवाब दिया। चलिए सस्पेंस खत्म करते हैं... यह खूबसूरत फायरब्रांड नेता है पंखुड़ी पाठक।
18 साल की उम्र में डीयू के चुनाव में किया कमाल
पंखुड़ी ने राजनीति में अपनी मुकाम खुद बनाया है। उसके मम्मी-पापा जेसी पाठक और आरती पाठक डॉक्टर हैं और दिल्ली में ही प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। पंखुड़ी का छोटा भाई चिराग पाठक अभी ग्रेजुएशन फस्र्ट ईयर का स्टूडेंट है। दिल्ली में रहने वाली 26 साल की पंखुड़ी पाठक का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है। पंखुड़ी ने वर्ष 2010 में हंसराज कॉलेज के चुनाव में उन्होंने ज्वाइंट सेक्रेटरी पद का चुनाव जीता। उस समय पंखुड़ी की उम्र करीब 18 साल थी। पंखुड़ी किसी राजनीतिक दल से जुडऩा चाहती थीं, लेकिन भाजपा से परहेज था। कांग्रेस में भीड़ ज्यादा थी। ऐसे में उन्हें नौजवान अखिलेश का चेहरा ज्यादा अच्छा लगा और एक दिन सीधे अखिलेश यादव को फोन लगा दिया। अखिलेश दिल्ली पहुंचे तो मुलाकात भी हो गई।
सफर शुरू हुआ तो मंजिलें मिलती गईं
अब पंखुड़ी सपा की सदस्य थी। उसे समाजवादी पार्टी की छात्रसभा की नई दिल्ली इकाई की जिम्मेदारी मिली थी।गुजरते वक्त के साथ इस लडक़ी ने अपनी अलग पहचान बनाई तो अखिलेश ने उसे समाजवादी पार्टी की यूथ कोर कमेटी में शामिल कर लिया। पंखुड़ी को समाजवादी पार्टी की कोर टीम में शामिल करने के पीछे अखिलेश यादव का उद्देश्य युवाओं को बढ़ावा देना है। फिलहाल, पंखुड़ी पाठक को समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद पर नियुक्त है। पंखुड़ी पाठक अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव से काफी प्रभावित हैं।
सोशल मीडिया पर पंखुड़ी के लाखों फालोवर
पंखुड़ी सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं। फेसबुक पर भी हजारों फॉलोवर हैं, जबकि ट्विटर पर लाखों। टीवी चैनलों से लेकर सामाजिक फोरम पर सपा के यूथ विंग के लोग पार्टी का प्रतिनिधित्व कर सकें इसी लिहाज से सपा ने पंखुड़ी को आगे बढ़ाया है। दरअसल सपा का सोशल मीडिया कैंपेन और समाजवादी डिजिटल फोर्स को संभालने के लिए अब ऐसे प्रोफेशनल्स की टीम का गठन किया गया है, जिनमें बीबीसी जैसे संस्थानों में काम किए लोग भी शामिल हैं। सोशल मीडिया पूरी तरह से डिंपल ही संभालती हैं।
रेप की धमकी देने वालों को दिया था मुंहतोड़ जवाब
पंखुड़ी को सबसे ज्यादा चर्चा एक साल पहले मिली थी। पिछले साल सितंबर में पंखुड़ी पाठक को फेसबुक अकाउंट पर लखनऊ के रहने वाले एक युवक ने रेप करने की धमकी दी थी। इसके बाद पंखुड़ी पाठक ने दिल्ली में मायापुरी थाने में केस दर्ज कराया है। दरअसल, पंखुड़ी पाठक ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए राय मांगी थी, पोस्ट में पंखुड़ी ने पूछा था, "ऐसा कौन सा काम है, जो कि बीजेपी के लोगों ने नहीं किया।" फेसबुक पर पंखुड़ी पाठक की इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए लखनऊ के रहने वाले पंकज शुक्ला ने कहा, "रेप तुम्हारा होना चाहिए। तुम बच कैसे गई।" इसके बाद पंखुड़ी पाठक के समर्थन में भी एक हजार से ज्यादा लोगों ने रीट्वीट करते हुए काफी कुछ कहा था। पंखुड़ी ने जवाब में कहा था कि कानून का डर यूपी में नहीं है। यही वजह है लोग किसी को कुछ भी कहने के लिए आजाद हैं। सोशल मीडिया से लेकर सामाजिक जगहों पर लोग महिलाओं को बिना हिचक और बिना किसी डर के किसी भी तरह के शब्द इस्तेमाल करते हैं। एक और ट्वीट में पंखुड़ी पाठक ने लिखा, 'मुझे किसी धमकी से डर नहीं लगता। लेकिन क्या किसी सरकारी कर्मचारी की इस तरह खुलेआम ऐसी बात करने की हिम्मत होनी चाहिए ?'
पंखुड़ी की स्टार प्रचारक के रूप में ज्यादा डिमांड
कानपुर की सपा इकाई ने प्रदेश नेतृत्व को भेजे मांगपत्र में अखिलेश यादव, डिंपल यादव के साथ-साथ पंखुड़ी पाठक को बतौर स्टार प्रचारक कानपुर भेजने का आग्रह किया है। अलबत्ता अभी यह तय नहीं है कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन होने की स्थिति में कानपुर की दोनों लोकसभा सीट में सपा के लिए कोई सीट आएगी अथवा नहीं। बहरहाल, कांग्रेस के गठबंधन में शामिल नहीं होने की स्थिति में कानपुर नगर सीट से सपा उम्मीदवार मैदान में उतरेगा, जबकि अकबरपुर सीट बसपा के खाते में जाएगी।
Published on:
12 Jul 2018 09:51 am
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