
कानपुर। दो दशक पहले यूपी बोर्ड की परीक्षा के परिणाम पर सूबे के लोगों की नजर कानपुर में रहती थी। क्योंकि यूपी की मैरिट लिस्ट में पहले से लेकर दसवें स्थान पर इसी शहर के छात्रों का कब्जा रहा करता था। लेकिन वक्त बदला और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और गणेश शंकर विद्यार्थी के शिक्षा की भूमि जमीदोज हो गई। जिस तरह से गंगा में प्रदूषण बड़ा, उसी तरह एजूकेशन के क्षेत्र को नकल माफियाओं ने अपने कब्जे में ले लिया। परिणाम यह रहा कि मैनचेस्टर ऑफ इस्ट के तमगे से यह रूतबा भी छिन गया। बीएनएसडी इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल अंगद सिंह इसके पीछे के कई कारण बताते हैं। कहते हैं कि क्षत्रपों के शासन के दौरान अक्ल के बजाए नकल के जरिए छात्र पास कराए गए। मेधाओं के सपने आंसू में बहते गए। लेकिन सीएम योगी ने 20108 एग्जाम के दौरान कल्याण सिंह के राज की वापसी करा दी। जिसके चलते अब कहा जा सकता है कि दो साल के अंदर आठ किले ध्वस्थ कर सीएम शिक्षा को फिर से पुराने ढर्रे पर लाएंगे।
इनके चलते पिछड़ा कानपुर
गंगा के किनारे बसा शहर जहां कपड़े, लेदर के साथ ही धार्मिक, आर्थिक और एजूकेशन की नगरी के तमगे से देश-विदेश में अपनी पचहान बनाई थी। लेकिन राजनीतिक दलों की उपेक्षा के चलते पकड़ा और चमड़े के साथ धरोहरें गुम होने की कगार में पहुंच गई तो शिक्षा का हब कहे जाने वाले कानपुर का नाम यूपी बोर्ड परीक्षा की मैरिट वाली सूची से गायब हो गया। लेकिन योगी सरकार आने के बाद 2018 की यूपी बोर्ड परीक्षा कल्याण सिंह के राज की तरह कराई, जिसके चलते जो स्कूल कई वर्षो से मेरिट लिस्ट में छाए रहते थे, वह इस साल गायब मिले। 2002 से लेकर 2017 तक यूपी बोर्ड परीक्षा की मैरिट सूची में कानपुर के एक भी छात्र ने पहला स्थान नहीं बनाया। हलांकि दस छात्रों की सूची में कुछ छात्रों ने नाम दर्ज करवाए। इस पर जब प्रिंसिंबल अंगद सिंह से बात की गई तो उन्होंने खुद माना कि नकल के चलते अच्छी शिक्षा देने वाले स्कूलों के बच्चों को मैरिट में स्थान नहीं मिला। सीएम योगी ने दो किले ढहा दिए हैं, आठ बचे हैं जिन्हें वह दो साल के अंदर ध्वस्थ कर शिक्षा को नकल विहीन बना देंगे।
सिहर उठते हैं नकलची, दिखा असर
आलम यह है कि आज भी कल्याण सिंह के उस जमाने को याद करके नकलची सिहर उठते हैं। गांव-गांव में इक्का-दुक्का लोग ही कल्याण सिंह के समय में बोर्ड की परीक्षा को पास कर सके थे। यूपी की योगी सरकार को भी उसी कल्याण सरकार से अब कंपेयर किया जा रहा है और माना जा रहा है कि बोर्ड परीक्षा के मामले में कल्याण सिंह सरकार की ही वापसी हो गई है और उसका नतीजा भी रविवार को देखने को मिल गया। इस बार यूपी बोर्ड की हाईस्कूल में 75.43 फीसदी छात्र-छाएं पास हुए हैं, जबकि इंटरमीडिएट में 72.43 फीसदी छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण घोषित किए गए। यूपी बोर्ड को टोटल रिजल्ट 75.16 प्रतिशत रहा जिसमें छात्र प्रतिशत 72.27 और छात्राओं का प्रतिशत 78.81 रहा। इस साल हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में 66 लाख 37 हजार 18 परीक्षार्थी पंजीकृत थे लेकिन बोर्ड परीक्षा में नकल को लेकर की गई सख्ती और परीक्षा केन्द्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के बाद 11 लाख 32 हजार से ज्यादा हाई स्कूल और इंटर के परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी थी।
तीनों के मुकाबले सीएम योगी आगे निकले
उत्तर प्रदेश की पिछली अखिलेश सरकार, मायावती सरकार और मुलायम सरकार से अगर योगी सरकार को बोर्ड परीक्षा के मामले में कंपेयर किया जाए तो इस बार नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए कड़े इंतजाम किए गए थे। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। डीएम एसएसपी से लेकर एसटीएफ, एलआयू तथा लोकल पुलिस को नकलविहीन परीक्षा करने के लिए जिम्मेदारियां दी गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा खुद परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। इस बार मनमाने परीक्षा केंद्र नहीं बनाए गए, नियमावली के तहत परीक्षा केंद्रों का कंप्यूटर से निर्धारण हुआ था। परीक्षा केंद्र पर तैनात केंद्र व्यवस्थापक व प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी तय की गई है और सामूहिक नकल होने पर उन्हें भी जेल भेजे जाने का नियम बनाया गए थे। जबकि नकल माफियाओं के खिलाफ इस बार कानूनी प्रक्रिया के तहत गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई का प्रावधान किया गया था।
सरकार के आदेश पर तैयार किया था खाका
यूपी बोर्ड ने नोडल अधिकारी के रूप हर जिले में एसपी रैंक के अधिकारी की नियुक्ति की गई थी। हर जिले के परीक्षा केंद्र को सुपर जोन, जोन और सेक्टर में बांटा गया था। सुपर जोन के प्रभारी एडिशनल एसपी है और जोन की जिम्मेदारी सीओ के कंधे पर था। जबकि सभी सेक्टर थाना इंचार्ज को दिये गये थे। इसके अलावा प्रत्येक सर्किल मुख्यालय पर क्यूआरटी भी बनाई गई थीं, जो सीओ के निर्देश पर काम कर रही थी। इन सभी परीक्षा केंद्रों पर एक दरोगा के साथ 3 कांस्टेबल परीक्षा ड्यूटी पर लागए गए थे। इनके कंधों पर बाहरी नकल माफियाओं के अंदर जाने पर रोक लगाने व शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी थी। नकल माफियाओं के पकड़े जाने पर उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट में कार्रवाई के आदेश दिए गए थे।
Published on:
29 Apr 2018 04:59 pm
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