कानपुर। कुंभ से पहले कानपुर से लेकर इलाहाबाद तक गंगा के जल को निर्मल बनाने के आदेश सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिए हैं। साथ ही गंगा के किनारे स्थित टेनरियों को तीन माह तक बंद करने के आदेश दिए हैं, जिसके चलते प्रशासनिक अमला मां गंगा को साफ करने के लिए युद्ध स्तर पर जुटा हुआ है। लेकिन कानपुर स्थित उत्तर प्रदेश टेक्सटाईल्स टेक्नोलॉजी इन्स्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने उन्हें एक तोहफा दिया है। संस्थान ने एक चमत्कारी कपड़े को इजाज किया है, जो जो कल-कारखानों और थर्मल पावर प्लाण्ट्स से निकलने वाले गंदे पानी के साथ ही जहरीले पदार्थ सोख लेगा और गंगा में प्रदूषित पानी नहीं जाने देगा।
जहर से मिलेगी आजादी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पिछले साढ़े चार साल गंगा को प्रदूषित नदी से उबारने के लिए करोड़ों रूपए पानी की तरह बहा दिए, लेकिन उनके हाथ मायूषी ही लगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसी के कारण शहर से सभी नलों को बंद कर टेनरियों के तीन माह तक बंद करने के साथ गंगा की निगरानी द्रोन के जरिए किए जाने के आदेश दिए थे। जिस पर सरकारी अमला जुटा हुआ है। इसी बीच कानपुर के यूपीटीटीयू (उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान ) के टैक्सटाईल इन्जीनियर डॉक्टर शुभांकर मैतीने भी ऐसा इलेक्ट्रो कण्डक्टिव पॉलीमर खोज निकाला जिसका लेप चढ़ा कपड़ा पानी से जहरीले रसायन खींच लेने का काम करेगा। शोधकर्ता ने अपने लैब टेस्ट में साबित किया है कि किसी भी दूषित पानी में यह कपड़ा डालते ही वो इसके रासायनिक तत्व और भारी धातुयें सोख लेगा और गंगा में दूषित पानी को जाने से पूरी तरह से रोक देगा।
जहरीले तत्वों को सोख लेगा कपड़ा
डॉक्टर शुभांकर मैती कहते हैं वॉटर प्यूरीफायर के बाजार में आने से पहले घर घर मलमल के कपड़े को नल की टोटिंयों में भी बांधा जाता था। लेकिन यूपीटीटीआई में बना काले रंग का यह पालीमर क्रोमियम, कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम और मरकरी जैसी भारी धातुओं और खतरनाक बैक्टीरिया को पानी से अलग कर देगा। डॉक्टर शुभांकर मैती ने बताया कि कानपुर के चमड़ा कारखाने गंगा में जहरीले क्रोमियम को गिराते हैं तो कन्नौज के इत्र कारखानें अपना रासायनिक कचरा। देश में जगह जगह तमाम पवित्र नदियां उद्योगों के रासायनिक कचरे की चपेट में हैं। डॉक्टर मॉती कहते हैं कि उनके ईजाद किये गये कपड़े से पूरी गंगा तो नहीं छानी जा सकती। अगर उद्योगों से निकलने वाला रासायनिक कचरा छान कर बचा हुआ शोधित पानी नदी में जाने दिया जाए तो भी गंगा का जल निर्मल हो जाएगा।
राखयुक्त पानी को भी छाना जा जाएगा
डॉक्टर शुभांकर मैती ने बताया, देश के पर्यावरणविद् लम्बे अर्से से थर्मल पॉवर प्लाण्ट के खिलाफ आन्दोलनरत हैं। एक सर्वे के मुताबिक इन पॉवर प्लाण्ट्स की चिमनियों से हवा को प्रदूषित करने वाले तेरह हजार टन पार्टिकल्स निकल रहे हैं तो वहीं बेहिसाब राखयुक्त पानी भूगर्भ में उड़ेला जा रहा है। ये लोगों के पीने का पानी जहरीला बना रहा है तो वहीं की उर्वरा शक्ति नाश कर रहा है। ऑकड़ों के मुताबिक देश के थर्मल पावर प्लाण्टों के आसपास के क्षेत्रों में सवा करोड़ की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। पनकी थर्मल पावर स्टेशन के कारण कानपुर भी इस आपदा से जूझता रहा है। उनका का दावा है कि इस कपड़े से थर्मल पॉवर प्लाण्ट से निकलने वाले राखयुक्त पानी को भी छाना जा सकता है।
इस संस्थान ने बढ़ाए हाथ
यूपीटीटीआई के टैक्सटाईल वैज्ञानिक बेहद उत्साहित हैं। निदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनीवर्सिटी ने उनके शोध को आगे बढ़ाने और आर्थिक अनुदान को मन्जूरी दे दी है। इसके अलावा वहां के वैज्ञानिक भी संस्थान आएंगे और मिलकर कपड़े पर और रिसर्च होगा। डॉक्टर कुमार ने बताया कि हमारी रिसर्च में कपड़े को कईबार केमिकल युक्त पानी को रोकने के लिए एक नल में बांधा गया और नजीता हमारे पक्ष में गया। जल्द ही इसे योगी सरकार के पास भेजा जाएगा और वहां से अनुमति मिलने के बाद गंगा के आपपास स्थित लगे ट्रीटमेंट प्लान्टों के नलों में कपड़े को बांधकर जहरीले तत्वों को गंगा के साथ जमीन में जाने से बचाया जाएगा।