बड़ा खुलासा : बिकरू में पुलिसकर्मियों पर दागे गए थे अमेरिकन विंचेस्टर कारतूस

- आइजी मोहित अग्रवाल ने बताया कि विंचेस्टर कारतूस भारत में प्रयोग नहीं किए जाते हैं, विकास दुबे तक ये कैसे पहुंचे, इसकी जांच कराई जाएगी

By: Hariom Dwivedi

Published: 01 Aug 2020, 04:26 PM IST

कानपुर. बिकरू गांव में दो जुलाई की रात को पुलिसकर्मियों पर विंचेस्टर कारतूस दागे गए थे। भारत में विंचेस्टर कारतूस का प्रयोग नहीं किया जाता है। पहले अमेरिकन सेना इन कारतूसों का प्रयोग करती थी। बाद में यूरोप और अमेरिका में निशानेबाजी के लिए इसका इस्तेमाल किया जाने लगा। खुलासे के बाद पुलिस जांच में जुटी है कि आखिर ये खतरनाक कारतूस गैंगस्टर विकास दुबे तक पहुंचे कैसे? कानपुर रेंज के आइजी मोहित अग्रवाल ने बताया कि विंचेस्टर कारतूस मिलने की जानकारी फॉरेंसिक टीम ने दी है। ये कारतूस भारत में प्रयोग नहीं किए जाते हैं। ये विकास दुबे तक कैसे पहुंचे, इसकी जांच कराई जाएगी।

बिकरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के दूसरे दिन फॉरेंसिक टीम और पुलिस टीम को मौके से 72 जिंदा व खाली कारतूस बरामद हुए थे। इनमें से एक जिंदा कारतूस और 10 खाली खोखे .30-06 विंचेस्टर कारतूस के थे। भारत में सेना, किसी भी राज्य की पुलिस या शस्त्र लाइसेंस धारक इसका प्रयोग नहीं करते हैं। इसके अलावा एके-47 के नौ, नाइन एमएम के एक कारतूस के अलावा, .30-06 एसपीआरजी के 11 खोखे बरामद हुए हैं। 12 खोखे भरे गए थे।

उधर, यूपी एसटीएफ को पंजाब के उस गिरोह के दो लोगों के बारे में जानकारी मिली है, जहां विकास दुबे ने रायफलों को मॉडीफाई कराया था। दोनों लोगों की तलाश में एक टीम पंजाब में मौजूद है। बिकरू कांड की फॉरेंसिक जांच और पुलिस पड़ताल में सामने आया था कि गैंगस्टर विकास ने सेमीऑटोमेटिक सेल्फ लोडेड रायफल और स्प्रिंग रायफल का प्रयोग किया था। जांच में पुलिस को जानकारी मिली कि दोनों सिंगल शॉट रायफल थीं, जिन्हें पंजाब में मॉडीफाई कराया गया था। पूर्व एसएसपी दिनेश कुमार पी ने पंजाब में अलग से एक टीम लगाई थी। एसटीएफ भी इस मामले में जांच में लगी है।

एसआइटी को मिला थोड़ा और वक्त
बिकरू कांड की जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम कानपुर में डेरा डाले हुए है। एसआइटी को जांच पूरी करने के लिए 31 जुलाई तक का वक्त दिया गया था, लेकिन जांच पूरी न हो पाने की वजह से उसे थोड़ा वक्त और दिया गया है। जांच टीम ने सरकार को जानकारी देते हुए बताया कि विकास दुबे को लेकर कानपुर, लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से जानकारी मांगी गई है। इनमें गैंगस्टर के परिवार, करीबियों, रिश्तेदारों और गुर्गों को मिलाकर 57 लोगों के नाम मकान, फ्लैट या भूखंड खरीदे गये, प्राधिकरणों से जिनकी डिटेल मांगी गई है। एसआइटी ने ब्यौरा आने तक वक्त मांगा था। सूत्रों के मुताबिक, इसके अलावा एसआइटी ने कई और लोगों की लिस्ट बनाई है, जिनका बयान लिया जाना बाकी है।

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