
Vikas Dubey: सेवानिवृत्त सीओ ने बताया गैंगस्टर बनने से पहले विकास दुबे का काम, जानकर रह जाएंगे दंग
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. यूपी के चर्चित बिकरू कांड (Bikaru kand) के कुख्यात विकास दुबे (Vikas Dubey) की गैंगस्टर (Gangster Vikas Dubey) बनने के पूर्व की एक और कहानी है। जिसकी पूरी दास्तां रिटायर सीओ बृजेन सिंह जानते हैं। उस समय बृजेन सिंह 1997 में कानपुर देहात के रसूलाबाद सर्किल में सीओ पद पर तैनात थे। उनके कार्यकाल के दौरान विकास दुबे रसूलाबाद में ही किसी रिश्तेदार के यहां रहकर रेडियो रिपेयरिंग का काम करता था। लेकिन दिमाग के शातिर विकास ने उसमें भी अपने मुताबिक गोरखधंधा खोज निकाला। रिपेयरिंग के काम के माध्यम से वह इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और घड़ियों की स्मगलिंग भी करता था। जानकारी होने पर सीओ ने उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराई थी। उसे रसूलाबाद से खदेड़ा गया। जिसके बाद वह बिकरू (Bikru) तक सीमित रह गया।
शुरुवात से झगड़ालू प्रवृत्ति का था विकास
बृजेन सिंह 31 जुलाई 1999 में गाजियाबाद से सहायक सेनानायक 41 वाहिनी पीएसी पद से सेवानिवृत्त हुए। मुरादाबाद सिविल लाइंस के फकीरपुर के रहने वाले हैं। वो बताते हैं कि बहुत कुछ याद में नहीं है लेकिन विकास दुबे को वह भूले नहीं हैं। बताया कि विकास उनकी तैनाती के दिनों में रसूलाबाद में अपने किसी रिश्तेदार के यहां ही रह रहा था। वह बहुत झगड़ालू प्रवृति का था। उस वक्त वह रेडियो मैकेनिक था। शातिर विकास ने रेडियो रिपेयरिंग में भी अपना धंधा खोज निकाला था।
लालच बढ़ने पर वह अपराध दुनिया में आगे बढ़ गया
उन्होंने बताया कि वह इतना शातिर था कि उसने सीओ से काम कराने के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठ लिए थे। इसकी जानकारी होने पर उन्होंने सख्ती बढ़ाई। और विकास की हरकतों पर उन्होंने निगरानी बैठा दी। जिसके बाद उसे वहां से भागना पड़ा। कुछ समय बाद उन्हें जानकारी मिली कि विकास दुबे ने किसी उद्यमी से हाथ मिला लिया है। उसके जमीनों के विवाद सुलझा रहा है और वह उसे पैसों से मदद कर रहे हैं। पैसा आने के साथ ही उसका लालच बढ़ गया। उसके बाद वह अपराध की दुनिया में आगे बढ़ता चला गया।
Published on:
23 Mar 2021 02:20 pm
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