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मुस्लिम मतदाताओं ने गठबंधन को नकारा, पंजे के बजाए कमल का फूल खिला

कैंट, सीसामऊ और आर्यनगर में सपा के विधायक और 50 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम मतदाता, बावजूद अखिलेश के उम्मीदवार को नहीं मिला समर्थन।

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voting percentage in muslims area in kanpur seat

मुस्लिम मतदाताओं ने गठबंधन को नकारा, पंजे के बजाए कमल का फूल खिला

कानपुर। करीब पौने तीन लाख से ज्यादा मुस्लिम आबादी वाली कानपुर लोकसभा सीट में मुसलमान मतदाताओं ने गठबंधन से पूरी तरह से मुंह फेर लिया। जबकि अल्पसंख्यकों का एकमुश्त वोट हासिल करने के बाद भी कांग्रेस हाशिए पर चली गई और औद्योगिक नगरी में फिर से कमल का फूल खिल गया। हालात ये रहे कि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रामकुमार निषाद की जमानत जब्त हो गई। सीसमऊ, आर्यनगर और कैंट विधानसभा के कई बूथों पर खाता तक नहीं खुल सका।

नहीं मिला मुस्लिमों का समर्थन
लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और बसपा ने गठबंधन कर चुनाव के मैदान में उतरे। अखिलेश और मायावती ने दलित, मुस्लिम और ओबीसी मतदाताओं के सहारे सूबे में भाजपा को पटखनी देने की रणनीति बनाई, लेकिन मतदाताओं ने उनके मंसूबों में पानी फेर दिया। मुस्लिम बाहूल्य सीसामऊ विधानसभा सीट से गठबंधन के उम्मीदवार राजकुमार को मात्र 7089 तो वहीं आर्यनगर से 4730 वोट मिल सके। जबकि कैंट में महज तीन हजार वोट साइकिल के खाते में पड़े और पांचों विधानसभाओं में सपा को 48275 वोट मिले। सीसामऊ से सपा के इरफान सोलंकी, आर्यनगर से सपा के अमिताभ बाजपेयी और कैंट से सपा-कांग्रेस के साझा उम्मीदवार रहे सोहेल अंसारी विधायक है।

7 हजार में सिमटी सपा
आर्यनगर, सीसामऊ और कैंट विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस को जहां 60 व 70 से 80 हजार के आसपास वोट मिले, वहीं गठबंधन सात हजार के करीब सिमटकर रह गया। यदि पिछले लोकसभा चुनाव के परिणाम देखें तो तब भी सपा और बसपा को मतदाताओं ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। हालांकि, दोनों दलों के मिल जाने से उससे कुछ बेहतर स्थिति का अनुमान लगाया जा रहा था। दूसरी ओर देखें तो कांग्रेस को अल्पसंख्यकों का एकमुश्त वोट मिला, फिर भी वह बड़े अंतर से चुनाव हार गई।

विधायक भी नहीं दिलवा पाए वोट
2017 के विधानसभा चुनाव में सपा को सीसामऊ और आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र में जीत मिली थी। सीसामऊ से इरफान सोलंकी विधायक हैं। यहां सपा को 73030 मत मिले थे, जबकि इस चुनाव में महज 7089 वोट मिले। इसी तरह आर्यनगर से अमिताभ बाजपेयी विधायक हैं। यहां सपा को 70993 वोट मिले थे, जबकि इस बार मात्र 4730 वोट ही मिल सके। इसका मतलब दोनों विधायक अपना वोट भी गठबंधन प्रत्याशी को नहीं दिला सके। ऐसे में दोनों की साख पर सवाल है। यहां के कई बूथों पर कांग्रेस के बाद भाजपा को वोट मिले।

कांग्रे के वोट में बढ़ोतरी, सपा का घटा
कानपुर संसदीय सीट पर वोट ज्यादा पड़े लेकिन भाजपा का वोट बैंक कानपुर में कुछ कम हुआ। हालांकि कांर्ग्रेस ने अपने वोट बढ़ाए। जबकि सपा को ज्यादा नुकसान हुआ। कानपुर में कांर्ग्रेस ने 6.88 फीसद वोट में वृद्धि की। वहीं सपा अपने वोटों में बढ़त नहीं बना सकी। 2014 के चुनाव में कानपुर व अकबरपुर सीट पर उसका कुल वोट 9.57 फीसद था। इस चुनाव में घटकर 2.59 फीसद रह गया। मतगणना के बाद सपा के नेता करारी हार के बाद मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं तो वहीं कांग्रेस हार के कारणों की समीक्षा की बात कर रही है।

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