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इस्तेमाल चायपत्ती और पीपल के पत्तों से साफ होगा पानी

एआईटीएच ने बनाया इकोफ्रेंडली फिल्टर, क्रोमियम भी हटाने में सक्षम पानी के मिनरल्स रहेंगे सुरक्षित, दस पैसे प्रति लीटर का आएगा खर्च

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इस्तेमाल चायपत्ती और पीपल के पत्तों से साफ होगा पानी

इस्तेमाल चायपत्ती और पीपल के पत्तों से साफ होगा पानी

कानपुर। चाय बनाने के बाद उपयोग की गई चायपत्ती को अब फेंकिए नहीं, बल्कि इसे पानी साफ करने के काम में लाइए। चायपत्ती और पीपल की पत्ती के जरिए भी पानी को साफ और पीने लायक बनाया जा सकता है। एआईटीएच के वैज्ञानिकों ने पानी को शुद्ध करने का नया और ईकोफे्रंडली फिल्टर तैयार किया है, जिससे पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से पानी को शुद्ध किया जा सकेगा। इसमें किसी भी प्रकार के केमिकल का प्रयोग करने की जरूरत ही नहीं होगी।

बीमारियों की जड़ बनता दूषित पानी
स्वच्छ पानी सेहत के लिए बेहद जरूरी है। दूषित पानी बीमारियों की जड़ बनता है, यही कारण है कि आरओ और मिनरल वॉटर के उपयोग का चलन बढ़ रहा है। मगर ज्यादातर आरओ में केमिकल का प्रयोग कर पानी से दूषित और हानिकारक पदार्थ निकाले जाते हैं, जिससे पानी पर केमिकल का असर भी रह जाता है। ऐसे में प्राकृतिक तरीके शुद्ध किया जाने वाला पानी शरीर के लिए ज्यादा लाभदायक सिद्ध होगा।

आसानी से दूर होंगे हैवी मेटल
एआईटीएच के वैज्ञानिकों ने ऐसा इकोफ्रेंडली फिल्टर तैयार किया है, जिससे पानी में घुले हैवी मेटल दूर किए जा सकेंगे। यह हैवी मेटल ऐसे होते हैं, जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इन्हें निकालने के लिए किसी केमिकल या मशीन का प्रयोग नहीं बल्कि इकोफे्रंडली फिल्टर का किया जाएगा। यह चाय में प्रयोग होने के बाद बची चायपत्ती और पीपल के पत्तों से तैयार किया है। यह फिल्टर रसायनिक पदार्थों के अलावा क्रोमियम, जैसे हैवी मेटल सोख लेता है लेकिन पानी में मिले मिनरल्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है।

सुरक्षित रहेंगे पानी के मिनरल्स
डॉ. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर हैंडीकैप्ड के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष ने बताया कि बढ़ते जल प्रदूषण को देखते हुए इसे तैयार किया गया है। इसे प्राकृतिक चीजों से बनाया गया है। इसके प्रयोग से सिर्फ खतरनाक केमिकल और हैवी मेटल ही पानी से अलग होंगे। इससे पानी के मिनरल्स सुरक्षित रहेंगे। डॉ. आशुतोष मिश्रा के मुताबिक बेकार चायपत्ती और पीपल के पत्तों को सुखाकर एक साथ उसे मिलाकर पाउडर तैयार किया गया। फिर इसे मफल भ_ी में ऑक्सीजन के बिना 350 डिग्री तक पायरोलिसिस किया गया।

दस पैसे प्रति लीटर का खर्च
डॉ. आशुतोष के मुताबिक यह इकोफ्रेंडली फिल्टर काफी सस्ता है। अगर पानी को शुद्ध करने की बात करें तो एक लीटर पानी के लिए सिर्फ दस पैसे का खर्च आएगा। जल्द यह इकोफ्रेंडली फिल्टर लोगों के उपयोग के लिए बाजार में भी उपलब्ध होगा।