5 मई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्वास्थ्य सेवा विफल : राजस्थान में ऑक्सीजन के तीनों प्लांट ठप, सिलेण्डरों पर आश्रित अस्पताल

कोरोना काल के बाद ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर बना राजकीय चिकित्सालय फिर से सिलेण्डरों पर आश्रित हो गया है। जिले के दूसरे बड़े जिला स्तरीय चिकित्सालय में लगे तीनों ऑक्सीजन प्लांट एक पखवाड़े से ठप पड़े हैं।

2 min read
Google source verification

करौली

image

Nupur Sharma

May 04, 2023

photo_2023-05-04_13-17-11.jpg

हिण्डौनसिटी. कोरोना काल के बाद ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर बना राजकीय चिकित्सालय फिर से सिलेण्डरों पर आश्रित हो गया है। जिले के दूसरे बड़े जिला स्तरीय चिकित्सालय में लगे तीनों ऑक्सीजन प्लांट एक पखवाड़े से ठप पड़े हैं। ऑक्सीजन उत्पादन नहीं होने से भर्ती रोगियों को सिलेण्डरों से मैनीफोल्ड के जरिए प्राणवायु की आपूर्ति की जा रही है। चिकित्सालय में प्रतिदिन 20-25 बड़े ऑक्सीजन सिलेण्डरों की खपत हो रही है। सिलेण्डरों को प्रतिदिन करौली के प्राइवेट ऑक्सीजन प्लांट से रिफिल कराना पड़ रहा है।

दो वर्ष पहले ऑक्सीजन का संकट झेल चुके शहर के राजकीय चिकित्सालय में सरकार ने कोविड़ उपचार प्रबंधन के सुद्रढ़ीकरण के तहत एक साथ दो ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कराए। 100 और 75 सिलेण्डर के प्लांट लगने से चिकित्सालय प्रतिदिन 199 सिलेण्डर ऑक्सीजन उत्पादन से आत्मनिर्भर बन गया। लेकिन प्लांट लगाने वाली कम्पनियों की ओर से नियमित वार्षिक रखरखाव नहीं करने से ऑक्सीजन प्लांटों की सांसें उखडऩा शुरू हो गई। सूत्रों के अनुसार चिकित्सालय में नगर परिषद से माध्यम से लगा 75 सिलेण्डर के क्षमता ऑक्सीजन कुछ माह बाद ही ठप हो गया। जिसकी कम्पनी से मरम्मत के लिए कईयों बार नगर परिषद को लिखा जा चुका है। इस बीच अप्रेल माह के दूसरे सप्ताह में 100 और 24 सिलेण्डर क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट भी तकनीकी खामी आने से ठप हो गया। ऐसे में सिलेण्डर मंगवाकर चिकित्सालय के वार्डों में भर्ती रोगियों की उखड़ती सांसों को संवारा जा रहा है।

प्रति दिन खप रहे 20-25 सिलेण्डर: ऑक्सीजन प्लांटों के ठप होने से चिकित्सालय में सिलेण्डरों से मैनीफोल्ड के जरिए जरुरतमंद रोगियों को प्राणवायु दी जा रही है। सर्वाधिक ऑक्सीजन की जरुरत आईसीयू, एसएनसीयू व मेडिकल वार्ड में पड़ती है। जिससे प्रतिदिन 20-25 सिलेण्डर रीत रहे हैं। ऐसे में प्रति दिन करौली के निजी ऑक्सीजन प्लांट से सिलेण्डरों को रिफिल कर मंगवाया जा रहा है। जिस पर हर रोज हजारों रुपए खर्च हो रहे हैं।

यह भी पढ़ें : रेलवे स्टेशन के पीछे होगा एंट्री गेट, एस्केलेटर वाले फुट ओवर ब्रिज के साथ होगी मल्टीलेवल पार्किंग

तकनीकी खराबी से घट गई शुद्धतासूत्रों के अनुसार मशीनरी में खराबी आने से प्लांट में ऑक्सीजन कर शुद्धता(प्योरिटी) में गिरावट आ गई। ऐसे में गुणवत्ता कम होने से मानकों के मुताबिक रोगियों के लिए आपूर्ति बंद करनी पड़ी। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार रोगी के लिए ऑक्सीजन की प्योरिटी 90 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए। जबकि तकनीकी खराबी के चलते प्लांट से उत्पादित ऑक्सीजन की प्योरिटी 50-60 प्रतिशत रह गई थी।


फैक्ट फाइल
जिला चिकित्सालय पलंग क्षमता - 250
वार्डों में ऑक्सीजन प्वाइंट - 110
ऑक्सीजन प्लांट तीन(बंद)
50 सिलेण्डर की मैनीफोल्ड यूनिट - तीन (चालू)
ऑक्सीजन कंसंट्रेटर - 113

यह भी पढ़ें : गहलोत सरकार का पिंकसिटी में ब्रह्मपुरी-आमेर और गोविंद नगर के 80 हजार लोगों को सीधा फायदा


इनका कहना है
ऑक्सीजन प्लांटों की मरम्मत के लिए जिला नोडल अधिकारी व राज्य स्तरीय अधिकारियों को लिखा है। एक प्लांट की मरम्मत कराने को नगर परिषद को भी लिखा जा चुका है। फिलहाल रोगियों को सिलेण्डरों से ऑक्सीजन दी जा रही है। - पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता, पीएमओ जिला चिकित्सालय, हिण्डौनसिटी.