
करौली. अधिकारी-कर्मचारियों की लापरवाही आखिर उपभोक्ताओं पर भारी पड़ ही गई। लम्बे समय से क्षतिग्रस्त गणेश गेट बाहर के भूमिगत जलाशय के क्षतिग्रस्त होने के बाद भी अधिकारियों ने अनदेखी की। नतीजतन सोमवार सुबह भूमिगत जलाशय की छत टूट गई। इससे शहर में कई इलाकों की जलापूर्ति प्रभावित हो गई। हालांकि टंकी में जमा हुए मलबे को निकालने का काम शुरू करा दिया गया, लेकिन फिर भी मंगलवार को जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
पम्प हाउस पर कार्यरत पम्प चालक रमेश गुर्जर ने बताया कि सुबह 9.45 बजे अचानक धमाके की आवाज सुनाई दी। वे भूमिगत जलाशय को देखने पहुंचे तो उसकी छत का एक हिस्सा टूटा पड़ा था। सूचना पर जलदाय विभाग के अधिशासी अभियंता रामकेश मीणा, शहरी जल योजना के सहायक अभियंता एसएन शर्मा व कनिष्ठ अभियंता बबली ने मौके पर पहुंच क्षतिग्रस्त छत का जायजा लिया। इसके बाद टंकी से पानी निकाल मलबे को हटाने का कार्य शुरू किया गया। सहायक अभियंता शर्मा ने बताया कि मलबा हटा छत की मरम्मत का कार्य शुरू कराया जाएगा। हालांकि मंगलवार को यहां से की जाने वाली डाइरेक्ट बूस्टिंग व मदनमोहनजी टंकी से की जाने वाली जलापूर्ति प्रभावित होगी।
कुछ इलाकों में ही हो सकी सप्लाई
सहायक अभियंता के अनुसार टंकी की छत टूटने से पहले तक चटीकना व मदनमोहनजी की टंकी से की जाने वाली जलापूर्ति हो चुकी थी। लेकिन सीताबाड़ी, झूमा गली, सब्जीमंडी, होली खिड़किया हरिजन बस्ती की जलापूर्ति नहीं हुई। अब टंकी से मलबे की सफाई होने के बाद इसमें पानी भरा जाएगा। इसके बाद जलापूर्ति होगी।
पत्रिका ने चेताया था
काफी पुराने हो चुके गणेश गेट बाहर के भूमिगत जलाशय की दीवार जर्जर हो चुकी हैं। इसके अलावा जुलाई माह में हुई अतिवृष्टि के दौरान भी तेज पानी के बहाव से भी इसे नुकसान हुआ। इसकी आधा दर्जन से अधिक पट्टियां क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं। इसको लेकर राजस्थान पत्रिका में 19 सितम्बर को 'कहीं देरी ना पड़ जाए भारी' खबर प्रकाशित कर नगरपरिषद को चेताया था। कनिष्ठ अभियंता द्वारा भी इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया। इसके बावजूद नगरपरिषद ने इसकी मरम्मत की अनदेखी की। इसका नतीजा यह हुआ है कि दीपावली के त्योहार पर जलापूर्ति में व्यवधान पैदा हो गया है।
कमरे भी हो रहे जर्जर
भूमिगत जलाशय के अलावा यहां बने पम्प हाउस के कमरे भी क्षतिग्रस्त हालत में हैं। कक्षों की दीवारों से प्लास्टर उखड़ रहा है। साथ ही छत की पट्टियां भी जर्जर हालत में हैं।
Published on:
24 Oct 2016, 8:35 PM IST
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