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बाजार हो या हाइवे… शहर में खुले घूमते हैं आवारा जानवर, खाने-पीने को आपस में भिड़ जाते हैं; आए दिन राहगीर हो रहे हैं चोटिल

सोया है प्रशासन तो बेखौफ विचरण कर रहे जानवर...

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करौली

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Vijay ram

May 14, 2018

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करौली.
नगरपरिषद की अनदेखी के चलते शहर में आवारा जानवर बेखौफ विचरणकर रहे है। यह आवारा जानवर आए दिन राहगीरों को चोटिल कर रहे हैं।

इनसे वाहनों के हादसे भी होने से शहरवासी खौफजदा है। विशेषतौर पर वृद्धों व बच्चों के लिए राह निकलने में जोखिम रहती है। यूं तो ये हाइवे पर भी स्वच्छंद घूमते हैं लेकिन खास तौर से मदनमाहनजी मंदिर जाने वाले श्रद्धालु इनसे परेशान हैं।

शहर की सब्जी मंडी इनका अड्डा बन चुकी हैं। नगरपरिषद ने इनसे राहत दिलाने के कोई इंतजाम नहीं किए हैं। शहर में कई जगह दिन में आवारा सांड आपस में लड़ते देखे जा सकते हैं। इससे राहगीरों की परेशानी बढ़ रही है। खास तौर से महिला एवं वृद्धों का रास्ता निकलना भी इनके कारण दूभर हो रहा है।

आए दिन यह किसी ने किसी शहरवासी को चोटिल कर रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन एवं नगरपरिषद इन्हें गौशाला या अन्य जगह पर छुड़वाने के कोई प्रयास नहीं कर रहे। इससे लोगों में रोष है।

मेले के बाद बढ़ी परेशानी
जनवरी माह में मेला मैदान में लगाए गए राज्यस्तरीय श्री शिवरात्रि पशु मेले में बड़ी संख्या में पशु मालिक बछड़ों को यहां बेचने के लिए लाए, लेकिन बछड़ों को यहां खरीदार नहीं मिल सके। ऐसे में पशु मालिक इन बछड़ों को यहीं छोड़ गए। ऐसे में यहां आवारा जानवरों की तादाद में खासी वृद्धि हो गई है। हाईवे पर आवारा जानवरों के विचरण करते रहने से हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। शहर में जगह-जगह इनके आतंक से लोग परेशान हैं।

गंदगी फैलाते हैं
लड़ते-लड़के दुकान में घुस जाते हैं। गंदगी फैलाते हैं। इससे यहां बैठना भी मुश्किल हो गया है। कई बार यह बच्चों को चोटिल कर चुके हैं। कई बार शिकायत करने पर भी समाधान नहीं हो सका है।
— मनोज गुप्ता, दुकानदार

महिला, स्कूली बच्चों, दर्शनार्थी एवं वृद्धों का रास्ता निकलना भी मुश्किल हो रहा है। यह आवारा जानवर शहर में गंदगी फैलाते हैं। स्वच्छता की धज्जियां उड़ रही हैं।
— नरेन्द्र कुमार सिंघल, दुकानदार

बुजुर्गों के लिए घातक बने हैं। सांड ही सांड शहर में घूम रहे हैं। मेले के बाद यह परेशानी और बढ़ गईहै। इसके लिए कोईमुहिम नहीं छेड़ी गई है। बुजुर्ग, महिला एवं बच्चे सब परेशान हैं। आवारा जानवरों को बाहर छुड़वाने की कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन ध्यान नहीं दिया जाता है। इनकी चपेट में आकर कई लोग दुर्घटनाग्रस्त हो
चुके हैं। प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
— मुकेश बीज वाले, शहरवासी

मेरे दादाजी रोज मदनमोहनजी मंदिर जाते थे।एक दिन सांड की लड़ाई में उनको चोट लग गई। इस कारण उन्हें दो-तीन माह आराम करना पड़ेगा। अंतत: उनकी मौत हो गई। सांडों के आतंक से शहरवासी परेशान हैं। कई बार मांग करने के बावजूद समस्या से निजात नहीं मिल रही। आवारा जनवरों के भय के कारण बुजुर्ग व महिलाओं को सड़कों पर काफी संभलकर चलना पड़ता है। बच्चों को भी दुर्घटना होने की संभावना रहती है।
— राजेश सैन, शहरवासी

श्वानों से भयभीत
बालघाट. मोरड़ा में श्वानों के उत्पात से लोग परेशान हैं। हरिओम, रामू, रहमान खान आदि ने बताया कि श्वान के काटने से कई लोग जख्मी हो चुके हैं। जिससे ग्रामीण भयभीत है। गांव में भय का माहौल बना हुआ है। श्वान झुंडों में घूमते हैं।ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले में सरपंच जगदीश महावर को अवगत करा दिया है। श्वानों को पकड़वाकर अन्यत्र छुड़वाने की मांग की है।