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भगवान महावीर का मनाया जन्मोत्सव, जयकारों से गुंजायमान हुई अहिंसा नगरी

श्रीमहावीरजी. अहिंसा और करुणा के संदेशवाहक, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का 2625वां जन्मोत्सव सोमवार को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। वार्षिक मेले के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों से पूरी अहिंसा नगरी जिनेंद्राय और चांदनपुर के बाबा के जयकारों से गूंज उठी। उत्सव […]

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श्रीमहावीरजी. अहिंसा और करुणा के संदेशवाहक, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का 2625वां जन्मोत्सव सोमवार को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। वार्षिक मेले के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों से पूरी अहिंसा नगरी जिनेंद्राय और चांदनपुर के बाबा के जयकारों से गूंज उठी।

उत्सव की शुरुआत सुबह 6 बजे पंडित मुकेश जैन शास्त्री के निर्देशन में भगवान जिनेंद्र के प्रक्षाल, पूजन विधान और शांतिधारा के साथ हुई। इसके बाद सुबह 7 बजे मुख्य मंदिर से भव्य प्रभात फेरी निकाली गई, जो प्रमुख मार्गों से होकर पुन: मंदिर परिसर पहुंची। इस दौरान जयपुर निवासी अशोक जैन और अर्पित कुमार जैन ने सपरिवार मानस्तंभ पर ध्वजारोहण किया।

महिला महाविद्यालय की छात्राओं के मंगलाचरण ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। धर्मसभा में मुनि चिन्मयानंद महाराज और आर्यिका संघ ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। मुनिश्री ने भगवान महावीर के जियो और जीने दो के सिद्धांत को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया। मंदिर कमेटी अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल ने क्षेत्र के विकास कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर मानद मंत्री उमरावमल संघी, प्रबंधक नेमी कुमार पाटनी सहित देश के विभिन्न शहरों आए श्रद्धालु मौजूद रहे।


गंभीर नदी तक निकली जलयात्रा
सुबह 8 बजे मुख्य मंदिर से गंभीर नदी तट तक बैंड बाजों के साथ भव्य जलयात्रा निकाली गई। जलयात्रा में सबसे आगे धर्म चक्र, उसके पीछे 21 केसरिया पताकाएं लिए बच्चे और सिर पर मंगल कलश धारण किए महिलाएं चल रही थीं। नदी तट पर धर्मसभा आयोजित हुई, जहां 21 रजत कलशों की बोली लगाई गई। वापसी में इन कलशों को मंत्रोच्चार के साथ कटला परिसर के पश्चिमी पंडाल में स्थापित किया गया।


जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में सेवा कार्य भी किए गए। विद्यालयों के छात्र छात्राओं को मोदक वितरित किए गए। अस्पताल में भर्ती मरीजों और हिण्डौन उपकारागृह के बंदियों को फल बांटकर उनके स्वास्थ्य की कामना
की गई।