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VIDEO: मावठ से फसल में आई रंगत, पैदावार में होगी बढ़ोतरी, शीतलहर से ठिठुरे लोग

करौली. पिछले दो-तीन दिन से चल रहे मावठ के दौर से सर्दी तेज हो गई है। शीतलहर से लोग ठिठुर रहे हैं। तेज सर्दी से फसल में रंगत आ गई है। फसल को काफी फायदा मिला है। तापमान में गिरावट से अब गेहूं की पैदावार बेहतर तरीके से हो सकेगी। वहीं सरसों के लिए मावठ अमृत के समान बरस रही है। शीतलहर से ठिठुरे लोग, फसल में आई रंगत गुढ़ाचंद्रजी. कस्बे सहित माड़ क्षेत्र में बुधवार को भी दिनभर सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। बादल छाए रहे। शीतलहर और गलन से लोग ठिठुरते रहे। लोग जगह-जगह अलाव जलाकर तापते नजर आए। सुबह घना कोहरा

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मावठ से फसल में आई रंगत, पैदावार में होगी बढ़ोतरी, शीतलहर से ठिठुरे लोग करौली. पिछले दो-तीन दिन से चल रहे मावठ के दौर से सर्दी तेज हो गई है। शीतलहर से लोग ठिठुर रहे हैं। तेज सर्दी से फसल में रंगत आ गई है। फसल को काफी फायदा मिला है। तापमान में गिरावट से अब गेहूं की पैदावार बेहतर तरीके से हो सकेगी। वहीं सरसों के लिए मावठ अमृत के समान बरस रही है। शीतलहर से ठिठुरे लोग, फसल में आई रंगत गुढ़ाचंद्रजी. कस्बे सहित माड़ क्षेत्र में बुधवार को भी दिनभर सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। बादल छाए रहे। शीतलहर और गलन से लोग ठिठुरते रहे। लोग जगह-जगह अलाव जलाकर तापते नजर आए। सुबह घना कोहरा छाया रहा। लोग ऊनी वस्त्रों में लिपटे नजर आए। इधर शाम को बाजार में चहल-पहल जल्द कम हो गई। तेज सर्दी से लोगों की दिनचर्या प्रभावित है। बाजार में मूंगफली, गजक, पिंडखजूर आदि खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ गई है। किसानों को उन्नत पैदावार के सिखाए गुर कृषि अधिकारियों ने कीटों से बचाव की दी जानकारी बालघाट. क्षेत्र सहित आसपास गांव में किसानों को बुधवार को कृषि तकनीकों व उन्नत पैदावार की जानकारी दी गई। सहाय निदेशक बृजवासी मीणा, सहायक कृषि अधिकारी कैलाश चंद्रवाल ने किसानों को समन्वित खाद खरपतवार प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दो तरह के शाकनाशियों को आपस में मिलाकर फसल पर छिड़काव करें। जिससे कीटों से बचाव हो सकेगा। एक सप्ताह के अंतराल में अलग-अलग छिड़काव करें। खरपतवार नियंत्रण के लिए दवाओं का प्रयोग नहीं करें। निराई गुड़ाई ही करें। उन्होंने गेहूं की फसल में जिंक सहित अन्य पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के तरीके बताए। उन्होंने बताया कि यदि इन तत्वों की कमी के कारण फसल पीली पड़ती है तो किसान 2.5 किलोग्राम यूरिया, 500 ग्राम जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत) 500 ग्राम फैरस सल्फेट या हरा कशिश का 100 लीटर पानी में घोल बनाकर खड़ी फसल में पत्तों पर छिड़काव करें या जिंक सल्फेट 6 किलो प्रति बीघा सिंचाई से पूर्व डालें। सहायक निदेशक बृजवासी मीना हिंडौन ने जैविक तरल खादों (जीवाणु खादों), जैविक खेती मिट्टी-पानी जांच बारे किसानों को जागरूक किया। सहायक कृषि अधिकारी कैलाश चंद्रावल ने भी आवश्यक जानकारी दी। इस मौके पर किसान गोविन्द सैन, पंकज महावर अर्चना आदि मौजूद थे