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भक्त प्रहलाद की नगरी में पहले पूजन, फिर होता होलिका दहन

First worship in the city of devotee Prahlada, then Holika Dahan होलिका में प्रहलाद के रूप में रोपते हैं, हरे वृक्ष की टहनी  

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भक्त प्रहलाद की नगरी में पहले पूजन, फिर होता होलिका दहन

भक्त प्रहलाद की नगरी में पहले पूजन, फिर होता होलिका दहन

हिण्डौनसिटी. भक्त प्रहलाद की नगरी के नाम से ख्यात हिण्डौन शहर में होलिका दहन से पहले होली पूजा करने की अनूठी परम्परा है। महिलाओं एवं बालिकाएं होली के स्थान पर पहुंच रीति के अनुसार होलिका का पूजन करती हैं और गोबर से बने बडुकलों की माला चढ़ा गुलाल अर्पित करती हैं। दोपहर से शुरू होने वाला होली पूजा का दौर शाम तक चलता है। हिण्डौन को किवदंतियों में हिरण्यकशिपु की नगरी बताया जाता है।शहर में हरिणकुश का कुआ, प्रहलाद कुण्ड और भगवान नृसिंह का मंदिर इसकी पौराणिकता को बयां करते हैं।प्रहलाद की नगरी में यंू तो परम्परा के तहत हर बस्ती व मोहल्ले में होलिका की पूजा की जाती है। लेकिन बड़ी होलिकाओं पर पूजा के लिए पूजन के लिए महिलाओं की भीड़ लगती है। भायालापुरा मोड़ सहित पांच बड़ी होली पर महिलाएं जल चढ़ाकर पूजा करती हैं व परिक्रमा करती हैं। इस दौरान होली में प्रहलाद स्वरूप स्थापित डांडे(हरे वृक्ष की टहनी या तना ) को कलवा आदि बांधा जाता है। इससे पूर्व घरों में मीठे डबका (पुओं) व मिठाइयों से परिवार कर खुशहाली के लिए गोबर से बने कढोरों(ढाल) को भर पूजन किया जाता है। रात में मुहूूर्त के अनुसार पुरुषों द्वारा होली का दहन किया जाता है। इस दौरान जयकारों के साथ परिक्रमा कर प्रसादी का वितरण किया जाता है। दहन के बाद महिलाएं फि र से होली के स्थान पर पहुुंचती हैं। और दहकती होलिका को शीतल करने की मान्यता के अनुसार जल चढ़ा कर अध्र्य देती हैं। दहकती होली में लोगों द्वारा नए अनाज के तौर गेहूं व जौ की बालियों को भूना जाता है।शहर में 105 स्थानों पर होता है होलिका दहनशहर में करीब 105स्थानों पर होलिका दहन होता है। होलियों की संख्या का आंकलन आर्य समाज ने किया है। जिसके द्वारा होलिया दहन में डालने के लिए औषधीय मिश्रण का नि:शुल्क वितरण किया जाता है। आर्य समाज के प्रधान रामबाबू आर्य ने बताया गत वर्ष शहरी क्षेत्र में होलियों डालने के लिए औषधीय मिश्रण की 105 पैकिंग का नि:शुल्क वितरण किया गया। वहीं पांच किलोमीटर के दायरे के गांवों में25 होलियों का दहन किया जाता है। इस वर्ष भी आर्य समाज द्वारा वातावरण शुद्धि के लिए औषधीय मिश्रण का वितरण किया जा रहा है।