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बिना पानी सूखी गंभीर,कोई नहीं सुन रहा नदी की पीर

ghambhir dry without water, no one listens to the river .सूखी गंभीर नदी में बजरी माफिया का कब्जा, हो रहा अवैध खनन पांचना बांध बनने के बाद सूखी गंभीर नदी, भूजल स्तर में आई गिरावट

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बिना पानी सूखी गंभीर,कोई नही सून रहा नदी की पीर

बिना पानी सूखी गंभीर,कोई नहीं सुन रहा नदी की पीर

पटौदा.(हिण्डौनसिटी)
क्षेत्र के दर्जनों गांवों के तट से गुजरने वाली गम्भीर नदी कई दशकों से सूखी पड़ी है। नदी के सूखी रहने से माड़ क्षेत्र के 47 गांव एवं गम्भीर नदी के तटवर्ती 53 गांव के कुओं का जलस्तर पाताल में पहुंच गया। लेकिन क्षेत्र के राजनेता ,जनप्रतिनिधि, अधिकारी आदि गम्भीर की पीर नहीं सुन पा रहे हैं।


करीब चार दशक पूर्व जब से पांचना बांध बना है, तब से करीब 40 साल से गम्भीर नदी सूखा दरिया बनने के साथ इसका पेटा भी अवैध खननकर्ताओं की कारगुजारी का अड्ड़ा बन गया है। अवैध खनन के कारोबार में लिप्त लागों ने बजरी निकाल का नदी की छाती को छलनी कर दिया है। पेटे में जगह-जगह लगे कंकड़ एवं बजरी के ढेर और जेसीबी की खुदाई से बने गड्ढ़े नदी के हाल को बयां कर रहे हैं।

बुजुर्ग बताते हैं कि 1975 से पहले तक एक दौर था जब गम्भीर नदी में 5 से 7 नदियां आकर मिलती थी। जिससे करौली से लेकर भरतपुर के पक्षी विहार से आगे गत नदी में वर्ष भर कल कल पानी बहता था। लेकिन वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार द्वारा पांचना बांध का निर्माण करने के बाद से ही यह नदी सूखी पड़ी हुई है।

कुए सूखे, गिरा भूजल स्तर-
जब गम्भीर नदी वर्ष भर बहती थी, उस समय कुओं में जल स्तर 40 से 50 फुट रहता था लेकिन गम्भीर में पानी नहीं आने से क्षेत्र के करीब 50 से 60 गांव व नहरों में पानी नहीं छोडऩे से करीब 47 गांव के कुए सूखकर नकारा हो गए। भूजल स्तर भी रसातल को चला गया है। कुए सूखने के बाद लोग नलकूप खुदवाने लग गए। कहीं पानी मिल भी जाता है और कृषक फसल की सिचाई कर लेते हैं। लेकिन मौजूदा समय में करीब 700 से 800 फीट गहरे नलकूप खुदवाने पर भी सिचाई तो दूर पीने के लिए पर्याप्त पानी नसीब नहीं हो रहा है। जिससे क्षेत्र के गांवों के किसान शहरों की ओर पलायन कर गए।

गम्भीर नदी के पेटे में खोद दिए दर्जनों नलकूप-
कोटरी पालनपुर, कटकड, खण्डीप, निवाजीपुरा, भालपुर, सनेट, कादरोली, दानालपुर, चांदनगांव, श्रीमहावीरजी, गांवड़ी मीना, निसूरा, नगला मीना, भोपुर, बहादुरपुर आदि गंभीर नदी के तटवर्ती गांवों में प्रभावशाली लोगों ने गम्भीर के बीचों बीच पेटे में गहरे नलकूप खोद लिए हैं। ताकि सिंचाई और पीने के लिए पानी मिल सके। पानी मिलने की गरज से सरकार के जनस्वास्थ्य अभियात्रिकी विभाग ने भी कई दर्जन सरकारी नलकूप भी खुदवाए हुए हैं। जिनसे दानालपुर, श्रीमहावीरजी सहित माड़ क्षेत्र के गांवों व नादौती तक जलापूर्ति की जा रही है। वहीं कई प्रभावशाली लोगों ने गम्भीर नदी के पेट में खेत बनाकर अपने कब्जे जमा लिए है और उनमें ही खेती करने लगे हैं।

मंदिरों में होता है अभिषेक व पूजा-
गम्भीर नदी के तटवर्ती गांवो एवं कस्बों में कई प्रसिद्ध मंदिर भी है। मसलन भगवान महावीर का मन्दिर, भगवान देवनारायण मन्दिर, नृसिंह भगवान मन्दिर। जहां वर्ष में एक बार बड़ा मेला भरता है और भगवान का अभिषेक एवं पूजा की जाती है। भगवान महावीर के वार्षिक मेले में रथ यात्रा के दौरान गंभीर नदी के नीर की अपनी महत्ता है। गंभीर के तट पर जिनेंद्र का जलाभिषेक होता है। इसी परम्परा के निर्वाह के लिए पांचना बांध से गंभीर नदी में पानी छोड़ा जाता है। जहां अभिषेक से पहले जल पूजन की करने की रिवाज भी है।

जख्म देने पर दर्द भी देती गंभीर
बजरी के अवैध खनन से गंभीर नदी के पेटे में गहरी गड्ढ़े बन गए हैं। खनन माफियाओं द्वारा दिए जख्मों से पीडि़त नदी तटवर्ती गांवों के लोगों को दर्द भी दे जाती है। मेले के समय पांचना बांध से जल आवक होने या फिर बारिश में अवैध खनन से बने गड्डों में पानी भर जाता है। इमनें डूबने से मौत की हर वर्ष करीब आधा दर्जन घटनाएं होती हैं।