
चने की फसल से किसानों की अच्छी उम्मीद
गुढ़ाचन्द्रजी. खरीफ की फसल में बरसात से भारी (Good hope of farmers from gram crop) नुकसान झेल चुके किसानों को अब रबी की फसल से उम्मीद जगी है। काली चिकनी मिट्टी के लिए मशहूर जिले में कृषि वर्षा पर आधारित होती है। लेकिन इस बार रुक-रुककर हुई बारिश से खेतों में नमी होने से लोगों ने गेहूं, सरसों के साथ दलहन फसल चने की अन्य वर्षो की अपेक्षा इस बार अधिक बुवाई की है। जिले में अधिकांश गांवों में किसानों ने चने की बुवाई की है।
यही कारण है कि कृषि विभाग के लक्ष्य से भी अधिक बुवाई हुई है। कृषि विभाग की ओर से जिले में चने की बुवाई का लक्ष्य ८५०० हैक्टेयर भूमि था। इसके विपरित किसानों ने करीब दस हजार हैक्टेयर में चने की बुवाई की है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो इस वर्ष चना किसानों की झोली भर देगा। दूसरी ओर माड़ क्षेत्र में भी चने की फसल अधिक होती है। लेकिन लगातार बारिश की कमी से लोगों का एक दशक से चने की फसल की तरफ रुझान कम था। लेकिन इस वर्ष रुक-रुक कर हुई बारिश से जमीन में आई नमी के कारण किसानों ने चने की खेती को पसंद अधिक किया है। नांगलशेरपुर निवासी प्रगतिशील किसान शिवदयाल मीना ने बताया कि चने की फसल खेतों में लहला रही है। इससे किसानों को चने की अच्छी उपज की उम्मीद है। आने वाले दिनों में अगर मावठ हो जाती है तो चने की फसल में फायदा होगा। इससे बंपर पैदावार होगी। उल्लेखनीय है कि चना दलहन फसल है। जो दालों के काम आती है। पत्रिका संवाददाता
बालघाट. कुछ दिनों से मौसम में हो रहे बदलाव के चलते क्षेत्र में चने की फसल में उखटा रोग लगने से किसान फसल को लेकर चिंतित है।
किसानों ने बताया कि चने की फसल, जिसकी पेटा काश्त (सेवज) बुवाई की गई है वहां पर उखटा रोग का असर होने लगा है। उखटा रोग में फसल की जड़ में विल्ट लगने के साथ फसल जड़ से नष्ट होने लगती है। अक्टूबर माह के दौरान बुवाई की गई सेवज चने की फसल प्रौढ़ावस्था में पहुंच चुकी है। इसमें फली छेदक लट का प्रकोप बढ़ रहा है जिसको लेकर किसान चिंतित नजर रहे हैं। हालांकि सिंचित क्षेत्र के खेतों में बुवाई की गई चने की फसल में उखटा रोग या फली छेदक लट का इतना प्रकोप नहीं है, जबकि सेवज बुवाई की गई फसलों में शुरूआत के दिनों में उखटा रोग का प्रकोप दिखाई दिया है। किसानों का कहना है कि जैसे जैसे फसलें प्रौढ़ हो रही हैं, फली छेदक लट का प्रकोप बढ़ रहा है। बालघाट मोरडा कमालपुरा नागल शेरपुर क्षेत्र के विभिन्न गांवों में करीब 400 हैक्टेयर एरिया में खड़ी चने की फसल में १० प्रतिशत तक फली छेदक लट का प्रकोप हुआ है। इसके लिए संबंधित केन्द्रों पर कार्यरत सहायक कृषि अधिकारियों एवं कृषि पर्यवेक्षकों द्वारा समय समय पर फसलों का जायजा लिया जाकर किसानों को रबी फसलों के बचाव उपचार के लिए सलाह भी दी जा रही है।
Published on:
11 Dec 2019 08:42 pm
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