
ऐसी भी क्या मजबूरी.... 10°की कड़ाके की ठंड में नवजात कन्या को कपड़े में लपेट कर शौचालय में कमोड़ के पास छोड़ा
हिण्डौनसिटी. मैं तो पूर्णिमा थी तेरे आंगन की सोन चिरैया बनती, पर तूने क्या किया? जन्म देने के बाद मां के दुलारने की बजाय कडकड़़ाती ठंड में मरने के लिए किसी दूसरे के घर के शौचालय में डाल दिया। पूरे 9 माह गर्भ में रख अपने खून से सींचा, उसी नन्ही सी जान को जन्म लेने के कुछ देर बाद यूं अपने आंचल से छिटका कर मरने को लिए छोड़ दिया। पौष माह की पूर्णिमा यानी शनिवार सुबह 10 डिग्री सेल्सियस तापमान में गलन भरी कड़ाके की सर्दी में शौचालय में पड़ी नवजात कन्या को देख हर किसी का दिल दहल गया। लेकिन रह रह कर सिसकने की मंद आवाज से लोगों का दिल पसीज गया और पुलिस बुला कर नवजात को तुरत फुरत जिला चिकित्सालय पहुंचाने उस मासूस को जीवन की किरण मिल गई।
कलेजे को झकझोरने वाली घटना शहर के बरगमा रोड की है। जहां एक मकान में बने शौचालय में कमोड़ के पास कोई कपड़े में लपेट कर नवजात कन्या को नाल के साथ डाल गया। सुबह जागने पर शौचालय से सिसकने की आवाज आई तो गृहस्वामी विष्णु सोनी ने जब दरवाजा खोला तो कपड़े में लिपटी एक नवजात कन्या ठिठुरती हालत में मिली। सूचना मिलते ही कोतवाली थाना के सहायक उपनिरीक्षक दिनेश शर्मा मय जाब्ता के मौके पर पहुंचे और नवजात कन्या को शॉल से ढक कर जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे।
जहां चिकित्सकों ने नवजात को एसएनसीयू यूनिट में भर्ती कर उपचार शुरू कराया। कोतवाली थाना अधिकारी महेंद्रसिंह चौधरी ने बताया कि बरगमा रोड निवासी विष्णु सोनी के अनुसार सुबह करीब 6.30 बजे उसकी वृद्ध मां शौचनिवृति के बाद मंदिर दर्शन करने गई थी। एक घंटे बाद लौटने पर उसे शौचालय से बच्चे के सिसकने की आवाज सुनाई दी। इस पर परिजनों ने देखा को कपड़े में लिपटी नवजात पड़ी थी।
चिकित्सालय की एसएनसीयू में प्राथमिक सारंसभाल के बाद में उसे बाल कल्याण समिति करौली की सदस्य फरीदा शाह की निगरानी में सौंप दिया। इस पर महिला पुलिस कांस्टेबल की देखरेख में नवजात को करौली जिला चिकित्सालय शिफ्ट किया गया, जहां समिति की निगरानी में उसका उपचार जारी है। आरोपी अज्ञात है। देर शाम तक घटना को लेकर प्राथमिकी दर्र्ज नहीं हुई है। हालांकि पुलिस ने आस पास के क्षेत्र में पूछताछ कर जानकारी जुटाना शुरु कर दिया है।
समय पर चिकित्सालय लाने से बची जान
जिला चिकित्सालय के रात्रि पारी के चिकित्सक विजय सिंह मीणा ने बताया कि समय पर अस्पताल पहुंचाने से बच्ची की जान बच गई। उन्होंने बताया कि नवजात का जन्म कुछ घंटे पहले होना प्रतीत हो रहा है। नवजात के साथ गर्भनाल भी जुड़ी हुई है। सुबह अत्यधिक ठंड व गलन थी, लेकिन शौचालय के गेट बंद होने से नवजात ठंडी हवाओं से बची रही। गनीमत रही कि वह कमोड़ में नहीं गिरी।
Updated on:
04 Jan 2026 05:53 pm
Published on:
04 Jan 2026 01:21 pm
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