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प्रथम विश्व युद्ध में परदाता को ब्रिटिश सरकार ने विक्टोरिया क्रॉस से नवाजा, पांचवी पीढ़ी में जाबांज को भारतीय सेेना ने दिया सेना मेडल अवॉर्ड

श्रीमहावीरजी.समीपवर्ती नादौती तहसील का खेड़ली गांव देशभक्ति और सैन्य परंपरा का एक जीवंत प्रतीक है। इस गांव के एक परिवार ने पांच पीढिय़ों से भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा के लिए सरहद पर तैनात रहकर अनूठी मिसाल कायम की है। इस परिवार की सैन्य विरासत की शुरुआत स्वर्गीय भैरो सिंह खटाना से […]

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प्रथम विश्व युद्ध में परदाता को ब्रिटिश सरकार ने विक्टोरिया क्रॉस से नवाजा, पांचवी पीढ़ी में जाबांज को भारतीय सेेना ने दिया सेना मेडल अवॉर्ड

श्रीमहावीरजी.
समीपवर्ती नादौती तहसील का खेड़ली गांव देशभक्ति और सैन्य परंपरा का एक जीवंत प्रतीक है। इस गांव के एक परिवार ने पांच पीढिय़ों से भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा के लिए सरहद पर तैनात रहकर अनूठी मिसाल कायम की है। इस परिवार की सैन्य विरासत की शुरुआत स्वर्गीय भैरो सिंह खटाना से हुई, जिन्हें प्रथम विश्व युद्ध में अदम्य साहस ब्रिटिश सेना द्वारा प्रतिष्ठित विक्टोरिया क्रॉस (द्वितीय स्तर) से सम्मानित किया गया था। उनकी शौर्य पूर्ण इस उपलब्धि ने न केवल परिवार में सैन्य जज्बा फूकने का काम किया, बल्कि गुर्जर समुदाय को राष्ट्र की साहसी सेवा के लिए भारतीय सेना में भर्ती के लिए प्रशस्त किया। बीसी भैरोंसिंह की पांचवीं पीढ़ी के हवलदार अनिल खटाना को वर्ष 2022 में जम्मू-कश्मीर में चार आतंकवादियों को ढेर करने पर सेना मेडल से नवाजा गया, जो इस परिवार की देशभक्ति की गौरव गाथा को और भी मजबूत करता है।
इनकी दूसरी पीढ़ी में भैरो सिंह के तीन बेटे कल्याण सिंह, दूल्हे राम और चरण सिंह ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया और भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा की। उनकी यह प्रतिबद्धता परिवार की अगली पीढिय़ों के लिए प्रेरणा बनी। परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी ने भी राष्ट्रसेवा के लिए सेना में भर्ती होने सर्वाेपरि रखा।
सूबेदार रामकिशोर और कैप्टन राधेश्याम ने 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लेकर दुश्मन को धूल चटाने का काम किया। दोनों युद्धों में उनकी वीरता ने परिवार की सैन्य परंपरा और गौरवान्वित किया। इस पीढ़ी के अन्य सदस्य सूबेदार फूल सिंह, सूबेदार जदवीर, स्वर्गीय हवलदार माधोसिंह, सूबेदार कमलेश, सूबेदार गंगासिंह, हवलदार नंगू राम, हवलदार नाजिम, और हवलदार जलेसिंह ने भी वीराता से बर्फीली पहाडिय़ों और तपते रेगिस्तान में देश की सीमाओं की रक्षा की। पांचवीं पीढ़ी में हवलदार विजय सिंह और हवलदार अनिल खटाना ने सैन्य सेवा की परंपरा को कायम रखा।19 राजपूत रेजिमेंट में सेवारत रहे हवलदार अनिल खटाना ने वर्ष 2020 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान में चार आतंकियों को मार गिराया। इस अदम्य साहस के लिए उन्हें 2022 में सेना मेडल से सम्मानित किया गया। अनिल अब सेवानिवृत्त हैं, लेकिन उनकी वीरता युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरित कर रही है।
वीरता को विक्टोरिया क्रॉस का सम्मान
गांव खेड़ली के स्वर्गीय भैरो सिंह खटाना ने प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) में ब्रिटिश सेना की ओर से लड़ते हुए भैरोंसिंह ने अपने युद्ध कौशल और साहस का लोहा मनवाया। उनकी वीरता के लिए ब्रिटिश सरकार ने सर्वोच्च सैन्य सम्मान विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया गया। बताया जाता है कि भैरोंसिंह की अनुशंसा पर उस समय क्षेत्र के गुर्जर समुदाय के युवाओं को सेना में भर्ती में विशेष तबज्जो मिली, जिसने गुर्जरों की सैन्य भागीदारी को बढ़ावा दिया।