
विनोद शर्मा, राजस्थान पत्रिका.
सावधान रहे, अगर आप नगरपरिषद द्वारा करौली शहर में की जा रही पानी की आपूर्ति का प्रयोग कर रहे हैं तो ये आपके जीवन के लिए खतरा बन सकता है। इसका कारण है कि जिला मुख्यालय पर नगरपरिषद द्वारा नियमित जो पेयजल आपूर्ति की जा रही है, उसमें नाइट्रेट की मात्रा चरम पर पहुंची है। जानकारों के अनुसार इससे पानी जहरीला बन गया है। ऐसे पानी के नियमित उपयोग से कैंसर, हेपेटाइटिस जैसी जानलेवा बीमारी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
प्रयोगशाला में सामने आई भयावह स्थिति
केन्द्र सरकार के आदेश पर प्रदेश में पेयजल की क्वालिटी के नमूने गत दिनों रसायनिक प्रयोगशाला की टीम ने संकलित किए। इस टीम ने करौली के गुलाब बाग, मेला दरवाजा, पावर हाउस, गदका की चौकी, मासलपुर दरवाजा क्षेत्र में रोजाना सप्लाई किए जा रहे पानी के लिए नमूने संकलित करके जांच को भेजे। जांच में गुलाब बाग, पावर हाउस (जनस्वास्थ्य आभियांत्रिकी विभाग) तथा मेला दरवाजे की टंकियों से आपूर्ति किए जाने वाले पानी में नाइट्रेट की मात्रा दो से तीन गुना अधिक मिली है।
सावधान! करौली में जहरीले पानी की सप्लाई!
इसकी रिपोर्ट केन्द्र व राज्य सरकार के जनस्वास्थ्य आभियांत्रिकी विभाग को भेज दी गई है। इस रिपोर्ट को भेजे ५ माह गुजरे हैं लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि अभी भी पानी की गुणवत्ता को सुधार के प्रयास अमल में नहीं लाए गएहैं और नाइट्रेट युक्त पानी की सप्लाई लगातार हो रही है।
इतना नाइट्रेट पीपीएम पानी में मिला
जनस्वास्थ्य एवं आभियांत्रिकी विभाग के अनुसार पानी में 45 पीपीएम नाइट्रेट की मात्रा नॉर्मल मानी जाती है। इसके विपरीत करौली में १२० पीपीएम तक नाइट्रेट पाया गया है। सूत्रों ने बताया कि गुलाबबाग क्षेत्र में हो रही पानी की आपूर्ति में ९७ तथा मेला दरवाजा से गणेश दरवाजा, चटीकना, भूडारा बाजार, चौबे पाड़ा, टॉरी, क्षेत्र में १२० पीपीएम नाइट्रेट युक्त पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसी प्रकार कोर्ट के समीप स्थित जनस्वास्थ्य एवं आभियांत्रि की विभाग के कार्यालय परिसर स्थित टंकी के पानी में १२० पीपीएम नाइट्रेट है।
ये हैं दुष्परिणाम
करौली के राजकीय सामान्य अस्पताल के चिकित्सक व कैंसर रोग उपचार केन्द्र के नोडल अधिकारी डॉ. ऋषिराज शर्मा ने बताया कि पानी में नाइट्रेट की मात्रा अधिक होने से एक्जिमा, हेपेटाइटिस और लीवर संबंधी जानलेवा बीमारी फैलती है। कैंसर रोग की चपेट में आने की जोखिम भी रहती है। फेपड़ों में संक्रमण भी पानी में नाइट्रेट की अधिक मात्रा से हो सकता है।
४ माह में 42 रोगी
अस्पताल की जानकारी के अनुसार कैंसर रोग उपचार केन्द्र की टीम ने करौली शहर में रोग के बारे में सम्पर्क किया। चार माह में 42 रोगी चिह्नित किए गए। इनमें अधिकतर नए हैं। नोडल अधिकारी डॉ. ऋषिराज शर्मा बताते हैं कि रोगियों की अधिक आवक की आशंका से अधिकारियों को अवगत करा दिया है।
ऐसे पहचानें
फ्लोराइड व नाइट्रेट की मात्रा की जांच वैज्ञानिक तरीके से प्रयोगशाला में कराई जाए। इसके बाद ही पता चलेगा कि पानी में नाइट्रेट कितना है। वैसे इसकी सामान्य पहचान इस तरह की जा सकती है कि किसी बर्तन में कुछ देर पानी रखने के बाद उसमें सफेद सी परत जमी दिखे तो वह दूषित जल है। कुछ देर को पानी रखने के बाद वह पीला पड़ जाता है।
सिर्फ एक उपाय आरओ प्लांट स्थापित हों
''करौली शहर में की जा रही पानी की आपूर्ति में नाइट्रेट की मात्रा अधिक मिली है, इसका कोई विकल्प नहीं है। इस कारण एक मात्र उपाय है कि आरओ प्लांट लगवाए जाए। आरओ प्लांट से पानी की आपूर्ति की जानी चाहिए।''
— शकुन्तला मीना प्रभारी कनिष्ठ रासायनिक प्रयोगशाला करौली।
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Published on:
17 Feb 2018 07:07 pm
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