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छह करोड़ खर्च के बाद भी सिंचाई परियोजना अधूरी

सपोटरा. इसे विभागीय अधिकारियों की उदासीनता कहें या फिर कमजोर राजनीतिक प्रतिनिधित्व कि हाड़ौती परिक्षेत्र के दर्जनों गांवों के काश्तकारों के लिए 14.30 करोड़ की लागत से बनने वाली खोह बांध लघु सिंचाई परियोजना डेढ़ साल से अधूरी है।

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छह करोड़ खर्च के बाद भी सिंचाई परियोजना अधूरी

वन विभाग की एनओसी के कारण सिमिर के खोह बांध परियोजना का बन्द निर्माण कार्य।

डेढ़ साल से बंद कार्य
कागजों में दबे रह गए आदेश
सपोटरा. इसे विभागीय अधिकारियों की उदासीनता कहें या फिर कमजोर राजनीतिक प्रतिनिधित्व कि हाड़ौती परिक्षेत्र के दर्जनों गांवों के काश्तकारों के लिए 14.30 करोड़ की लागत से बनने वाली खोह बांध लघु सिंचाई परियोजना डेढ़ साल से अधूरी है। 6 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने के बावजूद कार्य डेढ़ साल से बंद है। 2008-09 में मंजूर हुई यह परियोजना दो साल में पूरी होनी थी, लेकिन अभी तक आधारभूत ढांचा तक तैयार नहीं हुआ है। इससे ग्रामीणों में रोष है।
डेढ़ दर्जन गांवों में सिंचाई का है लक्ष्य
सिमिर क्षेत्र की अरावली पहाडियों के बीच जल संसाधन विभाग ने वर्ष 2003 में खोह बांध लघु सिंचाई परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया था। इसका 213 हैक्टेयर भूमि में निर्माण कराने के साथ घंटेश्वर खोह में 132 वर्ग किमी से आने वाले 21.96 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी में से 200 लाख घनमीटर पानी बांध में रोककर डेढ़ दर्जन गांवों व कस्बों में 370 हैक्टेयर भूमि की सिंचाई करने का लक्ष्य रखा गया। पांच साल तक इस परियोजना का प्रस्ताव राज्य सरकार और वन विभाग से स्वीकृति के लिए अटका रहा। उस दौरान परियोजना का मुद्दा प्रमुखता से उठाने पर वर्ष 2008-09 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने 14.30 करोड़ की लागत से बनने वाली खोह बांध परियोजना को मंजूरी दे दी। इसकी स्वीकृति के लिए पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री जसकौर मीणा, पूर्व विधायक कमला मीणा तथा पूर्व केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री नमोनारायण मीणा और पूर्व विधायक सुखलाल मीणा ने हाडोती क्षेत्र के दर्जनों गांवों में सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था कराने के लिए बांध के निर्माण की पहल की थी।
आधारभूत ढांचा भी तैयार नहीं
जलसंसाधन विभाग ने बांध की मंजूरी होने पर एक कंपनी को टेंडर जारी कर सितंबर २००८ से निर्माण कार्य शुरू कर दिया। दूसरी ओर राज्य सरकार ने परियोजना में 18.54 हैक्टेयर भूमि वन विभाग की डूब में आने पर 185.72 लाख रुपए और खोह लघु सिंचाई परियोजना के आरएल 59.60 मीटर तक डूब में आने वाली काश्तकारों की अवाप्त भूमि का 110.05 लाख रुपए में करीब ८० प्रतिशत तक भुगतान कर दिया। जबकि निर्माण कार्य पूर्ण करना तो दूर अभी तक आधारभूत ढांचे का निर्माण नहीं हो पाया है।
भुगतान उठाने का आरोप
खोह बांध परियोजना की फर्म ने बांध का निर्माण कार्य एक साधन सुविधाहीन कांट्रेक्टर को कमीशन पर दे दिया था। आरोप है कि कम्पनी ने कार्य में खानापूर्ति कर कुछ भुगतान उठा लिया। इसके बाद जुलाई २०12 में परियोजना का कार्य बंद कर दिया। जो आज तक अटका हुआ है।
2000 एकड़ भूमि सिंचाई से वंचित
हाड़ौती क्षेत्र के लिए पानी और अन्य उत्पादन की वृद्धि में वरदान साबित होती उक्त परियोजना से खोहबाग, बगीदा, फतेहपुर, किराड़ी, सिमिर, गोपालपुरा, सैमरदा, पंवारपुरा, डांगड़ा, चेचडा, रूपपुरा, खूबपुरा, हाड़ौती आदि गांवों की करीब 2 हजार से भी अधिक एकड़ भूमि सिंचाई से वंचित है। वहीं सोराजपुरा, लंगेह, अडूदा, बगीदा, सिमिर, रोहण्डी, गुआड़ी, गोरधनपुरा, कालागुड़ा आदि दर्जनों गांवों का जलस्तर ऊंचा नहीं उठ पाएगा।
5 वर्ष बीतने के बाद भी नहीं हुआ मूल्यांकन
खोह बांध के निर्माण में आड़े आ रहे वन विभाग के पेड़ पौधों का 5 वर्ष बीतने के बाद भी मूल्यांकन नहीं हो पाया। जिससे विभागीय अधिकारियों की उदासीनता झलकती है। ग्रामीण जब विभागीय अधिकारियों से बांध के निर्माण को लेकर शिकायत करते हैं तो विभागीय अधिकारी वन विभाग द्वारा एनओसी जारी नहीं करने की कहकर टाल देते है। ऐसे में कार्य अटका हुआ है।
दो बार हो चुकी है निविदाएं
खोह बांध परियोजना के निर्माण कार्य के लिए पूर्व में दो बार निविदाएं जारी कर टेंडर किए गए थे। कंपनी को टेंडर जारी कर निर्माण कार्य की मंजूरी दी थी, लेकिन मामला अटका हुआ है।(पत्रिका संवाददाता)

मामला मेरी जानकारी में नहीं है
नैनिया की बाघ परियोजना के क्षेत्रीय वन अधिकारी अनिल कुमार मीना का कहना है कि खोह बांध परियोजना का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। जानकारी करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नहीं मिली एनओसी
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता नंगूराम गुर्जर का कहना है कि वन विभाग की एनओसी नहीं मिलने के कारण खोह बांध परियोजना का निर्माण कार्य बंद है एनओसी मिलने के बाद ही निर्माण कार्य कराया जाएगा। इस संदर्भ में विभागीय अधिकारियों को पुन: पत्र लिखकर अवगत कराया है।