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फार्म पौण्ड से किसान हुए खुशहाल, बढ़ रही पैदावार

गुढ़ाचंद्रजी. कृषि विभाग की फार्म पौण्ड खेत तलाई योजना से माड़ क्षेत्र के किसान खुशहाल हो रहे हैं। फार्म पौन्ड बनने के बाद किसानों की पैदावार में बढ़ोतरी हुई है और उनको सिंचाई में मशक्कत नहीं करनी पड़ रही। ऐसे में किसानों के पास अब कुओं का बेहतर विकल्प फार्म पौण्ड बन चुका है। बीते दो दशक से पर्याप्त बारिश के अभाव से नलकूप, कुएं आदि में पानी की लगातार कम हो रही है। वहीं लागत अधिक होने और सैकड़ों फीट तक पानी नहीं मिलने से नलकूप, कुएं आदि खुदवाने में भी किसानों की रुचि नहीं है। ऐसे किसानों के लिए

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फार्म पौण्ड से किसान हुए खुशहाल, बढ़ रही पैदावार

गुढ़ाचंद्रजी. ढहरिया गांव में एक खेत में बने फार्म पौण्ड में भरा पानी।

फार्म पौण्ड से किसान हुए खुशहाल, बढ़ रही पैदावार
गुढ़ाचंद्रजी. कृषि विभाग की फार्म पौण्ड खेत तलाई योजना से माड़ क्षेत्र के किसान खुशहाल हो रहे हैं। फार्म पौन्ड बनने के बाद किसानों की पैदावार में बढ़ोतरी हुई है और उनको सिंचाई में मशक्कत नहीं करनी पड़ रही। ऐसे में किसानों के पास अब कुओं का बेहतर विकल्प फार्म पौण्ड बन चुका है। बीते दो दशक से पर्याप्त बारिश के अभाव से नलकूप, कुएं आदि में पानी की लगातार कम हो रही है। वहीं लागत अधिक होने और सैकड़ों फीट तक पानी नहीं मिलने से नलकूप, कुएं आदि खुदवाने में भी किसानों की रुचि नहीं है। ऐसे किसानों के लिए फार्म पौण्ड बहुत उपयोगी साबित हो रहे है। फार्म पौण्ड में बरसात का पानी संग्रहित कर किसान सिंचाई के उपयोग में लेते है।

मीठा पानी पैदावार बढ़ाने में सहायक

फार्म पौण्ड योजना किसानों के लिए बहुत लाभदायक रही है। इससे पैदावार भी बढ़ी है। फार्म पौण्ड से सिंचाई को मीठा पानी मिलता, जो पैदावार को बढ़ाने में सहायक है। जबकि नलकूप और कुओं से कई बार खारा पानी मिलता है। जिसमें नमक की मात्रा अधिक होती है। जिससे फसल खराब होती है। फार्म पौण्ड खुदवाने के बाद उसमें हर साल बरसात का पानी संग्रहित हो जाता है। जो लंबे समय तक सिंचाई के लिए उपलब्ध हो पाता है। मानसून जाने के बाद सरसों और गेहूं की पैदावार करने के लिए सिंचाई में यह फार्म पौण्ड बहुत कारगर साबित हो रहे हैं।
काली चिकनी मिट्टी करती है सीमेंट का काम

किसानों ने बताया कि माड़ क्षेत्र की काली चिकनी मिट्टी सीमेंट का कार्य करती है। यह अन्य मिट्टी की तुलना में अधिक मजबूत होती है। फार्म पौण्ड में बरसात का पानी भरने के बाद लंबे समय तक पानी भरा रहता है। जिससे सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिल जाता है। गेहूं और सरसों की पैदावार के समय फार्म पौण्ड का महत्व पता चलता है। माड़ क्षेत्र के ढहरिया, बरदाला, सोप, शहर, कैमा, उजीरना, गढ़ खेड़ा, गढ़मोरा, बागोर, सलावद, दलपुरा, धड़ांगा, बाला खेड़ा आदि गांवों में किसानों ने फार्म पौण्ड बनवा रखे हैं।
यह मिलता है अनुदान

कृषि विभाग के पर्यवेक्षक हरिओम मीणा ने बताया कि फार्म पौण्ड किसानों के लिए वरदान की तरह है। किसान को अपने खेत में २० मीटर लंबा तथा २० मीटर चौड़ा व १० फीट गहरा फार्म पौण्ड बनवाने के लिए ६३ हजार रुपए का अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा लघु सीमांत कृषक को ७३ हजार रुपए का अनुदान दिया जाता है। प्लास्टिक की सीट वाले १२०० घन मीटर का फार्म पौण्ड बनाने के लिए ९० हजार रुपए का अनुदान दिया जाता है।