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कल्याणरायजी मंदिर में झलकती है दक्षिणायन शैली

करौली. करौली जिले में यूं तो कई ऐतिहासिक मंदिर है, लेकिन जिला मुख्यालय पर नगाडख़ाना दरवाजे पर महल के सामने बना कल्याणरायजी के मंदिर अपने प्राचीन इतिहास, बनावट शैली के कारण विशेष पहचान रखता है। इस मंदिर का इतिहास रियासतकाल से जुड़ा हुआ है। इतिहासकार वेणुगोपाल शर्मा बताते हैं कि सन् १३४८ में करौली की स्थापना के समय पर ही इस मंदिर की नींव रखी गई थी। करौली का नाम पहले कल्याणपुरी था। बाद में इसका नाम करौली पड़ा। इस मंदिर की जगह पहले शिवालय हुआ करता था। बाद में यहां कल्याणराजी मंदिर की स्थापना हुई। द

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कल्याणरायजी मंदिर में झलकती है दक्षिणायन शैली

केप्शन करौली. नगाडख़ाना दरवाजे पर महलों के सामने बना कल्याणरायजी मंदिर।

कल्याणरायजी मंदिर में झलकती है दक्षिणायन शैली
करौली. करौली जिले में यूं तो कई ऐतिहासिक मंदिर है, लेकिन जिला मुख्यालय पर नगाडख़ाना दरवाजे पर महल के सामने बना कल्याणरायजी के मंदिर अपने प्राचीन इतिहास, बनावट शैली के कारण विशेष पहचान रखता है। इस मंदिर का इतिहास रियासतकाल से जुड़ा हुआ है। इतिहासकार वेणुगोपाल शर्मा बताते हैं कि सन् १३४८ में करौली की स्थापना के समय पर ही इस मंदिर की नींव रखी गई थी। करौली का नाम पहले कल्याणपुरी था। बाद में इसका नाम करौली पड़ा। इस मंदिर की जगह पहले शिवालय हुआ करता था। बाद में यहां कल्याणराजी मंदिर की स्थापना हुई।

दक्षिणायन शैली से अनूठी पहचान
इस मंदिर का निर्माण दक्षिणायन शैली में हुआ है। राजा गोपालदास ने देश के दक्षिणी हिस्सों में निर्मित मंदिरों के आधार पर इस मंदिर का निर्माण कराया। जो कि देखने में एक रथ की आकृति की तरह प्रतीत होता है। इस मंदिर पर गुबंद बना हुआ है। इतिहासकार शर्मा के अनुसार दक्षिणायन शैली का यह एकमात्र मंदिर है। जिससे इसकी विशेष पहचान है। इतिहासकार वेणुगोपाल शर्मा ने बताया कि मंदिर में बौद्धकालीन शिल्पकला का समावेश भी दिखाई देता है।

मोह लेती है शिल्पकला
मंदिर के निर्माण में की गई शिल्पकला अपने आप में अनूठी है, जो इसे देखने वालों को मोह लेती है। जितना सुंदर यह मंदिर बाहर से उतना ही अंदर से है। रियासतकाल के शिल्पकारों ने इसमें अद्भुत शिल्पकारी की है। दक्षिणायन शैली के अन्तर्गत मंदिरों की आकृति रथ के समान होती है। जिनके ऊपर गुबंद और फिर उस पर पताका होती है। ऐसी ही शैली कल्याणरायजी के मंदिर की है। मंदिर में भगवान कृष्ण की प्रतिमा स्थापित है। जहां रोजाना काफी श्रद्धालु आते हैं। इसके अलावा हर तीज त्योहार, जन्माष्टमी आदि मौकों पर विशेष कार्यक्रम भी होते हैं।