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VIDEO: गर्मी में खेत की जुताई फायदेमंद, उन्नत पैदावार के लिए किसान डाल रहे देसी खाद

बालघाट. मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच किसानों ने खेतों को उपजाऊ बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। किसान खेतों में खाद डालने, जुताई आदि की तैयारी कर रहे हैं। अगले माह जून के आखिर तक हर साल मानसून दस्तक दे देता है। मानसून आने से एक माह पहले तेज गर्मी के दौरान खेतों की जुताई करना खेती के लिहाज से बहुत फायदेमंद रहता है। ऐसे में जहानगर मोरडा सहित कई गांवों में किसान खेतों में जुताई, देसी खाद डालने का कार्य कर रहे हैं। जैविक खेती के लिए गोबर की खाद : किसानों ने बताया कि पहले वे गोबर को फेंक देते थे, लेकिन अब

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गर्मी में खेत की जुताई फायदेमंद, उन्नत पैदावार के लिए किसान डाल रहे देसी खाद
बालघाट. मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच किसानों ने खेतों को उपजाऊ बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। किसान खेतों में खाद डालने, जुताई आदि की तैयारी कर रहे हैं। अगले माह जून के आखिर तक हर साल मानसून दस्तक दे देता है। मानसून आने से एक माह पहले तेज गर्मी के दौरान खेतों की जुताई करना खेती के लिहाज से बहुत फायदेमंद रहता है। ऐसे में जहानगर मोरडा सहित कई गांवों में किसान खेतों में जुताई, देसी खाद डालने का कार्य कर रहे हैं।
जैविक खेती के लिए गोबर की खाद : किसानों ने बताया कि पहले वे गोबर को फेंक देते थे, लेकिन अब जैविक खेती की ओर जागरूक होकर गोबर को खाद के लिए खेतों में डालने का कार्य किया जा रहा है। जिससे की खेतों में उपजाऊपन बना रहे। इस समय जुताई कर खेत में गोबर की खाद डालना बहुत लाभदायक है। मानसून आने पर किसानों को जुताई आदि कार्य में अधिक मशक्कत नहीं
करनी पड़ेगी। गांवों में कई किसान ऐसे है जिनके पास खेतों में डालने के लिए गोबर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में वे आसपास के पशुपालकों या दूसरे गांवों से गोबर खरीदकर खेतों में डालने ट्रेक्टर-ट्रॉलियों में भरकर ला रहे हैं। 25 मई से रोहिणी लगने से पहले खेतों में बुवाई कार्य की तैयारी पूरी करना बेहतर रहता है। किसानों ने बताया कि जैविक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। गोबर की खाद के लिए अधिक रकम भी खर्च नहीं होती और खेती के लिए फायदेमंद भी बहुत है।
इनका कहना है
गर्मी के मौसम में खेतों की जुताई कर देसी खाद डालना फायदेमंद है। इससे मिट्टी में गुणवत्ता बढ़ेगी। जिसका लाभ मानसून आने पर मिलेगा। वहीं जुताई से खेतों में हानिकारक कीड़े आदि समाप्त हो जाएंगे। जिससे खेती में रोग नहीं लगेगा।
– सुधीर कुमार मीना, कृषि पर्यवेक्षक, बालघाट