अवैध खनन से खोखली हो रही पहाडिय़ां
सपोटरा. वन क्षेत्र की पहाडिय़ों में अवैध खनन से पहाडिय़ां खोखली हो रही है। अरावली पर्वत श्रृखंलाओं को जेसीबी व विस्फोटक सामग्री से खत्म किया जा रहा है। पहाडिय़ों से पत्थरों का अवैध खनन कर ट्रैक्टर -ट्रॉलियों में भरकर शहरों में बेचने ले जाया जाता है। दुर्गाशाह वन पौधशाला, नैनिया की रेंज कार्यालय चौकी, सपोटरा नाका, नारौली डांग वन नाका, कुडग़ांव वन चौकी के सामने से टै्रक्टर-ट्रॉलियां निकलती है। लेकिन उन पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से अवैध खनन करने वाले बेखौफ है।
ग्रामीणों को परेशानी
वन क्षेत्रों में अवैध खनन से ग्रामीणों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। दिनरात पत्थरों से भरी ओवरलोड ट्रॉली सपोटरा उपखंड मुख्यालय के नारौली डांग मोड़ से दौड़ते नजर आते हैं। रात के समय टै्रक्टर-ट्रॉलियों की तेज आवाज से ग्रामीण सो नहीं पाते। ग्रामीणों ेने बताया कि योजनाबद्ध तरीके से ठोस कार्रवाई होने पर ही समस्या का समाधान हो सकता है
यहां से होता अवैध खनन
वन क्षेत्रों से दिन रात अवैध खनन हो रहा है। सपोटरा क्षेत्र के कांचरोदा, शेखपुरा, मांगरोल, आडाडंूगर, नारौली डांग, भरतून, सपोटरा किला आदि वन क्षेत्रों में अवैध खनन से पहाडिय़ां खोखली हो गई है। ग्रामीणों ने बताया कि अवैध खनन से वन संपदा को तो नुकसान पहुंचा ही रहा है वहां पहाडिय़ों में रहने वाले वन्यजीवों का पर्यावास भी खत्म हो रहा है। जिससे वन्यजीव जंगल से निकलकर आबादी क्षेत्र में आ जाते हैं। जिससे ग्रामीणों को भी खतरा रहता है। वन संपदा को नुकसान पहुंचने से पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है।
इनका कहना है
वन क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ वन विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती है। सपोटरा वन विभाग की टीम ने पिछले दिनों दो टै्रक्टर-ट्रॉली को जप्त किया था। मौके पर जाकर कार्रवाई को और मजबूत किया जाएगा। पत्थरों से ओवरलोड भरे वाहनों पर पुलिस भी कार्यवाही कर सकती है।
सुरेश मिश्रा, उपवन संरक्षक।