
करौली: दुर्लभ वन्यजीव सियागोश को संरक्षित करने की तैयारी, पांच वर्ष का तैयार किया प्लान
करौली. प्रदेश के अभयारण्य क्षेत्रों में लुप्तप्राय हो रहे दुर्लभ वन बिलाव सियागोश को वन विभाग द्वारा संरक्षित करने की तैयारी की जा रही है। प्रदेश में सर्वाधिक संख्या में कैलादेवी और रणथम्भौर वन्य जीव अभयारण्य में ही सर्वाधिक सियागोश हैं। वन विभाग सूत्रों के अनुसार वर्ष २०२० की गणना के अनुसार कैलादेवी-रणम्भौर अभयारण्य क्षेत्रों में करीब ३५ सियागोश नजर आए थे, जिसमें भी करीब २० से अधिक सियागोश करौली जिले के कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र में देखे गए, जो रणथम्भौर वन्य जीव अभ्यारण्य का ही द्वितीय क्षेत्र है।
विलुप्त होते इस दुलर्भ सियागोश को संरक्षित कर बढ़ावा देने के उद्देश्य से करौली एवं सवाईमाधोपुर वन विभाग की ओर से पंचवर्षीय योजना तैयार की गई है। करौली के कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र के सियागोश संरक्षण को लेकर करीब साढ़े १३ करोड़ रुपए से अधिक के बजट के प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भिजवाए गए, जहां से यह प्रस्ताव केन्द्र स्तर पर जा चुके हैं। बजट मिलने के बाद इस दिशा में आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
अन्य क्षेत्रों में संख्या नगण्य
वन विभाग सूत्रों के अनुसार रणम्भौर बाघ परियोजना में वर्ष २०२० में किए गए सर्वे में 35 सियागोश की गिनती हुई थी। सूत्रों के अनुसार इन सियागोश के कैमरा ट्रैप पद्धति से फोटो भी कैद हुए थे। वहीं अन्य क्षेत्रों में भी इनकी संख्या लगभग नगण्य हो चुकी है। इस प्रकार प्रदेशभर में सर्वाधिक संख्या कैलादेवी अभयारण्य में ही मानी जाती है।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के तहत प्रस्ताव
बिल्ली प्रजाति के इस दुर्लभ वन्यजीव सियागोश को अब नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ (राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड) के तहत प्रस्ताव तैयार किए हैं। पांच वर्ष की कार्ययोजना के तहत कैराकल कन्जर्वेशन प्लान तैयार किया है। जिसमें सियागोश की लगातार मॉनीटरिंग-ऑब्जर्वेशन करने, हैबिटॉट जोन निर्धारित करने, पानी के समुचित प्रबंध करने और उनके भोजन के प्रबंध करना शामिल है। यह प्रस्ताव १३४७.३० लाख रुपए के हैं।
इनका कहना है....
प्रदेशभर में रणथम्भौर-कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्रों में ही दुलर्भ वन्यजीव सियागोश की संख्या सर्वाधिक है। इसमें भी कैलादेवी में यह संख्या अधिक है। इसके संरक्षण के लिए पांच वर्ष का प्लान तैयार कर राज्य सरकार को भिजवाया गया, जहां से प्रस्ताव केन्द्र स्तर पर जा चुके हैं। बजट स्वीकृति के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रामानन्द भांकर, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना (द्वितीय), करौली
Published on:
15 Jun 2022 11:47 am
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