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Navratri Special: 1100 वर्ष पुराना है मां कैलादेवी का मंदिर, देशभर से आते हैं श्रद्धालु

Navratri Special: उत्तर भारत के प्रसिद्ध कैलादेवी मंदिर में देशभर से श्रद्धालु आते हैं। जिला मुख्यालय से दक्षिण दिशा में करीब 23 किलोमीटर दूर त्रिकूट पर्वत पर विराजमान कैलामाता का दरबार जन-जन की आस्था का केन्द्र है।

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Navratri Special: उत्तर भारत के प्रसिद्ध कैलादेवी मंदिर में देशभर से श्रद्धालु आते हैं। जिला मुख्यालय से दक्षिण दिशा में करीब 23 किलोमीटर दूर त्रिकूट पर्वत पर विराजमान कैलामाता का दरबार जन-जन की आस्था का केन्द्र है। शारदीय नवरात्र में माता का दरबार श्रद्धालुओं से अटा रहता है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचकर मनौती मांगते हैं।

अनेक भक्त आस्थाधाम में ठहरकर शारदीय नवरात्र में माता के गुनगान करते हैं। इस मंदिर का इतिहास करीब 1100 वर्ष प्राचीन बताया जाता है। कैला मैया के मंदिर को लेकर कई मान्यताएं हैं। बताया जाता है कि वर्तमान में जो कैला गांव है, वह करौली के यदुवंशी राजाओं के आधिपत्य में आने से पहले गागरोन के खींची राजपूतों के शासन में था। यहां मुख्य प्रतिमा के साथ ही चामुण्डा देवी की प्रतिमा विराजमान है।

प्राचीन परम्पराओं का हो रहा निर्वहन
कैलादेवी कस्बे में स्थित कालीसिल नदी में स्नान का भी विशेष महत्व है। माता के दर्शनों से पहले श्रद्धालु नदी में स्नान करने पहुंचते हैं। महिलाएं सुहाग के प्रतीक के रूप में हरे रंग की चूडि़यां एवं सिंदूर खरीदती हैं। नव दम्पत्तियों द्वारा एक साथ दर्शन करना, बच्चों का मुंडन संस्कार की परम्परा भी यहां बरसों पुरानी है। दूसरी तरफ मेले के दौरान मंदिर परिसर में ढोल-नगाडों की धुन पर महिला-पुरुष श्रद्धालु लांगुरिया गीतों के बीच नृत्य करते नजर आते हैं।

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