
अनदेखी से खत्म होते चले गए करौली के रियासतकालीन खेल मैदान
अनदेखी से खत्म होते चले गए करौली के रियासतकालीन खेल मैदान
बिना मैदानों के खेलों के प्रति घटता गया रुझान
करौली. सरकार चाहें खेलों को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही हैं लेकिन करौली जिला मुख्यालय पर खेल मैदानों का अभाव है। तीन-चार दशक पहले यहां जो मैदान थे, उन पर भवन निर्माण हो गए और खेल गतिविधियां भी काफी सिमट गई।
वैसे यहां खेलों के प्रति रुझान रियासतकाल से रहा है। रियासत काल में करौली में लगभग 20 बाग-बगीचे थे, जहां लोग विभिन्न प्रकार से व्यायाम किया करते थे। यहां कुश्ती लडऩे एवं नाल उठाने का काफी शौक रहा है।
राजा भौमपाल के समय में मदन मोहनजी के गोस्वामी वीरेश्वर किशोर ने आनंद क्लब की स्थापना करके श्रीजी के बाग में बॉलीबाल के मैदान तैयार कराए। रावल के गेंदघर में बिलियर्ड एवं स्कूनर खेलने की व्यवस्था थी। सर्किट हाउस में बने हुए गणेश क्लब में टेबल टेनिस तथा इंडोर गेम्स खेले जाते थे। जहां स्टेडियम बना है, उस बॉडीगार्ड मैदान का उपयोग विद्यार्थियों के खेलने में होता था। वर्तमान में कलेक्ट्रेट के टाउन हॉल के दोनों ओर फुटबॉल एवं हॉकी के खेल मैदान थे, जो मल्टीपरपज हायर सैकण्डरी स्कूल के तहत थे। वर्तमान में जहां कलेक्ट्रेट भवन बना है वहां के मैदान पर सुबह-शाम नियमित हॉकी-फुटबाल खेल गतिविधि होती थी। इसके अलावा स्कूल के प्रवेश द्वार के दोनों ओर बास्केटबॉल एवं बॉलीवाल के कोर्ट थे।
हायर सैकण्डरी स्कूल के 'बीÓ ब्लॉक के पास एवं वर्तमान डाइट हाल के बीच में बॉलीबाल की फील्ड थी। विवेकानंद पार्क एवं वर्तमान न्यायालय परिसर में हॉकी एवं फुटबाल के दो मैदान थे। अधिकांश प्रतियोगिताएं इन मैदानों पर होती थी। चार- पांच दशक पहले करौली में हॉकी, फुटबाल एवं बॉलीवाल तथा बास्केटबॉल खेलों का क्रेज था। समुचित मैदान होने के कारण यहां खेल गतिविधियां होती रहती थी और खिलाडिय़ों की संख्या में वृद्धि हुई।
हॉकी एवं फुटबॉल खेलों के मैदान केवल करौली में थे। हाकी के नियमित अभ्यास के कारण यहां से हॉकी के अच्छे खिलाड़ी तैयार हुए। बढ़ती आबादी के दबाव में करौली के जो खेल मैदान थे, उन पर या तो भवन बन गए या देख रेख के अभाव में वे गायब हुए। कलेक्ट्रेट एवं विवेकानन्द पार्क बनने से हायर सेकेंडरी के खेल मैदान, न्यायालय बनने पर हॉकी व फुटबॉल मैदान खत्म हो गए। इंडोर गेम्स में प्रयुक्त सीनियर सेकेंडरी स्कूल के हॉल में टाउन हॉल बन गया। अब केवल त्रिलोक चंद माथुर स्टेडियम ही विद्यार्थियों की खेलकूद गतिविधियों का केन्द्र रह गया है।
छह दशक पहले महाविद्यालय का नवीन भवन बनने पर क्रिकेट पिच एवं बास्केटबॉल कोर्ट तैयार हुए, लेकिन खिलाडिय़ों के लिए पुराने समय में उपलब्ध खेल मैदानों की कमी पूरी नहीं हो सकी
सर्किट हाउस में लॉन टेनिस तथा बैडमिंटन के कोर्ट बदहाल हुए हैं। कॉलेज में बास्केटबॉल कोर्ट की स्थिति भी सही नहीं।
करौली के शिवचरण माली के राजस्थान खेल परिषद का अध्यक्ष बनने पर यहां खेल संकुल का उपहार मिला, जिसमें इंडोर खेलों की सुविधा उपलब्ध होने लगी है। जिला क्रिकेट संघ द्वारा तैयार कराया गया मैदान भी अब बदहाल हो चला है। खेल प्रेमियों का मानना है कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए जिला मुख्यालय सहित सभी उपखंड मुख्यालयों पर खेल मैदानों की समुचित व्यवस्था की आवश्यकता है।
(कार्यालय संवाददाता)
Published on:
29 Aug 2022 11:17 am
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