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सड़क पर पक्की दीवार बनाकर रोक दिया शास्त्री नगर का रास्ता

The road to Shastri Nagar was blocked by making a paved wall. -भटक रहे लोग, अधिकारी नहीं कर रहे सुनवाई

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सड़क पर पक्की दीवार बनाकर रोक दिया शास्त्री नगर का रास्ता

हिण्डौनसिटी. शास्त्री नगर में रास्ता बंद करने के विरोध में प्रदर्शन करते कॉलोनी वासी।

हिण्डौनसिटी. उपखण्ड़ मुख्यालय पर अवैध कॉलोनी विकसित करने वाले भूमाफिया और कॉलोनाइजर्स के हौंसले किस कदर बुलंद हैं, इसकी बानगी देखनी है, तो शहर के वार्ड संख्या तीन के शास्त्री नगर चलें आइए। प्रभावशाली लोगों ने 25 वर्ष पहले बसी इस कॉलोनी का आम रास्ता रोक दिया है। करीब तीन माह से कॉलोनीवासी सरकारी दतरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहें हैं। मंगलवार को कॉलोनी वासियों ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया। साथ ही अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लगाते हुए नारे लगाए।


कॉलोनी वासी किशोर कुमार, करतार सिंह, विमलेश देवी ने बताया कि बाइपास पर 25 वर्ष पहले खसरा नंबर 2409 एवं 2410 पर खातेदार विशभर शास्त्री ने शास्त्री नगर के नाम से आवासीय कॉलोनी विकसित की थी। इसमें शहर व आसपास के विभिन्न समाजों के लोगों ने भूखण्ड खरीदे थे। कॉलोनी में भूखण्डों तक पहुंचने के लिए 20 फीट चौड़ा रास्ता भी था। जहां से होकर कॉलोनी के लोग अब तक निकल रहे थे। लेकिन कॉलोनी विकसित करने वाले विशभर शास्त्री की मृत्यु के बाद उसके पुत्र गोपाललाल शास्त्री ने मैरिज होम बनाकर कॉलोनी के रास्ते में पक्की दीवार खड़ी कर दी। जिससे कॉलोनी के लोगों की आवाजाही का रास्ता बंद हो गया।

रद्दी में तहसीलदार की जांच रिपोर्ट-
कॉलोनी वासियों द्वारा रास्ता बंद करने की शिकायत एसडीएम अनूप सिंह से की गई। जिस पर तत्कालीन तहसीलदार हेमेन्द्र मीणा ने इसकी जांच की। जांच में तहसीलदार ने कॉलोनी वासियों के परिवाद को सत्य मानते हुए रास्ते से अवरोध हटाने के लिए एसडीएम को लिखा साथ ही इस भूमि को गैर मुमकिन रास्ते की भूमि के रुप में दर्ज करने की सिफारिश की थी। लेकिन जांच रिपोर्ट पेश करने के दो माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

नगरपरिषद के डिजिटल मानचित्र में दर्ज है रास्ता-
तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया, कि जिस रास्ते को बंद किया गया है, वह नगरपरिषद के टाउन प्लान एवं डिजीटल मानचित्र में दर्ज है। करीब 12 वर्ष पूर्व इस आम रास्ते में नगरपरिषद ने सड़क निर्माण भी कराया था। तहसीलदार में माना कि रास्ता या पहुंच मार्ग आवश्यक सुखाधिकार हैं। किसी भी भूमि, चाहे वह कृषि हो अथवा अकृषि भूमि हो, वहां तक पहुंचने के लिए रास्ता होना आवश्यक है।

आमरन अनशन की चेतावनी-
कॉलोनी वासियों ने बताया कि रास्ता खुलवाने की मांग को लेकर वे कई बार नगरपरिषद आयुक्त कीर्ति कुमावत, एसडीएम अनूप सिंह, जिला कलक्टर राजेन्द्र सिंह सेखावत व पंचायती राज विभाग के मंत्री रमेशचंद मीणा से भी मिले। लेकिन कोरे आश्वासनों के अलावा उन्हें कुछ नहीं मिला। लोगों ने बताया कि प्रशासन द्वारा जल्दी ही रास्ते में बनाई गई दीवार को नहीं तुडवा कर आवागमन सुचारु नहीं कराया गया, तो धरना देकर आमरन अनशन किया जाएगा। इस दौरान रविकुमार, रामेश्वर, शांति, उषा शर्मा, राजकुमारी, पंकज, अनिल, प्रेमसिंह, सियाराम, सोनू व राकेश समेत दर्जनों महिला-पुरुष मौजूद रहे।

इनका कहना है-
करीब तीन माह पहले यह परिवाद आया था, जिसमें तहसीलदार से जांच कराई थी। मामला नगरपरिषद से संबधित होना पाया जाने पर कॉलोनी वासियों को सिविल कोर्ट में परिवाद पेश करने के लिए कहा गया था।
- अनूप सिंह, एसडीएम, हिण्डौनसिटी।