चंबल किनारे घडियालों के अंडों की सुरक्षा के लिए किए बंदोबस्त
करणपुर. चंबल नदी क्षेत्र में इस बार काफी संख्या में घडिय़ालों का भारी प्रजनन हुआ है। जिसको देखते हुए वन विभाग ने भी उनकी सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। डीएफओ अनिल कुमार यादव घडियाल सेंचुरी ने बताया कि सवाईमाधोपुर , धौलपुर -करौली और पाली घाट की तीनों रेंज में इस बार घडिय़ालों का काफी प्रजनन हुआ है। धौलपुर में सबसे अधिक शिशु जन्मे हैं। इनकी सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। करीब 125 मादाओं ने घडियालों के अंड़े दिए हैं। यह प्रजनन हर साल होता है। खास बात यह है कि नदी के मध्य प्रदेश वाले हिस्से में नेस्टिंग पॉइंट कम है। पिछले साल नदी में पानी की भारी आवक के कारण यह स्थिति बनी है।
रेत में देते हैं अंडे
डीएफओ अनिल कुमार यादव ने बताया कि मादा घडियाल चंबल नदी के आसपास रेत में काफी संख्या में अंडे देती है। ऐसा पहली बार हुआ है कि मध्य प्रदेश के चम्बल नदी क्षेत्र वाले चम्बल के घाटों से ठीक सामने राजस्थान की सीमा में रेत पर भारी तादाद में घडिय़ालों ने अंडे दिए हैं। चंबल नदी के दोनों किनारों पर दोनों राज्यों के 50 प्रजनन केंद्रों पर 140 मादाओं का प्रजनन स्थल है। मध्यप्रदेश के देवरी में घडिय़ाल केंद्र से हर साल करीब 200 अंडों को ले जाकर प्रजनन कराया जाता है। जबकि राजस्थान की सीमा पर मादा घडिय़ाल खुद ही बजरी में दबे अंडे फोड़कर बच्चों को पानी तक ले जाती है। केशोरायपाटन से धौलपुर तक करीब 400 किलोमीटर तक चंबल नदी में 3 रेंज है।
इन घाटों पर होता है प्रजनन
पाली घाट, इटावा, केशोरायपाटन के दिव्यघाट, धौलपुर के समोंना घाट, मध्यप्रदेश के बरौली चंबल घाट आदि में काफी संख्या में घडियालों का प्रजनन होता है। सरकार ने अक्टूबर 2015 में घडियाल सेंचुरी को स्वीकृत देने से करौली को विशेष पहचान मिली थी। चंबल नदी क्षेत्र में महाराजपुरा क्षेत्र मे चंबल नदी के घाटों पर कई प्रजनन केन्द्र है। यहां मादा मई के माह में व जून में 30 से 40 सेंटीमीटर गड्ढा खोदकर 50 से 70 तक अंडे देती है। मादा घडिय़ाल अंडों पर बैठकर इनका सेक करती हैं। कुछ दिनों बाद गड्ढे के अंदर मदर काल सुनाई देती है। जिस पर मादा घडियाल पंजों से अंडे निकालती है। जिनको सहारा देकर चंबल नदी में ले जाती है।