हिण्डौनसिटी. क्षेत्र के करीब 60 गांवों का सिंचाई और जल स्त्रोत रहे क्यारदा बांध का अस्तित्व बचाने के लिए लामबंद हुए ग्रामीणों ने शुक्रवार को मुहिम तेज कर दी। महापंचायत में लिए निर्णय के तहत दोपहर में ग्रामीणों ने रैली निकाल कर तहसील कार्यालय में प्रदर्शन किया। साथ ही मिट्टी की अवैध खुदाई को रोक बांध पेटा क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। ्र
क्यारदा निवासी कल्याणसिंह, बनवारीलाल, श्यामसिंह व पीपलहेडा के वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में बांध के क्षेत्र के गांव क्यादाकलां, क्यारदा खुर्द, श्यामपुर मूडरी, मण्डावरा, रेवई सहित कई गांवों के किसान किसान बुग्घा व ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से तहसील कार्यालय आगए। जहां ग्रामीणों ने स्टेशन रोड स्थित तहसील मोड से नारे लगाते हुए रैली निकाली। तहसील कार्यालय परिसर पहुंच ग्रामीणोंं ने रियासतकालीन बांध से हो रही मिट्टी के खुदाई और अवैध रूप से अतिक्रमण करने पर विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना था कि क्यारदा बांध से लघु सिंचाई परियोजना के तहत क्षेत्र के गांवों की कृषि भूमि सिंचिंत होती थी। बांध पूर्व में सिंचाई विभाग के अधीन रहा था। बाद में वर्ष 2003 में ग्रामीण क्षेत्र में होने के कारण पंचायती राज विभाग केअधीन कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों बांध क्षेत्र की भूमि का अवैध रूप से खरीद-बेचान कर रहे हैं। कइयों बार प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी बांध के संरक्षण को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसके लेकर ग्रामीण बांध पेटे में महापंचायत कर खुद लामबंद हुए हैं। प्रदर्शन के बाद के बाद ग्रामीणों ने एसडीएम सुरेश कुमार हरसोलिया को ज्ञापन सौप बांध के संरक्षण की मांग की। एसडीएम ने वर्ष 1950 के राजस्व रिकॉर्ड से मिलान करवा कर मामले में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इस दौरान सतीशजाट, विश्वेन्द्र सिंह, गोविंद, संतोष, रामावतार जगदीश प्रसाद , बबलू, सरपंच रामाधारी, संतोष कुमार, रामावतार,विनय सिंह,बनयसिंह,ओमसिंह सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।