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VIDEO: श्रद्धालुओं को लुभाती क्षेत्रपाल धाम की हरियाली

कुडग़ांव/सपोटरा. समीपवर्ती ग्राम पंचायत डाबरा में स्थित क्षेत्रपाल धाम पर ग्रामीणों के सहयोग से विकसित की गई हरियाली यहां आने वाले लोगों को सुकून देती है। यहां लगाए गए विभिन्न किस्म के पौधों से न केवल पर्यावरण स्वच्छ हो रहा है बल्कि इससे लोगों को स्वच्छ वायु एवं हरियाली मिल रही है। इस गांव के युवा एवं पंच पटेलों ने पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए मुहिम चलाई है, जो कई सालों से निरंतर जारी है। ग्रामीणों की मेहनत से आज यहां चहूं ओर हरियाली छाई हुई है। क्षेत्र में 16 साल से कुल्हाड़ी बंद है, और यदि

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श्रद्धालुओं को लुभाती क्षेत्रपाल धाम की हरियाली
कुडग़ांव/सपोटरा. समीपवर्ती ग्राम पंचायत डाबरा में स्थित क्षेत्रपाल धाम पर ग्रामीणों के सहयोग से विकसित की गई हरियाली यहां आने वाले लोगों को सुकून देती है। यहां लगाए गए विभिन्न किस्म के पौधों से न केवल पर्यावरण स्वच्छ हो रहा है बल्कि इससे लोगों को स्वच्छ वायु एवं हरियाली मिल रही है। इस गांव के युवा एवं पंच पटेलों ने पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए मुहिम चलाई है, जो कई सालों से निरंतर जारी है। ग्रामीणों की मेहनत से आज यहां चहूं ओर हरियाली छाई हुई है। क्षेत्र में 16 साल से कुल्हाड़ी बंद है, और यदि कोई व्यक्ति पेड़ों को काटता है, तो उससे 5100 रुपए का जुर्माना वसूल किया जाता है।
सभी कर रहे योग, पेड़ों की कटाई पर जुर्माने का प्रावधान
क्षेत्रपाल धाम को हरा भरा बनाए रखने में ग्रामीणों के साथ सरकारी-अधिकारी कर्मचारी भी सहयोग कर रहे हैं। यहां के कई युवा बाहरी राज्यों में सरकारी पदों पर कार्यरत हैं। छुट्टियों में यहां आकर पेड़ों के रखरखाव में सहयोग करते हैं। डाबरा निवासी आईएएस अधिकारी अमृतलाल मीणा ने बताया कि पहले मात्र यहां पेड़ कम थे, लेकिन धीरे-धीरे ग्रामीणों के सहयोग से हमने पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए मुहिम चलाई और आज 5 हजार से अधिक पेड़ लगे हुए हैं। डाबरा गांव निवासी डॉ. सुशील कुमार मीणा ने बताया कि हरियाली के कार्य में सभी का सहयोग मिल रहा है। श्री क्षेत्रपाल धाम कमेटी के अध्यक्ष कुमेर मीणा ने बताया कि इस क्षेत्र से पेड़ों की कटाई पर कमेटी ने जुर्माने का प्रावधान है, हालांकि अभी तक किसी पर जुर्माना नहीं लगाया गया है। लोगों का सहयोग मिल रहा है। श्री क्षेत्रपाल धाम सेवा समिति के पदाधिकारी एवं पंच पटेलों ने बताया कि वर्तमान में करीब 5 हजार पौधे लगाए गए हैं। इनमें करीब 1 हजार पौधे धौक के लगे हुए हैं अन्य पौधों में आम, बादाम, अमरूद, कल्पवृक्ष, चंदन, बड़, पीपल, नीम, कुबेर एवं कंडेल आदि के शामिल है। यह मंदिर 1176 से बना था।
पंच-पटेलों ने पेड़ों को कटने से बचाने लिए कमेटी का गठन कर जिम्मेदारी उठाई। पौधों की ङ्क्षसचाई के लिए फव्वारे लगाए हुए हैं। फव्वारों से सिंचाई होने से गर्मी में भी यहां हरियाली छाई रहती है।
प्रकृति के बीच मिलता सुकून, छाई है हरियाली
गुढ़ाचंद्रजी. प्रकृति के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है। प्राण वायु ऑक्सीजन हमे प्रकृति से ही मिलती है। ऐेसे में विश्व पर्यावरण दिवस पर सोमवार को कई जगह पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रकृति में पेड़ों के महत्व को देखते हुए संत शिवरामदास महाराज ने मुहाना मोड़ पर परीत बाबा के स्थान पर एक दशक से दिन-रात मेहनत कर सैकड़ों पेड़ पौधे लगाए हैं। जिससे हरियाली छाई हुई है। यहां आने वाले लोगों को सुकून मिलता है। उन्होंने बताया कि वे वर्ष 2011 में इस स्थान पर आए थे। सुनसान जंगल में स्थान होने के कारण यह स्थान वीरान था। यहां केवल एक पीपल का पेड़ था। इसके बाद भक्तों के सहयोग से सर्वप्रथम उसने 10 पौधे लगाए थे। उनकी अच्छी तरह देखभाल करने के बाद वे पेड़ बन गए। वर्तमान में इस वाटिका में करीब 500 पौधे लहलहा रहे हैं। जिनमें नीम पीपल, शहतूत, अशोक, केसर श्यामा, तुलसी अश्वगंधा नीम गिलोय सतावर, आंवला, इलायची सहित 3 दर्जन से अधिक किस्मों के पेड़ है। इनकी समय समय पर देखभाल से पेड़ों की संख्या बढ़ रही है। संत ने बताया कि पेड़ भगवान का ही रूप से है, जो हमे जीवन के लिए ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। परीत बाबा के स्थान पर हरियाली से लोग रोजाना अनेक लोग घूमने आते हैं।