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दुनिया में विख्यात पुल हादसे के मुहाने पर

यह जलसेतु आज से 128 साल पहले बनकर तैयार हुआ था, अब इसमें दरारें पड़ना शुरू हो गई हैं।

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Jhal Ka pul

कासगंज। जिले में 128 वर्ष पूर्व बना अद्भुत जलसेतु झाल पुल पर आज संकट के बादल मंडरा रहा रहे हैं। भूकंप के दौरान जलसेतु के टूटने की आशंका बनी हुई है, अगर इस कारण ये जल सेतु टूट जाता है तो कासगंज शहर सैलाब में आ जाएगा। फिलहाल सूचना मिलते ही कासगंज जिलाधिकारी ने एहतियातन के तौर पर जलसेतु के ऊपर से चल रहे यातायात पर तत्काल रोक लगाने की बात कही है, परंतु दर्शनार्थियों के लिए यह रोक नहीं है। भारी वाहन तो सदैव के लिए प्रतिबंधित कर दिए गए हैं।


128 साल पहले बनकर तैयार हुआ

आपको बताते चलें कि कासगंज जिले में नदरई गांव के समीप झाल का पुल सन् 1889 में बनकर तैयार हुआ था। इस जलसेतु के ऊपर हजारा नहर गुजरती है, जबकि नीचे काली गंगानदी बह रही है। इसकी पहचान विश्व के शीर्ष जलसेतु में से एक है और झाल के पुल के नाम से जानी पहचानी जाती है। यह जलसेतु आज से 128 साल पहले बनकर तैयार हुआ था, अब इसमें दरारें पड़ना शुरू हो गई हैं।


तमाम शिक्षा संस्थानों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी

हल्के भूकंप के दौरान पुल टूटने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में पूरा कासगंज शहर पानी के सैलाब में बह सकता है। आपको बताते चलें कि यह जलसेतु विश्व के तमाम शिक्षा संस्थानों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी है। आयरलैंड की कॉर्क यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग में स्नातक विलियम गुड ने नदरई जलसेतु को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। विलियम गुड इस परियोजना के कार्यकारी अभियंता थे। 60 फीट चैड़ाई की कुल 15 त्रिजायें, जलसेतु की कुल लंबाई 1310 फीट और ऊंचाई 88 फीट है। नदरई का यह जल सेतु इंजीनियरिंग की एक ऐसी अग्रणी संरचना है जिसकी पुनरावृत्ति करना आज के मशीनी युग में भी किसी चैलेंज से कम नहीं है। हालांकि जिलाधिकारी आरपी सिंह ने इस झाल के पुल पर एहतियातन भारी वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि दर्शनार्थियों के लिए आज भी मार्ग खुला हुआ है।