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नदी के ऊपर नदी और उसके ऊपर से गुजरते हैं वाहन, गंगा नदी पर बने इस अद्भुत पुल को देख आईएएस अधिकारी भी रह गए हैरान

130 वर्षों से चर्चित बने झाल के पुल को देखकर अचंभित हुए आईएस अधिकारी।

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Ias ranjan kumar

Ias ranjan kumar

कासगंज। कासगंज में विकास कार्यों की समीक्षा करने आए नोडल अधिकारी रंजन कुमार शहर के निकटवर्ती नदरई स्थित 130 वर्षों से चर्चित जलसेतु को देखने पहुंचे, इस जलसेतु की रचनात्मकता को देख IAS रंजन कुमार रोमांचित हो उठे। वहां उन्होंने इस खूबसूरत जलसेतु के अलग अलग हिस्सों को अपने कैमरे में भी कैद किया।

ये है इस पुल की कहानी
नदरई कासगंज स्थित काली नदी के ऊपर से एक सेतु के जरिये, कैनाल को निकाला गया है। 1889 के दौरान कासगंज के करीब नदरई स्थित काली नदी के ऊपर बनकर तैयार हुए इस जलसेतु से होकर लोअर गंगा कैनाल गुजरती है। इसकी गिनती विश्व के शीर्ष जलसेतु में होती है। नदरई का यह जलसेतु आज से 128 साल पहले बनकर तैयार हुआ था।

पाठ्यक्रम का हिस्सा
यह जलसेतु विश्व के तमाम शिक्षा संस्थानों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी है। ई कॉमर्स वेबसाइटों पर 25 डॉलर तक में बिकती है। इस जलसेतु की एंटिक फ़ोटो आयरलैंड की कॉर्क यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग में स्नातक विलियम गुड ने नदरई जलसेतु को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। विलियम गुड इस परियोजना के कार्यकारी अभियंता थे। 60 फ़ीट चौड़ाई की कुल 15 त्रिजायें हैं, जलसेतु की कुल लंबाई 1310 फ़ीट और ऊंचाई 88 फीट है। 19 वीं शताब्दी में विश्वभर के अखबारों की सुर्खियां रहा यह जलसेतु अमेरिका के केलिफोर्निया में 16 जनवरी 1892 को पेसिफिक रूरल प्रेस अखबार के मुख्य पृष्ठ पर कासगंज नदरई के इस एक्वाडक्ट जलसेतु की खबर छपी थी।


ये बोले आईएएस
आईएएस रंजन कुमार ने कहा कि नदरई का यह जल सेतु इंजीनियरिंग की एक ऐसी अग्रणी संरचना है जिसकी पुनरावृत्ति करना आज के मशीनी युग में भी किसी चैलेंज से कम नहीं है।