
kasganj violence
डॉ. भानु प्रताप सिंह
कासगंज। उत्तर प्रदेश का कासगंज सोन पपड़ी के लिए प्रसिद्ध है। ये वही कासगंज है, जहां से 15 किलोमीटर दूर धर्मनगरी सोरों शूकर क्षेत्र है। सोरों में हाड़ गंगा है। सोरों में ही रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास का जन्म हुआ। सोरों ही भगवान वाराह का मोक्षस्थली है। इन दिनों ये कासगंज हिंसा के लिए प्रसिद्ध हो रहा है। कासगंज को तिरंगा यात्रा के दौरान गोली से मारे गए चंदन गुप्ता के नाम से प्रसिद्ध हो रहा है। कासगंज अफवाहों के कारण भी प्रसिद्ध हो रहा है। सवाल ये है कि आखिर ऐसी नौबत कैसे आ गई कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर कासगंज हिंसा की आग में जल उठा? आखिर किसकी नजर लग गई कासगंज को? क्या सबकुछ सुनियोजित था या अचानक हो गया? इन सवालों के जवाब खोजने के लिए पत्रिका टीम मंगलवार को कासगंज पहुंची। दोनों पक्षों से बातचीत की। मामले की तह में जाने का प्रयास किया।
चामुंडा मंदिर पर गेट लगाने का विरोध
घटना की शुरुआत 23 जनवरी, 2018 से शुरू होती है। ठंडी सड़क पर प्रसिद्ध चामुंडा मंदिर है। इसके द्वार पर गेट लगवाया जा रहा था। आसपास के संप्रदाय विशेष के लोगों ने विरोध कर दिया। गेट लगाने का विरोध में धरना दिया। पत्रकार अशोक कुमार का कहना है कि गेट इसलिए लगाया जा रहा था ताकि वाहन और पशु प्रवेश न करें। पशुओं के प्रवेश से श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। इस घटना का तिरंगा यात्रा का कोई संबंध नहीं होना चाहिए, लेकिन कुछ लोग जोड़कर देख रहे हैं। इसके विपरीत एबीवीपी के संगठन मंत्री सुनील वार्ष्णेय कहते हैं कि चामुंडा मंदिर पर गेट लगाने के विवाद का गुस्सा तिरंगा यात्रा पर निकाला गया। सुनियोजित साजिश थी।
वीर अब्दुल हमीद तिराहे पर क्या हुआ
इसके बाद पत्रिका टीम पहुंची बड्डू नगर (बिलरामगेट) में। यहीं पर वीर अब्दुल हमीद तिराहा है। पतली सड़क है। आमने-सामने से दो कार आ जाएं, तो निकल नहीं सकती हैं। 26 जनवरी को यहां मुस्लिम तिरंगा फहराने की तैयारी कर रहे थे। सड़क पर कुर्सियां लगाई जा चुकी थीं। तिरंगे गुब्बारे लगाए गए थे। तिरंगा फहराया ही गया था कि अचानक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तिरंगा यात्रा लेकर आ गए। सभी बाइकों पर थे। हाथों में तिरंगा और भगवा झंडा था। नारेबाजी की जा रही थी- भारत में यदि रहना होगा, वंदे मातरम कहना होगा। चांद मियां बताते हैं कि हंगामा होने लगा। लोग भागने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बाइकों पर सवार लोग कह रहे थे कि तिरंगे की जगह भगवा झंडा फहराओ। वहीं एनजीओ चलाने वाले आसिफ का कहना था कि तिरंगे के साथ भगवा झंडा फहराने की बात कह थे। जब ये बात नहीं मानी गई तो हमला कर दिया। मारपीट कर दी। हम सब लोग जैसे-तैसे बच सके। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में कुछ वीडियो फुटेज भी दिखाए। चांद मियां, अंसार, आसिफ, अब्दुल आदि का कहना है कि हिन्दू और मुसलमान मिलकर रहते हैं। हिन्दू लोग ठेल लगाते हैं, जिनसे हम सामान खरीदते हैं। यहां तो कोई विवाद ही नहीं है। इस बात की तस्दीक ठेल लगाने वाले राजेश ने भी की। सब्जी की दुकान चलाने वाले कासिम गुस्से में नजर आए। कहने लगे- यहां रिपोर्ट लेकर तो जा रहे हैं, लेकिन दिखा नहीं रहे हैं। दिखा वही रहे हैं, जो दिखाना है। यह दिखा रहे हैं कि हमने मारा। यहां तो कुछ हुआ ही नहीं है। हमें मारा और चले गए। घटना तो बाजार में हुई है। युवा अकबर अंसारी का कहना है कि सारी हकीकत सीसीटीवी कैमरे में कैद। हमारे साथ बद्तमीजी की। रैली निकालनी है तो रोड पर निकालो, गलियों में क्यों आ गए? हमारे मोहल्ले में आज तक कुछ नहीं हुआ है। उन्होंने सांसद पर भड़काने का आरोप लगाया।
कुशवाह समाज की महिलाओं की बात
कुशवाह समाज की महिलाएं रामबेटी आदि ने संप्रदाय विशेष का नाम लेकर कहा कि तिरंगा यात्रा लाने वालों पर ईंटों से हमला किया। यह देखकर तिरंगा यात्रा वाले मोटरसाइकिल छोड़कर भाग खड़े हुए। संप्रदाय विशेष की ओर इशारा करते हुए कहा कि बाइकों को तोड़ दिया। अगर पुलिस वाले अपने सामने बाइकें ले जाते तो अच्छा रहता। ईंटों के निशान अब तक हैं।
गोली कहां लगी
तिरंगा यात्रा में व्यवधान के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के युवाओं ने स्वयं को अपमानित माना। फिर सभी कार्यकर्ता एकत्रित होकर बिलराम गेट बाजार की तरह आ गए। नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते दोनों ओर से पथराव होने लगा। इसी दौरान हुई फायरिंग में बीकॉम के छात्र चंदन गुप्ता की मौत हो गई। दो और लोगों को गोली लगी। दोनों का इलाज चल रहा है। इसके दौरान पुलिस भी मौजूद थी, लेकिन स्थिति नियंत्रित नहीं कर सकी। इसके बाद कासगंज में बलवा शुरू हो गया।
क्या कहना है पुलिस का
अपर पुलिस महानिदेशक अजय आनंद इस बात से इनकार करते हैं कि 26 जनवरी को हिंसा की कोई साजिश थी। सबकुछ अचानक हो गया। सवाल ये है कि अचानक हुआ तो हथियार और बम कहां से आ गए? पुलिस के पास इसका जवाब नहीं है। इस बीच कासगंज के पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार का तबादला हो गया है। नए पुलिस अधीक्षक पीयूश श्रीवास्तव आ गए हैं। वे अत्यधिक व्यस्त हैं। मीडिया से भी बात नहीं कर रहे हैं।
सुनियोजित साजिश का आरोप
दूसरी ओर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के संगठन मंत्री सुनील वार्ष्णेय का कहना है कि तिरंगा यात्रा में व्यवधान डाला गया है। पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाए जाते हैं। फायरिंग की जाती है। तिरंगा यात्रा निकालना कोई अपराध नहीं है। चामुंडा मंदिर पर गेट लगाने को विवाद हुआ है। तिरंगा यात्रा पर हमला सुनियोजित साजिश थी। आरोपियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
Published on:
30 Jan 2018 05:33 pm
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