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अखिलेश की रैली के बाद भाजपा के होश उड़े, पिता का सम्मान बचाने शिक्षा राज्यमंत्री प्रचार में कूदे, देखें वीडियो

भाजपा विधायक ने सरकार की योजनाओं को राक्षस की तरह बताया, इससे मुश्किल और बढ़ी

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कासगंज। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की जनसभा के बाद एटा संसदीय सीट पर माहौल कुछ बदला सा दिख रह है। विरोधी दलों के होश उड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश के शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह अपने पिता राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया के चुनाव प्रचार में कूद पड़े हैं। चुनाव के दौरान उन्हें जनता जर्नादन याद आ रही है। भाजपा के विधायक देवेन्द्र प्रताप राजपूत सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को राक्षस की तरह बता रहे हैं।

हो रहा है विरोध
आपको बता दें कि एटा लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजवीर सिंह ने 2014 में परचम फहराया था। उस वक्त राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया को मोदी लहर और पिता पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की विरासत मिली थी। इस बार बीजेपी ने फिर से राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया पर दांव खेला है। राजू भैया को गांव-गांव विरोध का सामना करना पड़ रहा है। रफातपुर, आंनदीपुर के ग्रामीण सांसद मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं। नाराज ग्रामीण चौकीदार चोर है के नारे लगा रहे हैं। अब वोटों के समय में जनता पूछ रही हैं सांसद जी पांच साल तक कहां रहे, चुनाव आते हैं, जनता याद आने लगी है। रफातपुर के बृजेश कुमार का कहनाहै कि लोगों को गांव में मोदी सरकार द्वारा चलाई गई मूलभूत सुविधाएं नहीं मिली हैं। जनता जर्नादन नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं, इसलिए वह वोट नहीं देंगे।

विधायक ने क्या कहा
बीजेपी के अमांपुर विधायक देवेन्द्र प्रताप सिंह ने अपनी सरकार की योजनाओं को राक्षस बता डाला है। विधायक ने कहा -शौचालय, पेंशन और आवास की योजनाएं राक्षस की तरह मुंह बायें खड़ी हैं,लाभार्थियों तक सरकार की योजनाएं नहीं पहुंच पा रही है। इससे ग्रामीण खफा होकर बीजेपी के खिलाफ आक्रोशित हैं।

पुत्र ने कहा- कहीं विरोध नहीं हो रहा
ग्रामीणों के गुस्से को देखकर योगी सरकार के शिक्षामंत्री संदीप सिंह भी कूद पड़े हैं, क्योंकि संदीप कुमार एटा कासगंज के बीजेपी प्रत्याशी के पुत्र हैं, और वह अपने पिता को हरसंभव जीत दिलाने की जुगत हैं। जब हमने गांव-गांव हो रहे विरोध के बारे में पूछा तो कहा कि मैं जहां भी जाता हूं, लोग मेरे और पिता के समर्थन में खडे हुए हैं, मुझे तो कोई विरोध दिखाई नहीं दे रहा है। उत्तर प्रदेश के शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह अपने पिता के सम्मान को वापस दिला पाने में कितने कामयाब होंगे, ये तो 23 मई को चुनावी नतीजे आने के बाद ही पता चल सकेगा।