कासगंज। हिंसा की आग सातवें दिन शहर में सामान्य हो गई लेकिन इसका दर्द अभी भी लोगों के दिलों में है। इसका नजारा तब सामने आया जब एसडीएम सदर ने शांति समिति की बैठक ली। बैठक के दौरान समुदाय विशेष की महिलाओं ने अधिकारियों के सामने फफक फफक कर अपना दुखड़ा बयां किया और अपने बच्चों को बेगुनाह होने के बावजूद जेल भेजने का आरोप लगाया।
शांति समिति की बैठक में रो पड़ी महिला
भले ही कासगंज में 26 जनवरी को भड़की हिंसा सातवें दिन शांत हो गई और बाजार भी पूरी तरह से खुल गए हों, लेकिन हिंसा के जख्म आज भी भरे हैं। बुधवार को सदर एडीएम राकेश कुमार ने शहर के नवाब मोहल्ला इलाके में दोनों समुदाय के लोगों के बीच शांति समिति की बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में कुछ महिलाएं भी पहुंची। एसडीएम अधिकारियों ने शहर में शांति व्यवस्था बनाये रखने का आह्वान कर रहे थे इसी बीच अधिकारियों के सामने बानों बेगम नाम की महिला फफक फफक कर रोने लगी।
गलत तरीके से बेटे को फंसाने का आरोप
महिला बानो बेगम का कहना था कि मेरा बेटा मोहसिन मस्जिद में नमाज पढ़ रहा था, पुलिस उसे उठा ले गई और थाने में ले जाकर तमंचा और बंदूक लगाकर जेल भेज दिया, जबकि महिला का बेटा बेकसूर है। उसे जेल में भी मारा पीटा जा रहा है।महिला ने उच्चधिकारियों से निष्पक्ष जांच पड़ताल कराकर बेटा को रिहा कराने की मांग उठाई।