
कासगंज। आयोध्या में विवादित ढांचा ढहाये जाने की बरसी पर जनपद में पूरी तरह से शांति रही। वहीं हिन्दूवादी संगठनों द्वारा शौर्य दिवस व मुस्लिम संगठनों द्वारा काला दिवस मनाया मनाया गया। जबकि किसी भी सम्भावित टकराव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बदोबस्त किए थे।
यह भी पढ़ें- बोर्ड परीक्षा में नहीं होगी नकल: हृदय नारायण दीक्षित
विदित हो कि बीते 25 वर्ष पूर्व छह दिसम्बर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे को ढहा दिया गया। मुस्लिम संगठन जहां एक ओर इस ढांचे को बाबरी मस्जिद बताते हैं, वहीं हिन्दू संगठन इसे हिन्दू समाज की आस्था का प्रतीक यानि भगवान श्रीराम का जन्म स्थल मनाते हैं। इस विवाद की शुरूआत वर्ष 1949 में हुई थी। उसके बाद विवाद बढ़ने पर इस स्थल पर प्रशासन द्वारा ताला लगा दिया गया, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने इस स्थल से ताला खुलवाया और तभी से यहां पर भगवान राम की विधिवत पूजा अर्चना की जाती रही। बाद में भारतीय जनता पार्टी द्वारा विवादित ढांचे को ढहाकर भव्य राममंदिर बनाने को लेकर रथयात्रा निकाली गई। बाद में रथ यात्रा का नेतृत्व कर रहे देश के पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण अणवाणी को बिहार सरकार ने गिरफ्तार कर लिया और उसके बाद राममंदिर का आंदोलन उग्र होता गया।
1992 में ढहाया गया था ढांचा
इसी के चलते छह दिसम्बर 1992 को अयोध्या में मौजूद राम भक्त कारसेवकों द्वारा विवादित ढांचे को ढहा दिया गया। जिसमें कई लोगों को अपनी जान भी गवानी पड़ी। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित देश में भाजपा शासित सरकारों को बर्खास्त भी कर दिया गया। तभी से हिन्दूवादी संगठन छह दिसम्बर को शौर्य दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं, तो वहीं मुस्लिम संगठन इस दिन को विरोध दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं।
Published on:
06 Dec 2017 07:17 pm
बड़ी खबरें
View Allकासगंज
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
