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कासगंज हिंसा की कहानी जुड़ी है इस मंदिर से, जानिए क्या है इतिहास

कासगंज में ठंडी सड़क पर प्रसिद्ध चामुंडा मंदिर है। मान्यता है यहां स्वंय देवी मां प्रकट हुईं थीं।

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UP Kasganj Violence

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कासगंज। उत्तर प्रदेश का कासगंज 26 जनवरी को हिंसा की आग से जल उठा। इस विवाद की जड़ क्या है। पता किया गया, तो मामला यहां के प्रचीन चामुंडा देवी मंदिर के गेट को लेकर भी सामने आया। कासगंज और आस पास के लोगों की प्रमुख आस्था का केन्द्र बने इस मंदिर के मुख्य प्रवेश पर गेट लगवाना है। उसे लेकर विवाद काफी समय से चला आ रहा है। पिछले दिनों इस विवाद ने उग्र रूप धारण भी किया, लेकिन मामला पुलिस की सतर्कता की वजह से शांत हो गया।

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ये है मंदिर का इतिहास
चामुंडा देवी मंदिर के सेवादार सुनील कुमार ने बताया कि ये चामुंडा देवी का ये मंदिर प्राचीन है। यहां पीपल की जड़ में देवी मां स्वंय प्रकट हुई। कासगंज के एक व्यक्ति को सपना दिया था, जिसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया गया था। यहां भव्य मंदिर बना हुआ है। हर वर्ष नवरात्र में यहां मेला लगता है। हजारों श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना और माता के दर्शन के लिए आते हैं। मान्यता ये है कि चामुंडा माता से जो भी सच्चे मन से मांगो, प्राप्त होता है, यही कारण है कि इस मंदिर की मान्यता दिन व दिन बढ़ती जा रही है।

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ये है विवाद की कहानी
ठंडी सड़क पर प्रसिद्ध चामुंडा मंदिर है। इसके द्वार पर गेट लगवाया जा रहा था। आसपास के संप्रदाय विशेष के लोगों ने विरोध कर दिया। गेट लगाने का विरोध में धरना दिया। पत्रकार अशोक कुमार का कहना है कि गेट इसलिए लगाया जा रहा था ताकि वाहन और पशु प्रवेश न करें। पशुओं के प्रवेश से श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। इस घटना का तिरंगा यात्रा का कोई संबंध नहीं होना चाहिए, लेकिन कुछ लोग जोड़कर देख रहे हैं। इसके विपरीत एबीवीपी के संगठन मंत्री सुनील वार्ष्णेय कहते हैं कि चामुंडा मंदिर पर गेट लगाने के विवाद का गुस्सा तिरंगा यात्रा पर निकाला गया। ये सुनियोजित साजिश थी।

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