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कटनी. मंगलवार दोपहर पैथोलॉजी संचालकों में उस समय हडक़ंप मच गया जब प्रशासन, स्वास्थ्य व नगर निगम की टीम ने छापेमार कार्रवाई की। कलेक्टर के आदेश पर एसडीएम द्वारा गठित की गई टीम ने चार पैथोलॉजी लैब की जांच की। तहसीलदार आशीष अग्रवाल के नेतृत्व में टीमों ने जांच की। जांच के दौरान तीन लैब में खामियां सामने आईं। मौके पर पैथोलॉजिस्ट ही नहीं पाए गए। यहां पर संचालक या फिर लैब टैक्नीशियन ब्लड सेम्पल लेकर मशीनों में तरह-तरह की जांच करते पाए गए। तीन सेंटर में जांच हो रहीं थीं, लेकिन एक सेंटर में जांच होना नहीं पाया गया। नियम के अनुसार पैथोलॉजी में जांच व रिपोर्ट एमडी पैथोलॉजिस्ट के सुपरवीजन में होनी है व हस्ताक्षर से रिपोर्ट जारी होना है, बायो मेडिकल वेस्ट का पंजीकरण हो, बायोमेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निराकरण हो, पंजीयन हो तभी संचालन किया जा सकता है, इन मानकों का पालन हो रहा है कि नहीं इसके लिए सभी लैब की जांच कर दोनों टीमों को रिपोर्ट तीन दिवस में सौंपना है।
पहली टीम ने मंगलवार को चार पैथोलॉजी की जांच की, जहां पर तीन में पैथोलॉजिस्ट नहीं मिले। सबसे पहले टीम नेमा पैथोलॉजी कोतवाली के सामने पहुंची, तो पैथोलॉजिस्ट नहीं थे, यहां यहां पर एक दिन पहले की 13 जांच मिलीं, 2 सितंबर को कोई जांच नहीं पाई गई। मौके पर पैथोलॉजिस्ट नहीं थे बताया गया कि वे बाहर गए हैं। इसके बाद टीम मां जालपा पैथॉलोली आदर्श कॉलोनी मोड़ में जांच करने पहुंची तो पैथालॉजी में पांच लोगों के ब्लड सेम्पल यहां के कर्मचारियों द्वारा लिए गए थे। यहां पर भी पैथोलॉजिस्ट नहीं थे। टीम ने पूछा कि पैथोलॉजिस्ट कहा है तो बताया गया कि नहीं आए। टीम ने मैथिली पैथोलॉजी में जांच की तो यहां भी पैथोलॉजिस्ट नहीं थे। संचालक द्वारा यहां पर रक्त समूहों की जांच की जा रही थी। इसके बाद टीम ने बालाजी पैथोलॉजी में टीम ने जांच की, जहां पर सबकुछ सही मिला।
कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम प्रमोद चतुर्वेदी द्वारा गठित की गई टीम ने जांच नहीं की। बताया जा रहा है कि नायब तहसीलदार बाहर थे व डॉक्टर भी अवकाश थे, जिस कारण से जांच नहीं हो पाई। बता दें कि जांच टीम 1 सितंबर को गठित की गई है। टीमों को सभी लैबों की जांच कर तीन दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करना है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि टीम गठन के दो दिन बीत गए और टीम ने जांच ही नहीं की।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में तय मानकों के अनुसार कुल 18 पैथोलॉजी का पंजीयन है जो नियमों व मानकों पर खरा उतरती हैं। सूत्रों की मानें तो शहर में 30 से अधिक पैथोलॉजी लैबों का संचालन हो रहा है। कई में पैथोलॉजिस्ट नहीं है तो कहीं पर अनट्रेंड स्टॉफ जांच कर रही है। लैब टैक्नीशियन जिनको को सिर्फ सेम्पल एकत्रित करना है वे बकायदा जांच रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। फिर डिजिटल साइन से पैथोलॉजिस्ट के नाम से लोगों को रिपोर्टें थमाई जा रही हैं। कई केंद्रों में पैथोलॉजिस्ट ही नहीं हैं।
बता दें कि प्रशासन द्वारा यह जांच कटनी पैथोलॉजी एसोसिएशन द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कलेक्टर को शिकायत कर नियमों के विपरीत चल रहीं पैथोलॉजी की जांच कराए जाने मांग की थी। बताया था कि कई सेंटरों में अन्ट्रेंड कर्मचारी रिपोर्ट बना रहे हैं। पैथोलॉजिस्ट का नाम तो लिखा है, लेकिन वे मौजूद नहीं रहते, जिसके बाद प्रशासन ने एक बार फिर जांच शुरू कराई है। उल्लेखनीय है कि एक पैथोलॉजिस्ट सिर्फ दो ही सेंटर चला सकता है, योग्य पैथोलॉजिस्ट के अलावा कोई जांच नहीं कर सकता।
पैथोलॉजी की जांच के लिए एसडीएम के द्वारा दो दल गठित किए गए हैं। पहले दल में तहसीलदार नगर आशीष अग्रवाल, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. समीर सिंघई, विधि अधिकारी नगर निगम वरुणेश मिश्रा शामिल हैं व दूसरे दल में नायब तहसीलदार कटनी-पहाड़ी अतुलेश सिंह, हड्डी रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल डॉ. राजेंद्र सिंह ठाकुर, राजस्व अधिकारी नगर निगम शामिल हैं।
वर्जन
पैथोलॉजी लैबों की जांच कराई जा रही है। जो अनाधिकृत रूप से लैब चल रही हैं, उनकी जांच के लिए कलेक्टर के निर्देश पर टीम गठित की गई है। टीम में सीएमएचओ, एसडीएम व नगर निगम आयुक्त शामिल हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार नियमों का पालन न पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई कराई है।
प्रमोद चतुर्वेदी, एसडीएम।
Published on:
03 Sept 2025 08:59 pm
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