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क्रेशर प्लांट में उड़ रहे धूल के गुबार से सांस लेना हो रहा दूभर, आवागमन में होती है परेशानी

मनमाने तरीके से क्रेशरों के संचालन में जनजीवन बेहाल, बीमारी की चपेट में आ रहे स्थानीय लोग, प्रदूषण, खनिज व जिला प्रशासन नहीं दे रहे ध्यान

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कटनी

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Balmeek Pandey

Apr 17, 2021

क्रेशर प्लांट में उड़ रहे धूल के गुबार से सांस लेना हो रहा दूभर, आवागमन में होती है परेशानी

क्रेशर प्लांट में उड़ रहे धूल के गुबार से सांस लेना हो रहा दूभर, आवागमन में होती है परेशानी

कटनी. विजयराघवगढ़ क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक स्टोन क्रेशर प्लांट संचालित हैं। इन प्लांटों में सरकार के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रहीं हैं। इनकी मनमानी पर रोक लगाने वाले अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। क्रेशर प्लांट संचालन के लिए सरकार के नियम निर्धारित है लेकिन नियम का पालन नहीं किया जाता। बता दें कि विजयराघवगढ़ तहसील क्षेत्र के नन्हवारा ग्राम में कैमोर झुकेही मार्ग से मात्र सौ मीटर की दूरी पर लगा यह क्रेशर प्लांट वहां बसी बस्ती के लोगों के लिए बीमारी की देन बना है। प्रदूषण विभाग के नियमों को ताक पर रखकर प्लांअ चल रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि इस क्रेशर प्लांट में न तो बाउंड्रीवाल है और नाही पेड़-पौधे, पानी का छिड़काव भी नहीं होता। फिर भी यह क्रेशर नियमों को ताक पर रखकर अफसरों के आशीर्वाद से चल रहा है। इसी क्रेशर के पास गौ शाला भी बनी हुई है। प्रदूषण इतना कि रोड से निकलने वाले वाहन तक नहीं दिखते। दोपहिरया वाहन चालक व राहगीर धूल के कड़ आंख में आने से कई बार भिड़ भिड़ जाते हैं। वहीं पास में बस्ती के लोग क्रेशन के प्रदूषण से त्रस्त हो चुके हैं, लेकिन क्रेशर संचालक अपनी मनमानी पर उतारू है।
क्रेशर प्लांट से उड़ेने वाली धूल डस्ट से आसपास रहने वाले ग्रामीणों को प्रदूषण से बचाने का कोई इंतजाम नही किया जा रहा। बता दें कि क्रेशर संचालको द्वारा लाइसेंस लेने के लिए नियम का पालन करने की लिखित अनुमति दी जाती है, इसके बावजूद नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। तहसील क्षेत्र के रसूखदारों के आधा दर्जन क्रेशर प्लांट संचालित हैं। कई संचालक शासन की ओर से निर्धारित मानकों का पालन नहीं करते हैं, जिसकी सजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। ग्रामीणों ने क्रेशर से उड़ रही धूल को बंद कराने प्रशासन से मांग की है।

ग्रामीणों को सिलिकोसस का खतरा
क्रेशर प्लांट तीन से चार किमी के आवासीय क्षेत्र को प्रभावित करता है। पत्थर खदानों में काम करने वाले मजदूर और आसपास रहने वाले लोगों में शत प्रतिशत सिलिकोसिस होने की संभावना रहती है। इसके अलावा ये करीब एक किमी क्षेत्र की खेती को भी गंभीर रूप से नष्ट करते हैं। इनके आसपास की जमीन बंजर हो जाती है नियमानुसार मशीनों को कबर्ड करने के साथ पानी का छिड़काव नही किया जाता जिससे किसानों की जमीन बंजर हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि क्रेशर प्लांट के कारण आसपास क्षेत्र में हमेशा 24 घंटे धूल उड़ती है। ग्रामीणों ने कहा कि खजिन, प्रदूषण, स्थानीय प्रशासन को निगरानी रखना चाहिए, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा।

इनका कहना है
यदि के्रेशर संचालन में नियमों का पालन नहीं किया जाता तो तत्काल इसकी जांच कराएंगे। मनमानी पर संचालक के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई होगी। क्षेत्र के हर क्रेशर संचालक व अन्य कारोबारियों को मानकों का पालन करना होगा।
जितेंद्र पटेल, तहसीलदार, विजयराघवगढ़।