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सरकार बदलते ही 14 साल से चल रही बॉक्साइट खदान बंद हुई तो उठे सवाल

खदान संचालन के दौरान पर्यावरण और खनिज विभाग की भूमिका भी रही सवालों में

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सरकार बदलते ही 14 साल से चल रही बॉक्साइट खदान बंद हुई तो उठे सवाल

Bauxite mine stopped after 14 years of changing government

राघवेंद्र चतुर्वेदी@कटनी. शहर में आबादी के समीप मेसर्स लक्ष्मीदास रामजी बाक्साइड माइंस एक-दो साल नहीं पूरे 14 साल से पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर चलती रही। इस दौरान बाक्साइड खदान से होने वाले खनन से पर्यावरण को नुकसान का ऑकलन पर्यावरण विभाग ने नहीं किया।
इतना ही नहीं नियमों तो ताक पर रखकर बाक्साइड खदान संचालन के लिए एनओसी दे दी। खासबात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 2005 से सभी खदानों को पर्यावरण प्रभाव ऑकलन (सिया) की एनओसी लेना अनिवार्य किया गया है। इसके बाद खदान संचालन के लिए गिट्टी पत्थर की छोटी-छोटी खदानों के लिए सिया से एनओसी अनिवार्य किया गया, लेकिन कई हेक्टेयर में संचालित बाक्साइड खदान संचालक के पास सिया की एनओसी किसी ने नहीं पूछा।
इधर इन 14 साल के दौरान पर्यावरण विभाग की सामान्य एनओसी के आधार पर खनिज विभाग ने खदान संचालन रोक नहीं लगाई। चार माह पहले प्रदेश में सरकार बदलते ही पर्यावरण विभाग भोपाल के कार्यपालन यंत्री बृजेश शर्मा ने खनिज विभाग कटनी को पत्र जारी किया बाक्साइड खदान के लिए सिया की एनओसी होना जरुरी करार दिया और इस पत्र के बाद खनिज विभाग ने खदान का संचालन बंद करवा दिया। इसमें बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो कार्रवाई 14 साल के दौरान के दौरान नहीं हुई सरकार बदलते ही दोनों विभाग ने अचानक कैसे कर दिया।
शहर से लगे राजस्व ग्राम टिकुरी में मेसर्स लक्ष्मीदास रामजी बाक्साइड माइंस का रकबा 39.31 हेक्टेयर है। एक लाख टीपीए क्षमता वाली इस खदान के संचालन से होने वाले नुकसान का आकलन करने के लिए पर्यावरण विभाग ने लोकसुनवाई की तारीख 6 मार्च तय की थी। पर्यावरण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह तारीख भी अब बदल दी गई है।
इस पूरे मामले में खनिज विभाग के उपसंचालक दीपमाला तिवारी का कहना है कि बाक्साइड खदान का संचालन हमने प्रदूषण विभाग की एनओसी के आधार पर नहीं रोका। कार्यपालन यंत्री भोपाल बृजेश शर्मा का चार माह पहले पत्र आने के बाद दूसरी पार्टी को कलेक्टर कोर्ट में सुना गया। इसके बाद खदान बंद करवा दिया गया।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के एचके तिवारी का कहना है कि मेसर्स लक्ष्मीदास रामजी बाक्साइड को पर्यावरण एनओसी के संबंध में आइडिया नहीं है। 6 मार्च की लोकसुनवाई की तारीख बदल गई है, और ज्यादा जानकारी नहीं है।