15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

व्यापारियों ने कहा, केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों ने बढ़ाई परेशानी

लगातार चार दिन से कृषि उपज मंडी में नीलामी में शामिल नहीं हुए व्यापारी तो मंडी सचिव ने जारी किया नोटिस. - करोड़ों रुपये का लेन-देन प्रभावित, केंद्र सरकार के निर्देश और राज्य सरकार के सकुर्लर से परेशान हैं व्यापारी.

2 min read
Google source verification
Silence in the mandi premises due to traders not being involved in the auction

नीलामी में व्यापारियों के शामिल नहीं होने से मंडी परिसर में सन्नाटा

कटनी. कृषि उपज मंडी में किसानों से अनाज खरीदने के दौरान भुगतान और एनओसी को लेकर होने वाली परेशानी के बाद मंडी में व्यापारियों ने बोली में शामिल होना बंद कर दिया है। व्यापारियों की हड़ताल 3 सितंबर से जारी है। इस सिलसिले में मंडी सचिव ने लाइसेंसी व्यापारियों को नोटिस जारी कर नीलामी में शामिल होने की बात कही है।

मंडी सचिव ने कहा है कि व्यापारी आगामी कार्यदिवस में नीलामी में शामिल नहीं होंगे तो कार्यवाही प्रस्तावित की जाएगी। कृषि उपज मंडी में व्यापार करने वाले तीन सितंबर से नीलामी में शामिल नहीं हो रहे हैं। यहां प्रतिदिन औसतन 20 करोड़ का करोबार होता है। ऐसे में व्यापारियों के शामिल नहीं होने से करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।

व्यापारियों का कहना है कि केंद्र सरकार के निर्देश और राज्य सरकार के सर्कुलर के कारण मंडी में व्यापार करना मुश्किल हो रहा है। इसी के विरोध में व्यापारियों ने मंडी में लेन-देन बंद किया है। व्यापारियों ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश हैं कि एक करोड़ रुपये नकद निकासी पर 2 प्रतिशत टीडीएस कटेगा। कटनी में एक व्यापारी की ही बात करें तो दो से तीन सौ क्विंटल अनाज 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर पर ही 12 लाख रुपये का हो जाएगा और दस दिन में लिमिट एक करोड़ से पार। व्यापारियों का कहना है कि एक ओर राज्य सरकार ने पहले किसानों को दो लाख रुपये तक नकद दिए जाने की बात कही थी।

किसानों को यही बात पता है और वे अनाज नीलामी के बाद राशि नकद मांगते हैं। जाहिर ऐसे में व्यापारी किसानों को नकद राशि देने के लिए बैंक से नकद निकासी करने विवश होंगे। दूसरी परेशानी यह है कि मंडी में बोली के बाद किसान के खाते में एनइएफटी या आरटीजीएस भी करना होता है। व्यापारी शाम को बोली के बाद किसानों के खाते में राशि ट्रांसफर करने गया तो कभी इंटरनेट की समस्या तो कभी एनइएफटी व आरटीजीएस में राशि ट्रांसफर करने में बैंक सर्वर की परेशानी सामने आती है।

किसानों को राशि ट्रांसफर होने के बाद ही यूटीआर जारी होगा। यूटीआर को मंडी को पोर्टल में फीड करवाने के बाद एनओसी जारी होता है। प्रक्रिया में विलंब होने से व्यापारी का लाखों का माल मंडी में बिना सुरक्षा के ही पड़ा रहता है। प्रक्रिया से परेशान व्यापारियों ने मांग की है कि सरकार उनकी समस्या का समाधान करे।

लघु उद्योग भारती के संभागीय अध्यक्ष अरुण सोनी का कहना है कि अस्सी प्रतिशत व्यापारियों ने विरोध में लेन-देन नहीं किया है। जब तक सरकार बीच का रास्ता नहीं निकालती व्यापारी और किसान दोनों परेशान होंगे। हम किसान को चेक देने तैयार हैं। इसे मान्य किया जाए।

मंडी सचिव पीयूष शर्मा ने बताया कि व्यापारियों के नीलामी में शामिल नहीं होने से किसानों को परेशानी हो रही है। नोटिस जारी किया गया है। आगामी कार्यदिवस में व्यापारी शामिल नहीं हुए तो ठोस कार्रवाई की जाएगी।