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देश की सबसे लंबी जल सुरंग का 85% कार्य पूरा, 6 जिलों के 1450 गांवों में 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित

मुख्यमंत्री ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की बैठक में की परियोजना की समीक्षा, कहा- कटनी की स्लीमनाबाद टनल अंतिम चरण में, प्रदेश को मिलेगा सिंचाई का बड़ा तोहफा

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कटनी

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Balmeek Pandey

Mar 31, 2026

Chief Minister reviews NVDA

Chief Minister reviews NVDA

कटनी. जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में बन रही देश की सबसे लंबी जल सुरंग अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। लगभग 11.952 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का करीब 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और शेष कार्य तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की बैठक में इसकी समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि परियोजना को शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश के किसानों को इसका लाभ दिलाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई विस्तार से जुड़ी सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए और प्रशासनिक व वित्तीय अड़चनों को तत्काल दूर किया जाए। यह परियोजना प्रदेश की जीवन रेखा साबित होगी। बिना पंप के प्राकृतिक प्रवाह से नर्मदा जल को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने वाली यह टनल तकनीकी दृष्टि से भी एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और सतत निगरानी के चलते यह कार्य तेजी से पूरा हो रहा है।
जानकारी के अनुसार स्लीमनाबाद टनल बरगी व्यपवर्तन परियोजना का अहम हिस्सा है, जिसकी स्वीकृति वर्ष 2008 में दी गई थी। प्रारंभिक लक्ष्य 2011 तक कार्य पूर्ण करने का था, लेकिन क्षेत्र की जटिल भूगर्भीय संरचना के कारण परियोजना में लगातार बाधाएं आती रहीं। स्लीमनाबाद क्षेत्र में 8 से 10 मीटर खुदाई पर ही पानी निकलने लगता है, जबकि टनल की खुदाई करीब 30 मीटर गहराई में की जा रही है। इसके साथ ही सिंकहोल यानी अचानक जमीन धंसने की समस्या और कोविड-19 महामारी के दौरान काम प्रभावित होने से निर्माण कार्य की गति धीमी रही। हालांकि, वर्ष 2021 के बाद से कार्य में तेजी आई और पिछले दो वर्षों में अधिकांश बाधाओं को दूर करते हुए निर्माण को अंतिम चरण तक पहुंचाया गया है। वर्तमान में टनल का लगभग 400 मीटर हिस्सा शेष है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद परियोजना के उद्घाटन की तैयारी की जाएगी।

अत्याधिक मशीनों से हो रही है खुदाई

टनल निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) के जरिए खुदाई की जा रही है, जिसमें एक कटर हेड में 56 कटर लगे होते हैं। कठोर चट्टानों के कारण बार-बार कटर टूटते हैं, जिससे लागत में वृद्धि होती है। अनुमान के अनुसार एक से डेढ़ मीटर खुदाई में ही 5 से 6 कटर टूट जाते हैं, जिससे लाखों रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है। इसके बावजूद कार्य लगातार जारी रखा गया। सुरक्षा के लिहाज से टनल के ऊपर 20 मीटर चौड़ी जमीन पट्टी को अस्थायी रूप से अधिग्रहित किया गया है। प्रभावित किसानों को तीन फसलों के बराबर मुआवजा देकर कार्य कराया जा रहा है। जहां भी जमीन धंसने की आशंका होती है, वहां तुरंत भराव कर स्थिति नियंत्रित की जाती है।

विंध्य पर्वत श्रंखला की रिज लाइन को किया पार

इस निर्माण कार्य में नर्मदा और सोन कछार को विभक्त करने वाली विंध्य पर्वत श्रंखला की रिज लाइन को पार करना, दुष्कर कार्य था। उच्च भूजल स्तर जैसी चुनौतियों भी सामने थीं, जो स्लीमनाबाद टनल के निर्माण से दूर करने की पहल की गई। यह टनल प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा की तरह एक किस्म की धडकऩ होगी, जो देश की सबसे लम्बी जल सुरंग भी है। कुल 11.952 किमी लंबाई और 2 किमी व्यास की यह विशाल तरंग नर्मदा जल को बिना पंप की सहायता से प्राकृतिक प्रवाह के रूप में बहाते हुए विशाल क्षेत्र को लाभान्वित करने का माध्यम बनेगी।

फैक्ट फाइल: किसे कितना लाभ

कुल लक्ष्य: 2.45 लाख हेक्टेयर
जबलपुर: 60,000 हेक्टेयर
कटनी: 21,823 हेक्टेयर
सतना: 1,59,655 हेक्टेयर
रीवा: 3,532 हेक्टेयर

जबलपुर से रीवा पहुंचेगा पानी

इस परियोजना के पूर्ण होने पर नर्मदा नदी का पानी जबलपुर के बरगी बांध से सीधे रीवा तक पहुंचाया जाएगा। इससे कटनी, जबलपुर, सतना, मैहर, पन्ना और रीवा जिलों के लगभग 1450 गांवों की 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। साथ ही करीब 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई विस्तार से हरियाली बढ़ेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।