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12 दिन में 40 हजार बच्चों की हुई स्क्रीनिंग, 1300 से अधिक बच्चे मिले गंभीर बीमारियों से ग्रसित

- स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग सहित जिला प्रशासन द्वारा कुपोषण को मिटाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कटनी जिले में सभी नाकाफी साबित हो रहे हैं। - प्रॉपर मॉनीटरिंग न होने व योजनाओं का ठीक से क्रियान्वयन के अभाव के चलते जिले से कुपोषण का कलंक नहीं मिट रहा। - हाल ही में विभाग द्वारा दस्तक अभियान शुरू किया गया है, जिसमें एक बार फिर व्यवस्थाओं की पोल खुलकर सामने आ गई है। नौनिहालों को न सिर्फ कुपोषण जकड़े हुए है बल्कि गंभीर बीमारियों से ग्रसित मिल रहे हैं।

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jun 23, 2019

Children suffering from malnutrition in Katni district

Children suffering from malnutrition in Katni district

कटनी. स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग सहित जिला प्रशासन द्वारा कुपोषण को मिटाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कटनी जिले में सभी नाकाफी साबित हो रहे हैं। प्रॉपर मॉनीटरिंग न होने व योजनाओं का ठीक से क्रियान्वयन के अभाव के चलते जिले से कुपोषण का कलंक नहीं मिट रहा। हाल ही में विभाग द्वारा दस्तक अभियान शुरू किया गया है, जिसमें एक बार फिर व्यवस्थाओं की पोल खुलकर सामने आ गई है। नौनिहालों को न सिर्फ कुपोषण जकड़े हुए है बल्कि गंभीर बीमारियों से ग्रसित मिल रहे हैं। 10 जून से शुरू हुए दस्कत अभियान से जिले में नौनिहालों की स्थिति सामने आ रही है। 21 जून तक हुई बच्चों की स्क्रीनिंग में आंकड़े चौकाने वाले हैं। जिले के 8 सेक्टरों में 166 दस्तक दलों द्वारा अबतक गांवों की नब्ज टटोली गई है। इसमें 5 वर्ष तक क 39 हजार 916 बच्चों की स्क्रीनिंग अबतक हुई है। इसमें 1306 बच्चे ऐसी हालत में मिले हैं जो किसी ने किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं और उन्हें तत्काल उपचार की जरुरत है। दलों द्वारा ऐसे बच्चों को समीपी स्वास्थ्य केंद्र व जिला अस्पताल रैफर किया गया है।

307 एनीमिया से ग्रसित
जिले में बच्चे सिर्फ कुपोषण से ही नहीं एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जंग लड़ रहे हैं। 307 बच्चे गंभीर एनीमिया से ग्रसित पाए गए हैं। 57 बच्चों को सेप्सिस की समस्या पाई गई है। 271 बच्चे जांच के दौरान ऐसे मिले हैं, जो गंभीर कुपोषण के शिकार हैं, जिन्हें तत्काल एनआरसी में रैफर किया गया है। 87 बच्चे जन्मजात विकृति से युक्त मिले हैं, जिनके उपचार के लिए पहल की जाएगी। सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चों की संख्या बहोरीबंद में 73, 69 विजयराघवगढ़ ब्लॉक में है। बहोरीबंद, कन्हवारा, ढीमरखेड़ा व विगढ़ भी संक्रमण का शिकार बच्चे अधिक हैं।

खास-खास
- बहोरीबंद, कन्हवारा और विजयराघवगढ़ के बच्चों में एनीमिया ज्यादा।
- जिले में दस्तक के लिए एक लाख 4 हजार 630 बच्चे हुए हैं डिजिटाइज्ड।
- 949 गांव का हुआ है जिडिटाजेशन, 6388 बच्चों के लिए हुई काउंसलिंग।
- अभियान में 16 हजार से अधिक बच्चों को वितरित की गईं आवश्यक दवाएं।

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इनका कहना है
जिले में दस्तक अभियान चल रहा है। कुछ लोग लापरवाही कर रहे थे, जिन्हें सख्त हिदायत दी गई है। अभियान के माध्यम से बच्चों को चिन्हित कर एनआरसी सहित अन्य माध्यमों से उपचार कराकर स्वस्थ करने प्रयास किया जा रहा है।
घनश्याम मिश्रा, डीपीएम।