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कोरोना संक्रमित हुईं, गंभीर बीमार पड़ीं और स्वस्थ होते ही सेवा में जुट गईं

कोरोना संक्रमण का डर न बीमार होने की चिंता, 13 माह में 5 हजार 58 महिलाओं का कराया सुरक्षित प्रसव. - अंतर्राष्ट्रीय नर्स डे पर बात जिला अस्पताल में सेवा की मिसाल बनीं 15 नर्सों की.

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Nurses became an example of service in district hospital.

जिला अस्पताल में सेवा की मिसाल बनीं नर्सें.

कटनी. कोरोना संक्रमित किसी पीडि़त को छूने में जब उनके अपने ही पीछे हट जाते हैं। तब जिला अस्पताल में सेवाएं दे रही नर्सें न सिर्फ उनकों समय-समय पर दवाएं देने से लेकर तकलीफ दूर करने में मदद करतीं हैं, बल्कि कोरोना संक्रमण की परवाह किए बिना हर पल सेवा में डटी रहती हैं।

सेवा की मिसाल बनीं इन नर्सों की मेहनत का ही परिणाम रहा कि मार्च 2020 से अप्रैल 2021 के बीच 13 माह में 5 हजार 58 महिलाओं का सुरक्षित प्रसव हुआ। बड़ी बात यह है कि इसमें 4 हजार 124 महिलाओं की नार्मल डिलेवरी हुई। 934 की स्थिति क्रिटिकल होने के बाद ऑपरेशन की जरूरत पड़ी।

जिला अस्पताल में सेवा की मिसाल बनीं नर्सें. IMAGE CREDIT:

अंतर्राष्ट्रीय नर्स डे पर बात कोरोना संक्रमण की परवाह नहीं करते हुए एक साल से ज्यादा समय से कोविड-19 वार्ड, प्रसुता वार्ड और दूसरे वार्ड में ड्यूटी करने वालीं नर्सों की। दुर्गा पटैल, पायल बिसेन, रश्मि जायसवाल, रागिनी शर्मा, नीतू वर्मा, मीनू पटेल, सरिता पिल्लै, किरण वर्मा, ज्योति लिल्हारे, महिमा यादव, राजीव बागरी, एंजेलिना हर्बट, अल्का पटेल, आलिब जार्ज व शोभना बेंजामिन बतातीं हैं कि अस्पताल में मरीज के आने के बाद उनके मन में कोविड संक्रमण की नहीं बल्कि चिंता इस बात की रहती है कि वे जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएं।

डॉ. सुनीता वर्मा के साथ नर्स दुर्गा पटेल. IMAGE CREDIT: Raghavendra

अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में कोविड-19 पॉजिटिव महिला का प्रसव के दौरान सुरक्षित ऑपरेशन करने वाली डॉ. सुनीता वर्मा के साथ नर्स दुर्गा पटेल बतातीं हैं कि 13 माह के दौरान ज्यादातर नर्स कोरोना से संक्रमित हुईं। दस दिन इलाज लेने के बाद वापस ड्यूटी में आ गईं। अस्पताल में क्षमता से कई गुना ज्यादा मरीज होने के बाद भी नर्सें ड्यूटी से पीछे कदम नहीं हटाती हैं। पूरी तन्मयता से सेवा में जुटीं रहती हैं।