
कटनी. जिले में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हर दिन औसतन दो से तीन लोग इस धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं, जिनमें ज्यादातर पढ़े-लिखे लोग शामिल हैं। ठग आधुनिक तकनीकों और लालच के जाल में फंसा कर भोले-भाले लोगों को निशाना बना रहे हैं। बैंक की गोपनीय जानकारी साझा करने से लेकर फर्जी एप डाउनलोड करने तक, लोग जाने-अनजाने अपनी जिंदगीभर की जमापूंजी ठगों के हाथों में सौंप रहे हैं। साइबर ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और इसका शिकार अधिकतर लोग अपनी जागरूकता की कमी के कारण हो रहे हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि लोग सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि के बारे में तुरंत संबंधित अधिकारियों को जानकारी दें। किसी भी अपरिचित व्यक्ति के झांसे में न आएं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पढ़े-लिखे लोग भी अनजाने में ठगों को अपनी गोपनीय जानकारी, जैसे एटीएम कार्ड नंबर, पिन कोड और ओटीपी, शेयर कर रहे हैं। कई लोग एप डाउनलोड करते समय दी गई अनुमति को समझे बिना स्वीकार कर लेते हैं, जिससे उनके खाते तक ठगों की पहुंच हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी के शिकार अधिकतर लोग लालच और जागरूकता की कमी के कारण होते हैं। ठगों के आकर्षक प्रस्तावों और योजनाओं के जाल में फंसकर वे अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठते हैं।
इस तरह की हो रही ठगी
शेयर बाजार में निवेश: ठग शेयर बाजार में रकम निवेश करने और कम समय में रकम दोगुनी करने का झांसा देकर लोगों को फंसा रहे हैं। ये लोग पहले निवेशकों का विश्वास जीतते हैं और फिर उनसे बड़ी रकम हड़प लेते हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ: ठग सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर भी ठगी कर रहे हैं। पीएम आवास, लाडली बहना, प्रसूति सहायता, छात्रवृत्ति, लॉटी आदि के नाम पर लोग विश्वास में आकर अपनी बैंकिंग डिटेल्स साझा कर रहे हैं, जिससे उनकी जमा पूंजी निकाल ली जा रही है।
सेक्सुअल एक्सटॉर्शन का ट्रेंड: अपराधी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को अश्लील सामग्री भेजकर ब्लैकमेल करते हैं। युवती बनकर बात करते हैं और फिर डरा-धमका कर लोगों से रुपए ऐठ रहे हैं। डर कारण लोग भी रुपए जाम कर रहे हैं। बदनामी के कारण किसीको नहीं बता पा रहे।
डिजिटल एरेस्ट नया तरीका: इसके अलावा कुछ मामलों में ठग डिजिटल एरेस्ट का डर दिखाकर भी लोगों से पैसे ऐंठ रहे हैं। किसी पार्सल के पकड़े जाने, घर के सदस्य का अपहरण, संगीन अपराध में पकड़ लिए जाने का डर दिखाकर ठगी कर रहे हैं।
फर्जी ट्रेडिंग एप्स और डाट. एपीके फाइल्स: ठग ट्रेडिंग ब्रांड्स के नाम पर नकली एप्स और एप डाउनलोड के माध्यम से लोगों को लुभाते हैं। जब लोग इन एप्स को डाउनलोड करते हैं, तो उनके मोबाइल से गोपनीय जानकारी चुराई जाती है, जिसे बाद में ठगी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
ये लोग हो गए ठगी का शिकार
वर्जन
यह बात सही है कि साइबर ठगी के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। लोग किसी भी अनजान स्ट्रेंजर कॉल आए व लिंक आए तो रिस्पांड नहीं करना चाहिये। फाइनेंसियल जानकारी ओटीपी, बैंक व एटीएम के आइडी, पासवार्ड शेयर न करें। लोग झांसे में न आएं और ना ली लालच करें। सरकार द्वारा जो पंजीकृत संस्थाए हैं व बेहतर हैं उन्हीं संस्था के माध्यम से रुपए लगाएं। डबल रुपए करने के लालच में न आएं, साइबर फ्रॉड होने पर 1930 नंबर पर तत्काल सूचना दें, ताकि इस सूचना के आधार पर सरकार की एजेंसी ट्रांजेक्शन को रोका जा सकता है। शुरुआती 30 मिनट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए तत्काल जानकारी दें।
अभिजीत रंजन, एसपी।
Published on:
20 Oct 2024 07:52 pm
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