
Death of dadda ji and complete life introduction
कटनी. बारडोली की धरा के छोटे से गांव कूड़ा मर्दानगढ़ में जन्मे करपात्री महाराज के शिष्य पं. देवप्रभाकर शास्त्री जिन्होंने सनातन धर्म की पताका लहराई। दद्दाजी के नाम से विख्यात संत ने 17 मई 2020 की रात में अंतिम सांस ली। बता दें कि दद्दाजी का स्वास्थ्य कई दिनों से खराब था। शनिवार की रात गंगाराम अस्पताल दिल्ली से एयर एंबुलेंस से जबलपुर लाया गया, वहां से कटनी स्थित दद्दाधाम निज निवास लाए गए। लंग्स व किडनी में समस्या के कारण दद्दाजी वेंटीलेंटर में थे। रविवार रात 8.27 बजे के बाद प्राण त्यागकर भरा-पूरा परिवार छोड़कर दद्दाजी का देवलोक गमन हो गया। बता दें कि कटनी सहित विश्वभर में दद्दाजी के 16 लाख अनुयाई हैं। उनके स्वास्थ्य बिगडऩे की जानकारी लगते ही शिष्य चिंता में पड़ गए थे। सभी परमेश्वर से चमत्कार करने की दुआ कर रहे थे, लेकिन दद्दाजी चिरकाल के लिए शांत हो गए। विश्व कल्याण की भावना को लेकर असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण, धर्म अनुष्ठान कराने वाले दद्दाजी के शांत होने से लाखों अनुयाइयों में शोक छा गया है। बता दें कि कूडऩ गांव में प्रारंभिक शिक्षा, कटनी में संस्कृत का ज्ञान और फिर बनरास में वेद-वेदांगों का अध्ययन करने के बाद दद्दाजी ने सनातन धर्म को आगे बढ़ाया। देश भर में 131 असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण व रुद्राभिषेक, यज्ञ और सैकड़ों तीन दिवसीय पार्थिव शिवलिंग निर्माण करा चुके हैं। इंदौर में जब 93वां आयोजन हुआ तो गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। इस दौरान मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान व कैलाश विजयर्गीय ने प्रमाणपत्र दद्दाजी को भेंट किया।
यह है दद्दाजी का परिचय
गृहस्थ संत पंडित देवप्रभाकर शास्त्री दद्दाजी का जन्म बहोरीबंद तहसील क्षेत्र के गांव कूड़ा मरदानगढ़ में पं. गिरधारीदत्त शास्त्री मां ललिता देवी के यहां बेटे के रूप में हुआ। दद्दाजी का कूड़ा गांव में घनश्याम बाग के नाम से आश्रम भी बना है, जहां पर अधिकांश दद्दाजी निवास करते थे। प्रारंभिक शिक्षा के बाद दद्दाजी जी ने व्याकरणचार्य, वेद वेदांगों का अध्ययन किया। नारायण संस्कृत महाविद्यालय कटनी से संस्कृत आदि की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद दद्दाजी वाराणसेय संस्कृत विश्व विद्यालय वाराणसी उप्र में भी वेद-वेदांगों का अध्ययन किया। महाविद्यालयों में प्राध्यापक रहकर अध्यापन कार्य कराया। युवा अवस्था से ही ज्ञान का प्रकाशपुंज फैलाने का काम दद्दाजी ने किया। दद्दाजी के तीन पुत्र, दो बेटियां, नाती-नातिनों ने भरा पूरा परिवार है। पत्नी जिज्जी 29 मार्च 2020 को ब्रम्हलीन हुई हैं। पुत्र डॉ. अनिल त्रिपाठी, डॉ. सुनील त्रिपाठी, नीरज त्रिपाठी, पुत्री शशिदेवी पांडेय, अनीता देवी पांडेय हैं।
खास-खास
-गुरजीकलां गांव में 1962 में पहली बार हुआ आयोजन, फागूराम बढ़ई ने कराई थी भागवत।
- देश और विशेष में तीन लाख से अधिक हैं दीक्षित शिष्य, 16 लाख से अधिक अनुयाई।
- दद्दाजी की खेती-किसानी में रही है विशेष रुचि, घनश्याम बाग में रहकर देखते थे खेती।
- धार्मिक आयोजनों में दद्दाजी किसी भी शिष्य से नहीं लेते थे राशि।
- बद्रीनाथ, अमरनाथ, रामेश्वरम, द्वारिकाधीश, गंगासागर, चित्रकूट, अयोध्या, पशुपतिनाथ, नर्मदा परिक्रमा कर चुके हैं दद्दाजी।
- 4 मई से 17 मई तक 1981 में 14 दिवस में कर चुके हैं नर्मदा परिक्रमा, 30 दिसंबर 2002 से 31 जनवरी 2003 तक की थी चारोधाम की यात्रा।
गुरु आदेश पर पर बने शिवशक्ति जागरण के प्रणेता
दद्दाजी ने परम विद्धान करपात्री महाराज से दीक्षा ली। गुरु आदेश को शिरोधार्य करते हुए दद्दाजी शिवशक्ति जागरण के वैश्विक प्रणेता बने। वैश्विक परिस्थिति से सामंजस्य के साथ लगातार सनातन धर्म की धर्मध्वजा को आगे बढ़ाते हुए सतत यज्ञ कार्य, असंख पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महारुद्राभिषेक सहित जनता-जनार्धर को धर्मउपदेश देकर सत्यपथ पर अग्रसर करने का बीड़ा अंतिम सांस तक उठाए रहे। विश्व कल्याण की भावना को लेकर कालों के काल महाकाल के अराधना की अलख जगाई।
मधुर वाणी और सहजता की प्रतिमूर्ति
दद्दाजी दयालु एवं प्रसंन्नचित स्वभाव, तपोनिष्ठ, सहज एवं सरल, सार्वभौमिक दृष्टि और समानता की नजर के प्रतिमूर्ति रहे। कथाओं व धर्मसंसद में धर्मउपदेश के माध्यम से बड़ी वाकपटुता से लोगों को उनकी कथनी और करनी एक जैसी रखने, माता-पिता की सेवा, सपने में भी पराया अहित न करने सहित धर्मपथ की शिक्षा जनजन को अंतिम सांस तक देते रहे।
शिवलिंग निर्माण और रुद्राभिषेक से सुर्खियों में
दद्दाजी शिवलिंग निर्माण और रुद्राभिषेक के आयोजन को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहे। बड़े-बड़े शहरों और महानगरों में दद्दाजी ने असंख पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं रुद्राभिषेक कराए। कटनी शहर से लेकर जबलपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन, इलाहाबाद, मुंबई, दिल्ली, शिरडी, बनारस, रामेश्वरम सहित अन्य महानगरों में 128 बार से ज्यादा असंख्य पार्थिक शिवलिंग निर्माण हुए हैं। इसके अलावा तीन दिवसीय पार्थिव शिविलंग निर्माण व यज्ञ का आयोजन कई बार हो चुके हैं।
कई हस्थियों के हैं गुरु
दद्दाजी के देश सहित विश्वभर में हजारों शिष्य और अनुयाई हैं। एक से बढ़कर हस्थियों को दद्दाजी का आशीर्वाद प्राप्त रहा है। दद्दाजी उनके गुरु हैं। दद्दाजी के शिष्यों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गोविंद सिंह राजपूत (खाद्य सहकारिता मंत्री मप्र शासन), कैलाश विजयवर्गी (राष्ट्रीय महामंत्री भाजपा), भूपेंद्र सिंह (विधायक व पूर्व गृह मंत्री), अर्चना चिटनिस (पूर्व शिक्षा मंत्री मप्र शासन), लखन घनघोरिया (विधायक व पूर्व मंत्री), गोपाल भार्गव (विधायक रहली व पूर्व मंत्री), आशुतोष राणा (फिल्म अभिनेता), राजपाल यादव (फिल्म अभिनेता), रमेश मेंदोला (विधायक इंदौर), राजेंद्र शुक्ला (विधायक व पूर्व मंत्री), छतरपुर विधायक आलोक चतुर्वेदी, महाराजपुर विधायक नीरज दीक्षित, बड़ा मलहरा विधायक प्रदुम्न सिंह लोधी, डग्गी राजा विधायक चंदेरी, राजेश शुक्ला विधायक विजावर, विधायक नारायण त्रिपाठी, विधायक संजय पाठक सहित लाखों शिष्य हैं।
आज अपरान्ह में होगा संस्कार
मीडिया प्रभारी संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि सभी शिष्य मंडल द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि दद्दाजी का अंतिम संस्कार दद्दाधाम में ही किया जाए। सोमवार दोपहर अंतिम दर्शन के बाद रीती-रिवाज से अंतिम संस्कार होगा। दद्दाजी के देवलोक गमन से जिलेवासियों सहित पूरे शिष्यों में शोक छा गया है। हर कोई दद्दाजी का स्वर्गवास होने को अपूरणीय क्षति बता रहे हैं। लाखों अनुयाइयों को गहरा आघात पहुंचा है।
Published on:
18 May 2020 06:01 am
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