शहर से गंदगी का दाग मिटना चाहिए। शायद इस सवाल पर हर कोई हामी ही भरेगा। लेकिन, यह दाग छिपाने व बेपरवाही से तो नहीं मिटेगा। इस दाग को धोने के नाम पर नगर निगम हर माह दो करोड़ रुपये ज्यादा बहा रहा है, लेकिन लाखों का बिल बनाने के बाद भी दाग मिट नहीं रहा। सवाल है कि इस शहर का दाग धोने का क्या कोई गंभीर प्रयास नहीं चल रहा या फिर लीपापोती की जा रही है। इन सवाल का जवाब तलाशते पत्रिका ने सोमवार को शहर के विभिन्न क्षेत्रों का जायजा लिया तो बहुत ही शर्मनाक तस्वीर दिखीं। यह है नगर निगम द्वारा शहर को साफ-सुथरा होने का दावा करने के बीच शहर के हालात बताती एक रिपोर्ट।
कटनी. शहर को साफ रखने के लिए 40 लाख रुपये से अधिक कचरा कलेक्शन के लिए नगर निगम एमएसडब्ल्यू को भुगतान कर रही है, 5 लाख 20 हजार रुपये एमएसडब्ल्यू की मॉनीटरिंग एजेंसी पर बहाए जा रहे हैं, 1 करोड़ रुपये स्वास्थ्य विभाग स्वच्छता दूतों व कर्मचारियों को दे रहा वेतन, 50 लाख रुपये के प्रसाधन, लाखों रुपये ओम साईं विजय को जो लोगों को जागरुक कर रही है, सफाई सामग्री सहित अन्य प्रयोजनों में दो करोड़ रुपये से अधिक हर माह फंूके जा रहे हैं, इसके बाद भी शहर साफ दिख रहा न लोग स्वच्छता को लेकर जागरुक हो पाए। दो दिनों से शहर में स्वच्छता टीम घूम रही है। शहर में कई जगह पर गंदगी है, स्वच्छता से जुड़े सवाल और सुविधाओं के बारे में शहरवासी अंजान है, ऐसे में स्वच्छता रैकिंग कैसे मिलेगी यह सबसे बड़ा सवाल है।

यह है शहर की हकीकत
सार्वजनिक स्थल बस स्टैंड में बजबाजा रही गंदगी
पत्रिका टीम सोमवार दोपहर शहर के प्रियदर्शनी बस स्टैंड पहुंची। यहां से प्रतिदिन ढाई सौ से अधिक बसों का परिचालन होता है। 15 हजार से अधिक लोग यात्रा करते हैं। इसके बाद भी यहां पर सफाई नगण्य मिली। जगह-जगह कचरा फैला मिला व गंदे पानी से दलदल व दुर्गंध का ही वातावरण रहा।

गीला व सूखा कचरा से अंजान शहरवासी
सोमवार की दोपहर पत्रिका टीम शहर के हृदय स्थल गोल बाजार पहुंची। यहां पर खुले में निस्तार करते लोग, बदबू भरा वातावरण व पूरे परिसर में गंदगी ही गंदगी नजर आई। लोगों ने गीला व सूखा कचरा के बारे में पूछा तो जवाब नहीं दे पाए। लोगों ने बताया कि यहां पर न तो डस्टबिन है और ना ही खुले में निस्तार पर रोक लग रही।

होटलों से डस्टविन ही गायब
शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण टीम होने के बाद भी कारोबारी स्वच्छता को लेकर बेपरवाह नजर आए। विश्राम बाबा मार्ग में संचालित एक होटल में दूर-दूरतक डस्टविन नजर नहीं आई। एक सीमेंट का कूड़ा मिला उसी में गीला व सूखा कचरा डालना बताया गया, लेकिन पूरा कचरा सड़क पर पड़ रहा। यह हालात शहर के अधिकांश प्रतिष्ठानों में दिखे।

निगम कर्मचारी भी नहीं जागरुक
नगर निगम स्वच्छता को लेकर कर्मचारियों को जागरुक करने का दावा कर रही है। इतना ही नहीं लाखों रुपये के बिल मास्क, लागबूट, ग्लब्स के लगे हैं इसके बाद भी कर्मचारी बगैर सुरक्षा उपकरणों के सफाई कर रहे हैं। ऐसे में उनमें संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। कर्मचारियों ने भी कहा कि कभी-कभार ही उन्हें मास्क मिलता है।
खास-खास:
– शहर के प्रमुख मार्गों को छोड़कर शेष गलियों में अटी हुई है गंदगी, बजबजा रही हैं नालियां, सफाई से नहीं नगर निगम को सरोकार।
– 5500 अंकों के लिए हो रहा है सर्वेक्षण, एक हजार अंक ओडीएफ, 1500 अंक सेवा स्तर के, 1500 अंक नागरिकता प्रतिक्रिया से होना हैं हासिल।
– नगर निगम की कचरा गाड़ी में नहीं है गीला और सूखा कचरा रखने का इंतजाम, एमएसडब्ल्यू भी 57 हजार घरों से मिक्स ले रही कचरा।
– शहर के दुकानों, होटलों, रेस्टारेंट में नहीं रखे गए हैं डस्टबिन, सड़कों पर फेंका जाता है कचरा, नगर निगम नहीं करती कार्रवाई।
– सुबह-शाम उपायुक्त अशफाक परवेज कुरैशी कर रहे सफाई की मॉनीटरिंग, फिर भी गंदगी से अटा पड़ा शहर।
इन सात सवालों का सर्वेक्षण टीम मांग रही जवाब
प्र. सवाल अंक
01 क्या आपका शहर एसएस 2020 में भाग ले रहा है 100
02 पड़ोस में स्वच्छता पर आप कितना अंक देंगे 200
03 सार्वजनिक व व्यवसायिक क्षेत्र में सफाई के क्या अंक देंगे 200
04 सूखा व गीला कचरा अलग-अलग देने कहा जाता है 200
05 शहर विभाजक को पौधों से आच्छादित किया है क्या 100
06 सार्वजनिक व सामुदायिक शौचालय में कितने अंक देंगे 200
07 शहर के ओडीएफ व कचरा मुक्त को जानते हैं 100
इनका कहना है
स्वच्छता टीम आई होगी तो अपना काम कर रही होगी। शहर में स्वच्छता को लेकर काम किया जा रहा है। लोगों को जागरुक करने का भी खूब प्रयास किया गया है। सूखा और गीला कचरा लोग अलग-अलग तो रखते हैं। फिर भी जहां कुछ कमी होगी उसे दूर किया जाएगा।
आरपी सिंह, आयुक्त नगर निगम।