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सेहत के लिए चिकित्सकों ने शुरू की खास पहल, तैयार कर रहे ऐसे फल व सब्जियां जो बीमारियों से रखेंगीं दूर

- 'सबसे पहले निरोगी काया' यह सूत्र शायद सभी लोग जानते हैं और हमेशा इसे चर्चा में भी रखते हैं, लेकिन इस सूत्र को आत्मसात करने में बहुत कम लोग फिक्रमंद हैं। जहरीली होती आवोहवा, असंतुलित खानपान, रासायनिक उर्वर व कीटनाशकों से तैयार हो खाद्य उत्पाद लोगों की जिंदगी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं। - ऐसे में अब जरुरी हो गया है कि लोग सेहत के लिए फिक्रमंद रहें। इसी दिशा में शहर के कुछ लोगों कदम बढ़ा चुके हैं। - शहर के दो चिकित्सक ऑर्गनिक किचिन गार्डन के माध्यम से सेहत के लिए कुछ बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। किचन गार्डन में सब्जी, फल सहित अन्य फसलें ले रहे हैं।

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jun 24, 2019

Doctors started organic farming in katni

Doctors started organic farming in katni

कटनी. 'सबसे पहले निरोगी काया' यह सूत्र शायद सभी लोग जानते हैं और हमेशा इसे चर्चा में भी रखते हैं, लेकिन इस सूत्र को आत्मसात करने में बहुत कम लोग फिक्रमंद हैं। जहरीली होती आवोहवा, असंतुलित खानपान, रासायनिक उर्वर व कीटनाशकों से तैयार हो खाद्य उत्पाद लोगों की जिंदगी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं। ऐसे में अब जरुरी हो गया है कि लोग सेहत के लिए फिक्रमंद रहें। इसी दिशा में शहर के कुछ लोगों कदम बढ़ा चुके हैं। शहर के दो चिकित्सक ऑर्गनिक किचिन गार्डन के माध्यम से सेहत के लिए कुछ बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। किचन गार्डन में सब्जी, फल सहित अन्य फसलें ले रहे हैं। यह संभव हो पा रहा है जिले के जैविक एक्सपर्ट रामसुख दुबे के माध्यम से। नैगवां जैविक कृषि पाठशाला के संचालक आरएस दुबे हर वर्ग के लोगों में जैविक कृषि का मंत्र फूंक रहे हैं। आरएस दुबे से जानकारी लेने के बाद पूर्व सेवानिवृत्त सीएमएचओ डॉ. अशोक चौदहा व डॉ. राजेंद्र गुप्ता जैविक बागवानी पर हाथ आजमा रहे हैं। इस पहल को लेकर चिकित्सक डॉ. चौदहा का कहना है कि जैविक उत्पाद को अन्य साथियों तक पहुंचाते हैं। सब्जी का स्वाद बाजार की सब्जियों से एकदम अलग है। उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा तो है ही साथ ही रुपयों की बचत हो रही है। इससे पर्यावरण शुद्ध रहता है और बाजार पर आश्रित नहीं रहते।

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शुरू हुआ सब्जी का फलों का उत्पादन
डॉ. अशोक चौदहा जैविक खेती का प्रशिक्षण रामसुख दुबे से लेकर किचन गार्डन में जैविक सब्जियों का उत्पादन शुरू कर दिए हैं। गोबर, गौमूत्र के लिए गौपालन की शुरुआत भी की है। इसके अलावा केंचुआ खाद निर्माण शुरू किया है। कम जगह में घर के उपयोग के लिए कई प्रकार की सब्जियां उगा रहे हैं। किचन गार्डन में भिंडी, टमाटर, बरबटी, मिर्ची, करेला, बैगन लगाया है। इसके अतिरिक्त स्वीटकॉर्न, अंगूर, चीकू, जामुन, आम, आम्रपाली एवं दसहरी आम, कटहल, नींबू, मोसंबी के पौधे लगाए हैं जो फल देना शुरू कर दिए हैं। सभी में गोबर कम्पोस्ट, केंचुआ खाद एवं कीटनाशक गौमूत्र, नीम पत्तियों का उपयोग कर रहे हैं। घर के दैनिक उपयोग के लिए ककड़ी एवं तरबूज को भी लगाया है।

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डॉ. गुप्ता ने भी की पहल
जैविक तरीके से सब्जी सहित अन्य फसलों का उत्पादन शहर के चिकित्सक डॉ. राजेंद्र गुप्ता द्वारा भी पहल की जा रही है। डॉ. गुप्ता सब्जी, गन्ना सहित अन्य फसलें तैयार कर रहे हैं। खास बात यह है कि दोनों चिकित्सकों द्वारा जैविक कृषि के क्षेत्र में की जा रही इस पहल को अन्य चिकित्सक व साथी अवलोकन कर रहे हैं और अपने घर पर व फॉर्महाउस में तैयारी शुरू कर चुके हैं।