23 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रपटा नाला: खबर के बाद हरकत में प्रशासन, जांच टीम गठित, अब चलेगा बुलडोजर

दो माह की सुस्ती के बाद जागा सिस्टम, 24 मार्च को टूटेगा अवैध निर्माण, कलेक्टर के आदेश पर 12 सदस्यीय टीम गठित, नगर निगम मशीनरी और पुलिस बल रहेगा तैनात

2 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Mar 23, 2026

Action will be taken against encroachment in Rapta Nala

Action will be taken against encroachment in Rapta Nala

कटनी. खिरहनी स्थित रपटा नाला पर अवैध निर्माण के मामले में आखिरकार प्रशासन हरकत में आ गया है। लंबे समय से कार्रवाई टलने और मामला सुर्खियों में आने के बाद अब 24 मार्च को अवैध बाउंड्रीवाल तोडऩे की तैयारी पूरी कर ली गई है। कलेक्टर न्यायालय के आदेश के बावजूद दो माह तक फाइलों में दबी कार्रवाई अब जमीन पर उतरने जा रही है। जानकारी के अनुसार बिल्डर प्रवीण बजाज उर्फ पप्पू द्वारा रपटा नाला पर अवैध रूप से बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई थी, जिससे नाले का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया। इस मामले में पहले ही एसडीएम द्वारा 16 अगस्त 2024 को निर्माण हटाने के आदेश दिए गए थे, जिसे बाद में कलेक्टर न्यायालय ने भी सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी थी। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे। लगातार देरी और मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) द्वारा 24 मार्च को मौके पर कार्रवाई के लिए 12 सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। यह टीम मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण को हटाएगी और इसकी रिपोर्ट भी प्रस्तुत करेगी। कार्रवाई के लिए गठित टीम में अजीत तिवारी तहसीलदार कटनी नगर, संदीप सिंह, तहसीलदार, साक्षी शुक्ला, नायब तहसीलदार, अनामिका तिवारी, नायब तहसीलदार, ब्रजेश द्विवेदी सहित अन्य शामिल है। कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम को जेसीबी और पोकलेन मशीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पुलिस विभाग को पर्याप्त बल, जिसमें महिला पुलिस भी शामिल होगी, मौके पर तैनात रहने को कहा गया है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन इस बार किसी भी स्थिति में कार्रवाई को टालने के मूड में नहीं है।

पुराने रिकार्ड में दर्ज है नाला

वर्ष 1907-08 के मिसल अभिलेख में खसरा नंबर 442 को शासकीय पानी मद और नाला के रूप में दर्ज पाया गया है। इसके बावजूद वर्तमान में यह भूमि निजी स्वामित्व में दर्ज कैसे हो गई, इसका कोई वैध अभिलेख उपलब्ध नहीं है। कलेक्टर न्यायालय ने अवैध निर्माण को तत्काल हटाने और शासकीय ‘पानी मद’ भूमि के निजी नाम पर दर्ज होने की जांच 15 दिन में पूरी करने के निर्देश दिए थे। लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी न तो निर्माण हटाया गया और न ही जांच रिपोर्ट सामने आई। इस देरी ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। राज्य स्तर पर जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया जा रहा है।

इनका कहना

कलेक्टर न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए 24 मार्च को अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। मामले में लापरवाही की भी समीक्षा की जाएगी, फिलहाल अवैध निर्माण हटाना प्राथमिकता है। 12 सदस्यीय टीम गठित की गई है जो अवैध निर्माण पर कार्रवाई करेगी।

प्रमोद चतुर्वेदी, एसडीएम, कटनी