
If the situation prevails, a large number of voters can not vote
कटनी. 16 अक्टूबर को कलेक्टर केवीएस चौधरी ने बहोरीबंद ब्लॉक के ग्राम पटना (खकरा) गांव का दौरा किया। ग्रामीणों से बात की और मतदाता सूची में नाम जुड़े होने और नहीं होने के बारे में जानकारी ली। तभी कलेक्टर ने मतदाता सूची का रेंडम परीक्षण किया। यानि नाम पुकारते गए और मतदाता बताते गए कि वे गांव में हैं या नहीं है। इस परीक्षण के दौरान बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ। पता चला गांव में 10 मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है। कलेक्टर को अंदाजा हो गया था कि मतदाता सूची की जमीनी हकीकत कुछ और है। बीएलओ (बूथ लेवल ऑफीसर) को मतदाता सूची अपडेट करने के दौरान डोर-टू-डोर सर्वे कर मतदाता सूची अपडेट करनी थी। ऐसा नहीं किया गया। यहां से कलेक्टर राखी गांव पहुंचे। वहां भी ऐसी ही गड़बड़ी मिली। कलेक्टर ने दोनों बीएलओ को निलंबित कर दूसरे को प्रभार देकर डोर टू डोर सर्वे करवाने के निर्देश तो दे दिये, लेकिन यह भी पता चल गया कि जिले में मतदाता सूची अपडेट करने में बड़ी लापरवाही हुई है।
इस खुलासे के बाद जिलेभर में चर्चा यही है कि पूरे जिले में न जाने कितने मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है। दरअसल मतदाता भी अपने नाम की पड़ताल वोट डालने से एक या दो दिन पहले करते हैं। और तब तक बहुत विलंब हो जाएगा। बताया जा रहा है कि कटनी जिले में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं। इसमें बीएलओ के साथ ही उन अधिकारियों की भूमिका भी सवालों में हैं जो बीएलओ के कार्य की मॉनीटरिंग करते हैं।
मतदाताओं के नाम एक नवंबर तक आयोग के इआरओ पोर्टल में फीड नहीं हुआ तो ये मतदाता आगामी 28 नवंबर को मतदान नहीं कर सकेंगे। जिलेभर में ऐसे मतदाताओं की संख्या बहुत ज्यादा बताई जा रही है। कलेक्टर केवीएस चौधरी बताते हैं कि मतदातासूची में मतदाताओं का नाम छूटने मामले को गंभीरता से लिया गया है। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है। डोर टू डोर सर्वे जारी रखने, मतदाताओं को एक बार सूची का अवलोकन अवश्य कराने और जिले के सभी बीएलओ को सूची की समीक्षा के निर्देश दिये गए हैं।
Published on:
19 Oct 2018 10:10 am
